आज नागपंचमी, छग के इन अखाड़ों में होंगे दंगल- कुश्ती

दुर्ग, पौराणिक दृष्टि से नाग पूजा का संबंध महाभारत काल से माना जाता है। छत्तीसगढ़ में भी नागपंचमी पर्व मनाने की परंपरा रही है। सुबह से ही सपेरे सांपों को लेकर घर-घर पहुंच रहे हैं और भक्त अपनी इच्छा के अनुसार उन्हें दान-दक्षिणा दे रहे हैं। घरों में भी नागदेवता की विधि विधान से पूजा करने के साथ उन्हें दूध और मीठे का भोग लगाया जा रहा है।
शिव मंदिरों में जहां दिनभर जलाभिषेक का सिलसिला चलेगा तो वहीं, दिन भर को अखाड़ों में दंगल के दांव देखने को मिलेंगे। पहलवान अपने अखाड़ों में सालभर जिस मिट्टी पर कुश्ती का अभ्यास करते हैं, नागपंचमी की पूजा के लिए उसी मिट्टी से भगवान रुद्र की प्रतिमा बनाई जाती है। रायपुर के विभिन्न अखाड़ों में भगवान रुद्र की प्रतिमा को अंतिम रूप दिया गया है। उसके बाद अखाड़ों में यह प्रतिमा स्थापित की गई और फिर नागपंचमी को विधि- विधान से पूजा हो रही है।
रायपुर के कुशालपुर स्थित दंतेश्वरी मंदिर अखाड़ा में नागपंचमी की पूजा की जोर-शोर से चल रही हैं। यह अखाड़ा करीब डेढ सौ साल पुराना माना जाता है। यहां पर हर साल नागपंचमी को दंगल का आयोजन किया जाता है। इस बार यहां पर खुली कुश्ती की प्रतियोगिता देखने को मिलेगी, जिसमें करीब 50 पहलवान अपना दमखम दिखाएंगे। रायपुर के अलावा दूसरे जिलों से भी पहलवान इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचेंगे।  इसके अलावा जैतूसाव मठ में भी दंगल की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। मठ में पिछले 98 सालों से कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश के कई बडे़ पहलवान इसी अखाड़े से निकले हैं। मठ में आज नागपंचमी पर दोपहर 12 बजे अखाड़े में विशेष पूजा होगी । इसके बाद अखाड़े में कुश्ती स्पर्धा में पहलवानों के दांवपेंच देखने को मिलेंगे। नागपंचमी पर यह भी पढ़ें .. आज नागपंचमी, महत्‍व और मान्‍यता नागों के बारे में हैरान कर देने वाली मान्यतायें आरंग के डिघारी में है नागेश्‍वर मंदिर, होती है सांप की पूजा

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