छन्द:प्रभाकर

महामहोपाध्याय, साहित्य-वाचस्पति राययहादुर जगन्‍नाथ प्रसाद (भानु-कवि) एकस्ट्रा असिस्टैन्ट कमिश्‍नर बिलासपुर, मध्य प्रदेश।
प्रकाशिका
पूर्णिमा देवी, घर्मपत्नि स्वर्गीय बाबू जुगल किशोर

प्रकाशक - जगन्नाथ प्रिटिंग प्रेस
प्रथम संस्‍करण जून 1894, वर्धा, सीपी एण्‍ड बरार

छंद:शास्त्र के कर्ता महर्षि पिंगल हैं, उनका रचा हुआ शास्त्र भी पिंगल के नाम से प्रसिद्घ है। कोष में पिंगल शब्द का अथ सर्प भी है, अतएव लोग इन्हें फण, अहि और भुजंगादि नामों से भी स्मरण करते हैं यथा इनको शेषजी का अवतार भी मानते हैं।

https://drive.google.com/file/d/1yUKoaudB0yGSxARi1TVGLcZ1bILJZ5yM/view?usp=sharing


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1 Comments

  1. इस महती कार्य की जितनी प्रशंसा की जाए, कम होगी। ऐसा दुर्लभ साहित्य नव पीढ़ी के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

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