दिव्यांगों का शिक्षण समसामयिक और प्रभावी बनाने कार्यशाला सम्पन्न

दिव्यांगों के लिए विशेष शिक्षकों की जिम्मेदारियों, चुनौतियों एवं आश्यकताओं को समसामायिक और प्रभावी बनाने तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन 26 जुलाई को राज्य संसाधन एवं पुनर्वास केन्द्र माना कैम्प में हुआ। कार्यशाला का आयोजन छत्तीसगढ़ के समाज कल्याण विभाग और आकांक्षा इंस्टिट्यूट और लर्निंग एवं एम्पावरमेंट के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। जसमें राज्य के सभी 27 जिलों से आए 72 विशेष शिक्षकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन समाज कल्याण विभाग के संचालक श्री चन्द्रकांत उइके ने किया। श्री उइके ने कहा कि कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में विशेष शिक्षक समावेशी शिक्षा में तैयार हो सकेंगे।  कार्यशाला में समावेशी शिक्षा की विषय विशेषज्ञ डॉ. जयंती नारायण ने विभिन्न गतिविधियों की सहायता से विशेष शिक्षा और समावेशी शिक्षा के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने शिक्षकों को दिव्यांगता की श्रेणियों के आधार पर विशेष शिक्षण और उसमें आने वाली चुनौतियों के संबंध में मार्गदर्शन दिया। डॉ. निवेदिता पटनाईक ने दिव्यांगता से संबंधित अधिनियमों और डॉ. सिमी श्रीवास्तव ने समावेशी शिक्षा में विशेष शिक्षकों की भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी दी। डॉ. अमिताभ मिश्रा ने दिव्यांगता से ग्रसित बच्चों के सीखने में तकनीकी सहायता के बारे में बताया। कार्यशाला में विशेष शिक्षकों सहित समाज कल्याण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

Post a Comment

0 Comments