प्राचीन अभिलेख, पुरालिपि, मुद्राशास्त्र अऊ प्रतिभाशास्त्र संबंधी तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू

रायपुर,8 मार्च 2018। राज्य शासन के संस्कृति अउ पुरातत्व संचालनालय कोति ले आयोजित प्राचीन अभिलेख, पुरालिपि, मुद्राशास्त्र अऊ प्रतिमाशास्त्र संबंधी तीन दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ, संस्कृति अउ पर्यटन विभाग के सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह ह करिन। कार्यक्रम के अध्यक्षता वरिष्ठ पुराविद पद्मश्री सम्मानित श्री ए.के. शर्मा ह करिन। 8 ले 10 मार्च तक आयोजित ये कार्यशाला महंत घासीदास संग्रहालय परिसर स्थित संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह म आयोजित करे गए हे। ए अवसर म संग्रहालय परिसर म भिलाई के मुद्रा संग्राहक श्री आशीष दास ह प्राचीन काल के मुद्रा मन के आकर्षक प्रदर्शनी लगाये हें।


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श्रीमती निहारिका बारिक सिंह ह कहिन कि छत्तीसगढ़ पुरासंपदा के विविधता अऊ बाहुलता के दृष्टि ले संपन्न राज्य हे। उमन कहिन कि पुरातत्वीय संपदा के संरक्षण होना जरूरी हे। संस्कृति सचिव ह कहिन कि स्कूली छात्र मन ल जुन्ना चीज मन के ज्ञान होना बहुत जरूरी हे। ए खातिर स्कूली शिक्षा म पुरातत्व के शिक्षा देहे जाना चाही। ग्रामीण क्षेत्र मन म बहुमूल्य पुरा संपदा हे। ग्रामीणजन मन ल एखर महत्व के ज्ञान हो अऊ ओ मन एकर संरक्षण खुदे करंय। एखर बर ओ मन ल प्रेरित करे के जरूरत हे। उमन कहिन कि खांटी जानकार के सलाह म पुरातत्वीय काम म अऊ तेजी लाए जाही। संस्कृति सचिव ह संचालक संस्कृति ले कहिन कि कार्यशाला के निष्कर्ष म पुरातत्व के विस्तृत कार्ययोजना बनाए जाय।


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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मैसूर के पहिली निदेशक डॉ. टी.एस. रविशंकर ह प्राचीन अभिलेख अऊ पुरालिपि के महत्व के बारे म बताइन कि देश के गौरवशाली प्राचीन संस्कृति अऊ इतिहास के सही ज्ञान इही ले होय हे। उमन कहिन कि भारत संग एशिया के देश मन म कई महत्वपूर्ण पुरा संपदा हे अऊ एखर से प्राचीन सभ्यता, संस्कृति अर्थशास्त्र अऊ राजनीति के बारे म जाने जा सकत हे। श्री रविशंकर ह प्रजेंटेशन के संग देश के प्राचीन काल के जानकारी मन बर पुरातत्वीय स्त्रोत, शिलालेख, जुन्ना मुद्रा, ताम्रपत्र अऊ प्रतिमा मन के महत्व के बारे म जानकारी दीन। उमन कार्यशाला म हिस्सा लेवत मनखे मन के कई ठन प्रश्न मन के उत्तर दीन। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लखनऊ के पहिली निदेशक डॉ. जयप्रकाश ह प्राचीन भारत ले सम्बद्ध महत्वपूर्ण अभिलेख मन के बारे म बताइन। उमन कहिन कि भारतीय संस्कृति म छत्तीसगढ़ के पुरासम्पदा अभिलेख मन के महत्वपूर्ण स्थान हे। उमन बताइन कि ए क्षेत्र म ब्राम्ही, सिद्धमातृका, नगरी लिपि, संस्कृत अऊ हिन्दी भाषा मन के अभिलेख पाए गए हे। भिलाई के कला समीक्षक प्रोफेसर श्री ए.एल. श्रीवास्तव ह घलोक कार्यशाला ल संबोधित करिन।


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कार्यक्रम के अध्यक्षता करत पुरातत्वेत्ता श्री ए.के. शर्मा ह कहिन कि राज्य निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ म पुरातत्व के महत्वपूर्ण काम करे गए हे। उमन बताइन कि खुदाई म सिरपुर ले महत्वपूर्ण जानकारी मिलीस, जेखर से सिरपुर ल विश्व स्तरीय ख्याति मिलीस। अइसनहे इहां अऊ पुरातत्वीय खुदाई करे जाना हे। कार्यशाला म स्वागत उद्बोधन देवत संस्कृति संचालक श्री जितेन्द्र शुक्ला ह कार्यशाला के महत्व उपर प्रकाश डालिन। संचालन पुरातत्व प्रभारी श्री प्रभात सिंह ह करिन। ए अवसर म स्थानीय कॉलेज अऊ विश्वविद्यालय मन के इतिहास अऊ पुरातत्व विसय के प्राध्यापक, शोधार्थी छात्र, जिला पुरातत्व संघ के सदस्य अऊ संग्रहालय मन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहिन।


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