लूले पत्थर

जिन्दगी भर
जिन्दगी के पैरों तले ही
रहता है पत्थर

जिन्दगी पत्थर में
भरती रहती है
भरपूर जिन्दगी
जिन्दगी भर

पत्थर पड़ जाने के बाद
नहीं रह जाती जिन्दगी, जिन्दगी
कहते हैं पत्थर के नीचे
कुलबुलाती रहती है
ताजिन्दगी जिन्दगी

सुना है,
बावक्त कयामत
उठेगी जिन्दगी
रूबरु होनेे उसके
जो कभी रूबरु नहीं हुआ
किसी के

सोचता हूँ मैं
कयामत के वक्त
कहाँ होगा पत्थर
जिन्दगी के नीचेे या
जिन्दगी के ऊपर

पत्थरों को तराशने वालों ने
नहीं सोचा कभी
पत्थरों के बारे में
पत्थरों की पनाह में
जागती-सोती
जिन्दगियों के बारे में

पत्थरों को जिन्दगी के साथ
कायनात बख्शने वाले ने भी
कहाँ सोचा
कहाँ होंगे पत्थर
कयामत के वक्त
ता-कयामत जिन्होंने
उठाई है जिम्मेदारी
जिन्दगी और मुर्दानगी में
फर्क जताने की
जिन्दगी को जिलाने की
मौत को दबाने की

कयामत के दिन पूछेगा पत्थर
पकड़ कर दामन, खुदा से
बता कयामत के बाद
मेरी जगह है कहाँ?
अगर हाथ होते तो पत्थर
तार-तार कर देता गरेबाँ
कयामत के दिन
जिन्दगी, मौत और खुद को
बनाने वाले का
स्वयं को कहीं रूपोश रख
दुनिया को चलाने वाले का

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