बिलासपुर वैभव: पहला विकास रूप - आकार

पहला विकास

रूप - आकार Shape
श्री विष्णु भगवान ने कछुए का रूप धारण करके पीठ पर पर्वत को ले, देवताओं और दानवों को समुद्र-मंथन में सहायता दी थी। बिलासपुर जिले का आकार करीब-करीब ऐसा ही है। पश्चिम में पंडरिया जमींदारी Pandaria Zamindari की पहाडियाँ कछुए के मुँह की तरह निकली हुई हैं। जिले के बीच का भाग उसकी पीठ के समान है । उत्तर में पेंडरा-मातिका पहाडी Pandara-Matika Hills भाग पर्वत के सदृश है, जो कछुए की पीठ पर मानो मथानी की डांडी का काम दे रहा है। चंद्रपुर Chandrapur और पदमपुर Padampur की जमींदारियों को, जो पूर्व की ओर अलग लंबी निकली हुई महानदा के साथ-साथ चली गई है, बासुकी नाग की पूँछ और मुख समझिए, जिसने समुद्र के मथने में डोरी का काम दिया था। बिलासपुर जिले को कछुए की उपमा लागू भी होती है। विपत्ति पड्ने पर यह कछुए की तरह सिर को सिकोडकर पीठ पर अत्याचार की मार को सहता रहता है।

सीमा Boundary
यह जिला 2337 और 23'/7' उत्तरीय अक्षांश और 81/12' और 8 340' । पूर्वार्ध देशान्तर के बीच स्थित है। इस जिले के उत्तर में रीवाँ Rinwa, कोरिया Koria और सिरगुजार Sargujar के राज्य हैं । पूर्व की ओर से यह उदयपुर Udaipur, सक्ती Sakti, रायगढ Raigarh और गांगपुर रियासतों Gangpur Riyasat से घिरा हुआ है। दक्षिण में इसके संबलपुर Sambalpur, सारंगढ राज्य Sarangadh State और रायपुर Raipur तथा दुरुग Durg के जिले हैं। कंवर्धा रियासत Kanwardha princely state तथा मंडला-जिले Mandla District इसे पश्चिम की ओर से घेरे हुए हैं। इस जिले का विस्तार 7602 वर्गमील है। मध्यप्रदेश Madya Pradesh और बरार Berar के अन्य जिलों के मुकाबले में क्षेत्रफल के लिहाज से यह तीसरे नंबर पर है और मनुष्य संख्या के लिहाज से दूसरे नंबर पर। इस जिले की लंबाई पश्चिम से पूर्व (पंडरिया से पदमपुर तक Pandaria to Padampur) 190 मील और चौडाई उत्तर से दक्षिण 80 मील है।

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पहाडियाँ The hills
जिले का उत्तरी, पश्चिमी और पूर्वी भाग पहाडियों से भरा हुआ है, पर दक्षिणी भाग मैदानी है, जिसे ' डंडहा' कहते हैं। इस भाग की लंबाई कुछ अधिक है। यहां बडी दूर तक महानदी और शिवनाथ नदी बहती है। मेकल पहाडु की श्रेणियाँ इस जिले को ईशान से तक घेरे हुए हैं। पूर्वी सीमा सक्ती रियासत State of Sakti की पहाडियों से, जो महानदी तक चली आई हैं, बनती हैं। जिले के उत्तरी भाग को पूरा पहाडी ही समझिए। कहीं पहाडियाँ घुसती हुई समभूमि में चली गई हैं, कहीं ऐसे खड्डों के बीच में सिर निकाले खड्डी हैं, जिन्हें देखते भय होता है। इन पर प्राय: बारहों मास ऐसी अच्छी हरियाली छाई रहती है, जिसे देखकर नेत्र सुखी होते हैं, जिन्हें प्रकृति, शोभा देखनी हो, वे यदि वर्षा शरद या बसंत ऋतु में किसी दिन सवेरे बिलासपुर स्टेशन से पेंडरा-रोड Pendra Road स्टेशन तक पैदल या रेल पर जाएँ तो उन्हें ऐसे सुंदर तथा मन और प्राण को आनंद देनेवाले दृश्य दिखाई दें, जो उन्हें जन्म भर न भूलें। हां, तो ये पहाडी भाग जिले की प्राय 5400 वर्गमील भूमि पर फैले हुए हैं, तबकि खुला हुआ भाग लगभग 3000 वर्गमील ही है।

नदियाँ
इस जिले की नदियाँ प्राय: उत्तर और पहाडियों से निकलकर दक्षिण और पूर्व दिशा की ओर बह कर अंत में महानदी में जा मिलती हैं। महानदी जिले की दक्षिणी सीमा पर 40 मील तक बहती है। और इस जिले को रायपुर-जिला सारंगढ-रियासत और सम्बलपुर-जिले से अलग करती है। वर्षा ऋतु में इस नदी की चौडाई 1 मील से अधिक हो जाती है, पर ग्रीष्म में आप इसकी एक पतली धार कठिनता से पाइएगा।
शिवनाथ Shivnath और हसदो Hasdev, महानदी की मुख्य सहायक नदियाँ हैं। शिवनाथ जिले की दक्षिणी सीमा को अनुमान 40 मील तक घेरती हुई महानदी में जा मिली है । हाफ नदी पंडरिया की पहाडी से निकलकर मुंगेली तहसील में बहती हुई दुरुग जिले में जा निकली है और नांदघाट के पास शिवनाथ नदी में जा मिली है। सकरी और फोंक पश्चिमी किनारे पर हांफती सहायता नदियाँ हैं। मनियारी नदी लोरमी की पहाडी से निकलती है और बिलासपुर तहसील को मुंगेली तहसील से अलग करती हुई शिवनाथ नदी में जा मिलती है । खारुन अरपा के पूर्वी किनारे की सहायक नदी है। लीलागर कोरबा से निकलकर बिलासपुर और जांजगीर तहसील की सीमा पर बहती हुई। शिवनाथ के महानदी में मिलने से जरा पहले उसमें जा मिली है।

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जिले के पूर्वी भाग में हसदो मुख्य नदी है। इस जिले में यह कोरिया की रियासत से आकर घुसती है और मातिन तथा उपरोडा के पहाडी हिस्सों में बहती हुई छुरी, कोरवा और खांपा जमींदारियों की सैर करती, शिवरीनारायण से आठ मील पूर्व महानदी में जा मिली है। इसकी प्रसिद्ध सहायक नदी शंकरी या अहिरान है, जो लिफाफा किले के पास से निकलकर कोरबा खास में हसदो से जा मिली है। हसदो में चोर पालकी बडी अधिकता है। इससे यह आवश्यक है कि यह जाने हुए मार्ग पर से ही पार की जाए।

तहसील Tahsil
यह जिला चार तहसील में बँटा हुआ है। बिलासपुर Bilaspur, मुंगेली Mungeli, जांजगीर Janjgir, और घोरा Katghora। बिलासपुर तहसील जिले के बीच में है मुंगेरी पश्चिम में, जांजगीर, पूर्व में और कटपोरा उत्तर में हैं।

जमींदारियाँ Zamingari
33 इस जिले में कुल 10 जमींदारियाँ हैं। कंतेली और चांपा को छोड शेष सब जमींदारियाँ पहाडी हिस्सों में हैं। पेंडरा Pendra, मातिन Matin और उपरोडा Uproda जिले के अत्यंत उत्तरी भाग में हैं और इनमें पेंडरा जमींदारी सबसे बडी है । यह 2000 फुट ऊँची समभूमि पर फैली हुई है और यहाँ की जलवायु जिले के अन्य भागों की अपेक्षा शीतल है । इसमें घने जंगल और खड्डों की संख्या अधिक है तथा कुछ भाग खुला हुआ (मैदानी) भी है। मातिन और उपरोडा जमींदारियाँ बहुत ऊँची-नीची भूमि पर हैं और प्राय: घोर वन से परिपूर्ण हैं । यहाँ के गाँवों को बिखरी हुई झोपडियों का समूह समझिए, जो प्राण-घातक सिंह या चीता के उपद्रव अथवा किसी उडनेवाली बीमारी पर तुरतं ही छोडा जा सकता है। यहाँ के जंगलों में भी पाए जाते हैं।इस जमींदारियों के दक्षिण में केंदा Kenda, शका Shaka, छुरी Chhuri और कोरबा Korba की जमींदारियाँ हैं, जिनमें लाफाको तीन शेप तीन, जमींदारियों में मैदानी भूमि भी है। कोरबा जमीदारी जिले के ईशानीय कोण में पंडिरयां पश्चिमी भाग में है । गंडरियां Pandariya का वह हिस्सा जो मुंगेली तहसील से लगा हुआ है, खुला है। पर वह भाग जो पश्चिमी किनारे पर है, जंगलों से और पहाडियों से घिरा हुआ है । लोरमी Lormi का सरकारी नदी भारी जंगल 410 वर्गमील में फैला हुआ है। और गंडरिया जमींदारी Pandariya Zamindari को केंदा जमींदारी Kenda Zamindari से अलग है।

वर्षा और जलवायु Rain and climate
इस जिले में सबसे अधिक वर्षा बिलासपुर तहसील में और सबसे कम मुंगेली तहसील में होती है। बिलासपुर तहसील में मटासी जमीन की अधिकता है और चावल अधिक पैदा होता है, इसलिए यहाँ वर्षा की अधिक आवश्यकता भी है। मुंगेली तहसील की जमीन काली (कन्हार) है और वहाँ उन्हारी की फसल अधिक होती है। इस जिले की जलवायु रायपुर जिले की जलवायु से मिलती जुलती है। पर खास बिलासपुर शहर रायपुर से कुछ ठंडा रहता है। कारण इसका यह है कि बिलासपुर काली जमीन पर बसा हुआ है, जबकि रायपुर की जमीन लाल है । इस जिले में मई के मास में थर्मामीटर 116 तक पहुँच जाता है। अप्रैल के मध्य से जून के मध्य तक प्राय: गर्म आँधी चला करती है और गरमी भी बडे गजब की पडुती है, पर हां, कभी-कभी संध्या समय में बादल घिर आते हैं तथा थोडा पानी भी बरस जाता है, जिसमें कुछ ठंडक पहुँच जाती है । पेंडरा गरमी के दिनों में भी ठंडा रहता है।

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