गढ़कलेवा : छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजन के गढ़





रायपुर, 04 मार्च 2017। राज्य शासन के संस्कृति विभाग कोति ले महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय स्थित गढ़कलेवा मं छत्तीसगढ़ पारंपरिक व्यंजन ल अवइया आगंतुक मन ल निरधारित कीमत म उपलब्‍ध कराये जात हे। विभाग ले छत्तीसगढ़ राज्य के पारंपरिक खान-पान शैली ल संरक्षित, प्रसारित अउ प्रचारित करे के प्रयास करे गए हे। मनखे इहां छत्तीसगढ़ी व्यंजन मन के आस्वादन करे बर आरहिन। इहां चीला, फरा, लाडू, खुरमी, ठेठरी, उरीद बरा, मूंग बरा के संग अऊ कई स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजन मन के बिक्री करे जारहिन। संस्कृति विभाग के ये गढ़ कलेचा के संचालन मोनिषा महिला स्व-सहायता समूह ह करत हे। समूह ह अंदाजन 35 मनखे ल रोजगार दे हे। उल्लेखनीय हे कि पाछू साल 26 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ह गढ़कलेवा के शुभारंभ करे रहिस हे।
गढ़कलेवा स्थल ल एक छत्तीसगढ़ी गांव के परिवेश मं बनए गए हे, जहां आगंतुक मन ल बइठे बर माची, खटिया के व्‍यवस्‍था हे। इहां मनखे छत्तीसगढ़ी व्यंजन मन के रसास्वादन लेके आनंद लेरहिन। इहां पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गीत अऊ लोकधुन बाद्य के रूप मं बजत रहिरहिन। छत्तीसगढ़ी व्यंजन मन के स्वाद आन प्रदेश के पारंपरिक खान-पान ले अलग हे। गढ़कलेवा ह खान-पान के दिशा मं मील के पत्थर तो हे ही, इहां आने वाले मन बर एक सुखद अउ चिरम्मरणीय स्थान घलोक हे। ये स्वाद के दृष्टि ले सुकून के दृष्टि ले अऊ ग्रामीण परिवेश के सौन्दर्य के आनंद ही अलग हे।


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