चरणदास चोर

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3 Comments

  1. छत्तीसगढ़ की कला साहित्य और संस्कृति को आपने दुनिया के समक्ष प्रस्तुत करने का जो बीड़ा उठाया है उसके लिए आपकी जितनी सराहना की जाए कम है। ऐसी मेहनत वही कर सकता है जो अपनी धरती अपनी संस्कृति से गहरे तक जुड़ा हो। छत्तीसगढ़ के रचनाकार आपके सदैव अभारी रहेंगे। ऐसा विशाल मंच और कहीं संभव ही नहीं है। आपको ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं।
    - डॉ. रत्ना वर्मा

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  2. भइया आप कतेनक काम करथव । घर-परिवार , वकालत , नौकरी , चर-चर ठिन बलाग अउ वोहू मं एक ठिन इनटर नेट पत्रिका अउ यहां दे खुला पुस्तकालय एहा तो समुंदर बरोबर हे । धन्य हव आपो अब जानेव कि आप पदमसिरी के मांग काबर करथव । सिरतोन म आप एखर हकदार हव। आपके ये पुस्तकालय बड़ सुघ्घर अउ गियानबरधक हे । पढ़इया लइका खासकर के छत्तीसगढ़िया मम बर तो बड़ काम के जिनिस हे। आप ल एखर बर गाड़ा-गाड़ा बधाई। पालगी।

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  3. हबीब साहब के ये किताब ह रंगकर्मी मन बर कोनो गीता कुरान ले कम नइ हे, साक्षात भागीरथी रही नाटय गंगा ल उतार दे हव.
    संजीव भइया सादर नमन.

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