काशी और फांस का रिश्ता है पुराना : फांसीसी राष्ट्रपति के आगमन से नई उम्मीद

वाराणसी । दुनिया के प्राचीन शहरों में से 'एक काशी और फांस का पुराना रिश्ता रहा है। दोनों ही शहरों में शिल्प खासा समृद्ध है। नदियों पर बसे दोनों शहर अपने खूबसूरत शिल्प के लिए जाने जाते हैं। काशी में फांस का शिल्प पल-बढ रहा है।
सिल्क रूट में भारत के काशी के साथ ही फांस का लियोन शहर भी शामिल है। दोनों शहर बुनकरी के लिए प्रसिद्ध हैं और दोनों ही क्षेत्रों में रेशम की बुनाई जकार्ड पर होती है। जकार्ड पर रेशम के वस्त्र तैयार किए जाते हैं।
माना जाता है कि जकार्ड फांस से भारत और फिर काशी पहुंचा । हालांकि फांस के लियोन में जकार्ड का चलन बेहद कम हो गया है लेकिन काशी में अभी इसका खूब इस्तेमाल किया जाता है। काशी की बुनकरी में फांस के भी कुछ अंश दिखते हैं।
फांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों के काशी आगमन से यहां के शिल्प की पहचान मजबूत होने की उम्मीद है। यही कारण है कि काशी आ रहे फांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों काशी के शिल्प को देखने के लिए दीनदयाल हस्तकला संकुल जाएंगे।
वाराणसी । दुनिया के प्राचीन शहरों में से 'एक काशी और फांस का पुराना रिश्ता रहा है। दोनों ही शहरों में शिल्प खासा समृद्ध है। नदियों पर बसे दोनों शहर अपने खूबसूरत शिल्प के लिए जाने जाते हैं। काशी में फांस का शिल्प पल-बढ रहा है।
सिल्क रूट में भारत के काशी के साथ ही फांस का लियोन शहर भी शामिल है। दोनों शहर बुनकरी के लिए प्रसिद्ध हैं और दोनों ही क्षेत्रों में रेशम की बुनाई जकार्ड पर होती है। जकार्ड पर रेशम के वस्त्र तैयार किए जाते हैं।
माना जाता है कि जकार्ड फांस से भारत और फिर काशी पहुंचा । हालांकि फांस के लियोन में जकार्ड का चलन बेहद कम हो गया है लेकिन काशी में अभी इसका खूब इस्तेमाल किया जाता है। काशी की बुनकरी में फांस के भी कुछ अंश दिखते हैं।
फांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों के काशी आगमन से यहां के शिल्प की पहचान मजबूत होने की उम्मीद है। यही कारण है कि काशी आ रहे फांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों काशी के शिल्प को देखने के लिए दीनदयाल हस्तकला संकुल जाएंगे।






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