मुख्यमंत्री पद के पेंच में फंसा महाराष्ट्र में सरकार का गठन

भाजपा-शिवसेना में सरकार बनाने को लेकर पेंच फंसा हुआ है. हालांकि भाजपा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को फिर से विधायक दल का नेता चुन लिया. शिवसेना के विधायकों की बैठक भी हुई लेकिन दोनों दलों के बीच तकरार भी चल रहा है और मुख्यमंत्री पद को लेकर रार भी है. सरकार गठन को लेकर दो दिन पहले दोनों दलों के नेताओं ने राज्यपाल से अलग-अलग भेंट भी की. फिलहाल दोनों दलों के बीच सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर मामला अब तक सुलझा नहीं है. सुलझाने की कोशिश जरूर हो रही है लेकिन मामला सुलझता दिख नहीं रहा है. भाजपा और शिवसेना के बीच महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर तनातनी जारी है. शिवसेना नेता संजय राउत ने देवेंद्र फडणवीस के बयान का जवाब उसी अंदाज में दिया है.

राउत ने कहा कि मुझे नहीं पता कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने क्या कहा. अगर वे कह रहे हैं कि 50-50 फॉर्मूले पर कभी चर्चा नहीं हुई तो मुझे लगता है कि हमें सच्चाई की परिभाषा बदलने की जरूरत है. इस मामले में मुख्यमंत्री के साथ क्या चर्चा हुई थी, इस बारे में सब जानते हैं. मीडिया भी वहां थी. संजय ने कहा कि मुख्यमंत्री ने खुद 50-50 फॉर्मूले की बात कही थी. उद्धव ठाकरे ने भी इस बारे में चर्चा की थी. यह अमित शाह के सामने हुआ था. अगर अब वे कह रहे हैं कि ऐसी कोई बात नहीं हुई तो मैं प्रणाम करता हूं ऐसी बातों को. वह उन बातों से इनकार कर रहे हैं जिन्हें उन्होंने कैमरा के सामने बोला था. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि सरकार तो भाजपा की ही अगुवाई में बनेगी और 50-50 का वादा कभी नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य में पांच साल मुख्यमंत्री मैं ही रहूंगा, इसमें कोई भ्रम नहीं है.

वैसे सरकार बनाने में पेंच फंसने पर भी भाजपा बैकफुट पर आने को तैयार नहीं है. सभी निर्दलीय विधायकों को अपने साथ खड़ा कर भाजपा शिवसेना पर दबाव बनाने में जुटी है. ठाकरे घराने से किसी सदस्य के तौर पर पहली बार चुनाव लड़कर आदित्य ठाकरे के जीतने के बाद मुख्यमंत्री पद पर शिवसेना की निगाह गड़ी है लेकिन भाजपा ने साफ कर दिया है कि यह पद उसे नहीं मिलने वाला. भाजपा का कहना है कि उसे पंद्रह निर्दलीयों का भी समर्थन मिला है. छोटे दलों के कुछ और भी विधायक संपर्क में हैं. इस प्रकार वह 2014 की तरह ही संख्याबल के आधार पर मजबूत स्थिति में है. कुल मिलाकर भाजपा, शिवसेना को संदेश देने की कोशिश में है कि वह इस चुनाव में किसी तरह से कमजोर नहीं हुई है.

भाजपा की महाराष्ट्र इकाई की प्रवक्ता श्वेता शालिनी ने कहा कि भाजपा के साथ निर्दलीय विधायक खड़े हैं. ये निर्दलीय भाजपा के ही नेता रहे हैं, जो गठबंधन की वजहों से टिकट न मिलने के कारण निर्दलीय लड़कर जीते हैं, 2014 की तरह ही पार्टी के पास अब भी 122 विधायकों का समर्थन है. मीरा भायंदर सीट से भाजपा का टिकट न मिलने पर निर्दलीय लड़कर जीतीं गीता जैन, बरसी सीट से राजेंद्र राउत, अमरावती जिले की बडनेरा सीट से जीतने वाले रवि राणा ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की है. भाजपा का कहना है कि इन तीनों की तरह दूसरे निर्दलीय विधायकों ने खुद भाजपा से संपर्क कर समर्थन देने की बात कही है, क्योंकि उनका नाता भाजपा से ही रहा है. शिवसेना के मुख्यमंत्री पद को लेकर अड़ जाने के सवाल पर भाजपा प्रवक्ता श्वेता शालिनी ने कहा कि मुख्यमंत्री भाजपा का था, है और आगे भी रहेगा. मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा का रुख साफ है. शिवसेना भी इसे जानती है.

राजग को बहुमत मिलने के बाद भी सरकार बनाने का पेंच तब फंस गया, जब 24 अक्टूबर को चुनाव नतीजे आने के दिन प्रेस कांफ्रेंस कर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने लोकसभा चुनाव के दौरान तय हुए 50-50 फॉर्मूले की बात उठा दी थी. उन्होंने संकेत दिया था कि शिवसेना ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद चाहती है. चुनाव से पहले शिवसेना के मुखपत्र सामना में छपे उद्धव ठाकरे ने अपने इंटरव्यू में भी कहा था कि वह शिवसैनिक को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं. बहरहाल इस मुद्दे पर दोनों दलों की तरफ से दबाव बनाने की कोशिश चल रही है. कांग्रेस और एनसीपी सियासी घटनाक्रम पर नजदीकी नजर रखे हुए है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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