मेरी इक्‍यावन व्‍यंग्‍य रचनांए

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2 Comments

  1. जान कर अच्छा लगा, कि अपनी कोई कृति 'संजीव' जैसे सार्थक व्यक्ति के पास 'जीवित' है. is abhivan pahalkeliye jitani bhi tareef kee jaye, kam hai.धन्यवाद.

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  2. प्रिय तिवारी जी, आप मन के द्वारा छत्तीसगढ़ी साहित्य के क्षेत्र म करे गए प्रयास के कतको प्रसंशा करे जाए तेन ह काम हे. मैं ह घलो ओहि भूमि के रहईया अउ बसईया हव अउ बाहिर रह के ओला सुने-बोले ल तरस जाथों। एक दिन अइसने नेट म किंदरत आप मन के पेज ल पायेंव अउ मोहा गयेंव। बहुत सार्थक प्रयास हे आप के. पहिली मैं बेलासपुर म पढाई के ज़माना म श्री रामेश्वर वैष्णव जी के एक ठो पेपर म छपे कालम "उत्ता धुर्रा" ल खचित ढूंढ ढांढ के पढ़त रहेव अउ ओ ज़माना म उंखर व्यंग मोला आकर्षित करत रहिस अउ मैं पठ छत्तीसगढ़ी बोले ल सुरु करेंव। फेर नौकरी म बाहिर आ गयेव अउ वो नाता टूटगे। आप मन के पेज ले जुरके मोला भारी आनंद महसूस होवत हे. अउ साथ म एहू चाहत हे कि आपके माध्यम से बैष्णव जी कसन लेख, साहित्य पढ़े बर मिलही। धन्यवाद।- संजय सिंह, भोपाल। 9424744000

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