यूरोपीय यूनियन के सदस्यों के श्रीनगर दौरे पर विपक्ष का वार

जम्मू-कश्मीर में यूरोपीय यूनियन के सदस्यों के दौरे पर सवाल उठ रहे हैं. सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है. लेकिन सरकार ने यूरोपीय यूनियन के सदस्यों के लिए दरवाजे खोल कर इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा तो बना ही डाला है. देश के सांसदों को श्रीनगर सा वापस करने वाली सरकार विदेशी सियासतदानों के लिए पलक-पांवड़े बिछा कर उन्हें श्रीनगर ले जा रही है, यह बड़ा सवाल है. यूरोपीय यूनियन के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की. उम्मीद जताई जा रही है कि यह दल मंगलवार को जम्मू-कश्मीर का दौरा कर सकता है. इनके दौरे पर सबकी नज़र है. यूरोपीय संघ के सांसदों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद को संरक्षण और राज्य नीति के तौर पर इसका इस्तेमाल करने वालों पर कड़ी कार्रवाई ज़रूरी है.

कांग्रेस ने इसे लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा कि किसी भी बाहरी मुल्क को कश्मीर में दखलंदाज़ी करने का हक नहीं. अगर प्रधानमंत्री विदेशी देशों के डेलीगेशन को मेहमान बनाकर कश्मीर का दौरा और सैर करवा सकते हैं तो अपने ही देश के विपक्षी दल के नेताओं के साथ सौतेला व्यवहार क्यों कर रहे हैं. विपक्षी दल को कश्मीर जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता है और विदेशियों के लिए लाल कालीन बिछाकर प्रधानमंत्री उन्हें कश्मीर लेकर जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि विपक्षी दल को डेलीगेशन के जाने पर कोई आपत्ति नहीं है. अगर ईयू डेलीगेशन कश्मीर जा सकते हैं तो हम क्यों नहीं जा सकते.

हालांकि अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर बंदी की वजह से कश्मीर को बड़ा नुक़सान झेलना पड़ा है. पिछले तीन महीनों में कश्मीर को व्यापार में दस हज़ार करोड़ का घाटा हुआ है. कश्मीर चेंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष शेख़ आशिक़ का कहना है कि अब भी घाटी में हालात सामान्य नहीं हैं, ऐसे में नुक़सान का आकलन बहुत मुश्किल है. अब भी लोग खुलकर व्यापार नहीं कर पा रहे हैं, जिसकी वजह से सभी क्षेत्रों को नुक़सान पहुंचा है और चालू व्यापार को दस हज़ार करोड़ से ज़्यादा का घाटा झेलना पड़ा है. कश्मीर चेंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का कहना है कि इंटरनेट व्यापार की मूलभूत ज़रूरत है, जिसके अभाव से अर्थव्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है. 

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इस मुद्दें को लेकर ट्वीट किया है. महबूबा मुफ्ती का ट्विटर अकाउंट फिलहाल उनकी बेटी हैंडल कर रही हैं. महबूबा मुफ्ती फिलहाल सरकार की हिरासत में हैं. जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के साथ ही वहां के राजनेताओं को नजरबंद कर दिया गया था. महबूबा मुफ़्ती ने ट्वीट किया कि उम्मीद करें कि उन्हें लोगों से, स्थानीय मीडिया से, डॉक्टरों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों से बात करने का भी मौक़ा मिलेगा. कश्मीर और बाक़ी दुनिया के बीच लोहे का जो परदा पड़ा है उसे उठाने की ज़रूरत है और जम्मू-कश्मीर को संकट में धकेलने के लिए भारत सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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