आबू की बेटियाँ

दयार्द्र लगीं मुझे बहुत ही
आबू पर्वत की ऋंखलायें
हरी-भरीं
स्थिर पहाड़ों पर दौड़तीं
जल-धारायें

ढॅक लेते उतरते / उतराते बादल
और बादलों पर पैर रखता मैं
तत्काल जान जाता कि
कितने खोखले होते हैं
ऊपर बहने वाले
गरजने और बरसने वाले
जीवन देने का दावा करते
श्वेत-कपसीले बादल

फक्क सफेद-सफेद धुँध से
नहीं ढॅकते सिर्फ आबू पर्वत के शीर्ष
ढॅकी रहती है
प्रकृति-रूपा सभी और सब कुछ

अमूमन धरती पर
कुछ भी नहीं होता सफेद
श्वेत दैवीयता के लक्षणों में चिन्हित है
श्वेत पंकज, श्वेत हंस और शुचिता

मुझे दिख जाती हैं
आबू पर्वत की बेटियों की हथेलियाँ
श्रम के स्वेद से धुलती हथेलियाँ
और मैं तय नहीं कर पाता
कि धुँध ज्यादा सफेद है
आश्रम-कुमारियों के वस्त्र / कुछ अजन्मे स्वप्न
या फिर आबू पर्वत की बेटियों की हथेलियाँ

हाँ! मैं तयशुदा जानता हूँ कि
कौन सी सफेदी
सबसे अधिक है
निश्छल और पवित्र

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