उत्तर बस्तर कांकेर में आधुनिक पद्धति से खेती कर मंगलराम बना आत्मनिर्भर

जिले के किसान परम्परागत खेती को छोड़कर आधुनिक पद्धति से खेती कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। विकासखण्ड भानुप्रतापपुर (Block Bhanupratappur) के ग्राम कराठी (Village karthi) के कृषक मंगलराम खरीफ में धान एवं रबी में धनिया फसल की परम्परागत विधि से खेती करता था। इससे पहले वैज्ञानिक विधि से खेती करने की सही जानकारी नहीं होने के कारण 25 प्रतिशत से अधिक फसल, भूमि जनित होने वाली रोग, कीट बीमारियों से चौपट हो जाती थी जिससे कृषक को भारी नुकसान उठाना पड़ता था। उन्होंने बताया कि फसल लागत की तुलना में कम उत्पादन प्राप्त होता था, इससे उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय थी।
कृषक मंगलराम ने बताया कि गत वर्ष कृषि विभाग से किसान समृद्धि योजनांतर्गत (Kisan Samruddhi Yojana) नलकूप खनन करवाया, जिसमें उसे विभाग की ओर से 43 हजार रूपये का अनुदान प्राप्त हुआ। सूक्ष्म सिंचाई योजनांतर्गत 70 प्रतिशत अनुदान पर स्प्रिंकलर पाईप लिया जिससे अधिकतम सिंचाई का प्रयोग किया जा सके। एक्सटेंशन रिफार्म्स आत्मा योजनांतर्गत जैविक धनिया उत्पादन में भाग लेकर धनिया बीज, बीजोपचार एवं जैविक खाद निःशुल्क प्राप्त किया। कृषक को बीज एवं अन्य सामग्री में होने वाली खर्च से बचत हुई और उत्पादन में वृद्धि होने से दोगुना लाभ प्राप्त हुआ।
कृषक मंगलराम ने क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क किया और विभिन्न प्रकार की उन्नत तकनीकी उत्पादन विधि एवं महत्वपूर्ण योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त किया। साथ ही एक्सटेंशन रिफार्म्स आत्मा योजनांतर्गत प्रशिक्षण, शैक्षणिक भ्रमण एवं खेत पाठशाला कार्यक्रमों में भाग लेने से तकनीकी ज्ञान में काफी वृद्धि हुई। कृषक ने बताया कि आत्मा योजनांतर्गत जैविक धनिया (Jaivik Dhaniya) उत्पादन में भाग लेकर नियमानुसार आधुनिक पद्धति अपना कतार बोनी विधि से 1 एकड़ में धनिया फसल लगाई। कृषक मंगलराम ने बुवाई से पहले फफूंदनाशक से बीजोपचार कर बीजों की बोआई की। जिससे फसलों को भूमि जनित होने वाली रोगों ‘पाउडरी मिल्ड्यू’ जो धनिया के लिए घातक रोग से बचाव के साथ-साथ अच्छा अंकुरण भी हुआ। जैविक खाद, जैविक कीट नियंत्रण विधि एवं समुचित सिंचाई का उपयोग कर तथा समय-समय पर कृषि विस्तार अधिकारियों के द्वारा दिए गए सुझाव अनुसार कार्य किया, जिससे फसलों का बेहतर उत्पादन प्राप्त हुआ। कृषक मंगलराम को आधुनिक पद्धति से खेती करने से लगभग 1 लाख 42 हजार रूपये की आय प्राप्त हो रही है। कृषक ने बताया कि अच्छा उत्पादन से स्वयं के उपयोग के साथ-साथ बाजार में बेचकर उचित दर प्राप्त होने से मेरी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। कृषक ने बताया कि वर्तमान में भी आधुनिक पद्धति को अपनाकर अधिकतम उत्पादन प्राप्त कर रहा हूॅं तथा कृषि विभाग से सतत सम्पर्क कर नई-नई जानकारी प्राप्त कर रहा हॅू। इस सफलता को देखकर अन्य कृषक भी प्रेरणा ले रहे है। 

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