आरंग के डिघारी में है नागेश्‍वर मंदिर, होती है सांप की पूजा

रायपुर, जिले के आरंग ब्लाक का एक ग्राम डिघारी है। यह ग्राम छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक नगरी आरंग से जहां 14वें किलोमीटर की दूरी पर है, वहीं भगवान श्रीराम की माता कौशिल्या की जन्मभूमि ग्राम चंद्रखुरी (लोक मान्यता के अनुसार) से भी लगभग 14 किमी की दूरी पर स्थित है। ग्राम डिघारी भी एक बेमिसाल लोक मान्यता के कारण प्रसिद्ध है। इस गांव में सांपों और इंसानों के बीच दोस्ती के जबर्दस्त रिश्ते की कहानी है। यहां कहानी गांव के हर बच्चे, जवान और बुजुर्गों की जुबां पर है। ऐसी मान्यता है कि इस गांव में न तो कोई सर्प किसी इंसान का काटता है और न ही कोई इंसान किसी सर्प को मारता है।
यह किवदंती सदियों पुरानी है। सर्प और इंसान के इस रिश्ते को बनाए रखने ग्रामवासी नागपंचमी के दिन विशेष पूजा करते हैं। यह पूजा ग्राम में ही 2008 में निर्मित नाग मंदिर में हर साल नाग पंचमी के दिन होती है। यहां ग्रामीण सामूहिक रूप से पूजा अर्चना करते हैं। प्रचलित एक किवदंती के अनुसार सदियों पहले ग्राम के एक ब्राह्मण परिवार के पोहकल नामक व्यक्ति को एक रात्रि स्वप्न में एक सर्प ने दर्शन देकर मुंह में कांटा चुभने और इसकी वजह से दर्द से व्याकुल होने की बात कहकर कांटा निकालने का आग्रह किया।
नींद टूटने पर उन्होंने तुलसीचौरा पर दर्द से व्याकुल एक नाग को बैठे पाया। डर की वजह से पहले तो वह पास जाने से हिचकता रहा पर अंतत: अनहोनी का भय त्याग सर्प के मुंह में हाथ डाल कांटा को निकाल फेंका। किवदंती के अनुसार तब नागराज ने डिघारी के सीमा रेखा के भीतर द्वारा किसी को भी न डसने का वरदान या। बताया जाता है कि इस घटना के बाद ग्रामीणों ने सांपों को मारना छोड़ दिया। इस ग्राम में सांपों की पूजा होने लगी।
इसके बाद वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है। ग्राम के वरिष्ठ नागरिक सेवानिवृत प्रधानपाठक रामावतार दुबे इस किवदंती की पुष्टि करते हुए बताते हैं कि उनके 76 साल के जीवनकाल में सर्प और ग्रामीण ने कभी एक दूसरे को नुकसान नहीं पहुंचाया। पूर्व सरपंच गीतांजलि नंदकुमार साहू भी बताते हैं वर्षों से कभी सांप से किसी गांव वाले को नुकसान नहीं पहुंचा। सरपंच श्रीमती सुकवंतीन रोहित वर्मा ने बताया कि यहां नागपंचमी पर पूरे गांव वाले अपना कार्य बंद रखकर मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। इधर, निकटस्थ टेकारी ग्राम एवं संघर्ष समिति के संयोजक भूपेन्द्र शर्मा ने भी ग्राम डिघारी में व ग्रामीणों द्वारा निभाए जा रहे इस अजूबे रिश्ते के बारे में कहा कि कई हिंसक प्राणियों और इंसानों के बीच पनपे विश्वास से दिखने वाले रिश्तों की तरह इस गांव में सांपों और इंसानों के बीच दोस्ती है।
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