सरकारी संचार कंपनियों का विलय और आशंकाओं का मंडराता बादल

सरकारी संचार कंपनियों के विलय का फैसला कर केंद्र सरकार ने उन आशंकाओं को बल दिया है कि सरकार बीएसएनएल और एमटीएनएल को कमजोर कर उसे बेचने की तैयारी कर रही है. हालांकि बीएसएनएल की वित्तीय स्थिति बेहद खराब है और इसे देखते हुए कहा जा रहा था कि सरकार इसे बंद करने पर विचार कर रही है. सियासी गलियारे में इस बात की चर्चा थी कि दरअसल सरकार ऐसा कर निजी संचार कंपनी जियो को मदद पहुंचाना चाह रही है. दोनों संचार कंपनियों के विलय को इसी नजरिए से देखा जा रहा है. हालांकि सरकार ने बीएसएनएल को पटरी पर लाने के लिए वित्तीय अनुदान देने का फैसला किया है, लेकिन विलय की बात लोगों के गले के नीचे नहीं उतर रहा है.

केंद्र सरकार के विलय के एलान के बाद विपक्षी दलों ने इस फैसले की आलोचना की है और सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की इन दोनों दूरसंचार कंपनियों को क्रोनी कैपिटलिस्ट (सांठगांठ वाले पूंजीपतियों) को सस्ते दाम पर बेचने की तैयारी है. राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि पहला कदम: विलय. दूसरा कदम: कुप्रबंधन. तीसरा कदम: भारी घाटा दिखाना. चौथा कदम: सांठगांठ वाले पूंजीपतियों को सस्ते दाम पर बेच देना. बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल के लिए 68,751 करोड़ रुपए के पुनरुद्धार पैकेज को मंजूरी दी. 

इसके साथ ही एमटीएनएल का बीएसएनएल में विलय, कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) और 4-जी स्पेक्ट्रम आवंटन शामिल है. विलय प्रक्रिया पूरी होने तक एमटीएनएल प्रमुख दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल की अनुषंगी के रूप में काम करेगी. पुनरुद्धार पैकेज में दोनों कंपनियों की तत्काल पूंजी जरूरतों को पूरा करने के लिए 15,000 करोड़ रुपए के सरकारी बांड, 4 जी स्पेक्ट्रम के लिए 20,140 करोड़ रुपए, कर्मचारियों की वीआरएस के लिए 29,937 करोड़ रुपए और जीएसटी के तौर पर 3,674 करोड़ रुपए की राशि दिया जाना शामिल है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया. दूरसंचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने पैकेज से जुड़ी जानकारियां साझा की. उन्होंने बताया कि बीएसएनएल और एमटीएनएल के विलय को मंजूरी दे दी गई है. विलय प्रक्रिया पूरी होने तक एमटीएनएल प्रमुख दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल की अनुषंगी के रूप में काम करेगी. पुनरुद्धार पैकेज में दोनों कंपनियों की तत्काल पूंजी जरूरतों को पूरा करने के लिए 15,000 करोड़ रुपए के सरकारी बांड, 4 जी स्पेक्ट्रम के लिए 20,140 करोड़ रुपए , कर्मचारियों की वीआरएस के लिए 29,937 करोड़ रुपए और जीएसटी के तौर पर 3,674 करोड़ रुपए की राशि दिया जाना शामिल है. कर्मचारियों की सेवानिवृति के तौर पर दी जाने वाली रकम में कंपनी के 50 फीसद कर्मचारी शामिल हो सकते हैं.

दूरसंचार कंपनी को दिए जाने वाले स्पेक्ट्रम आवंटन पर माल व सेवाकर के रूप में दी जाने वाली 3,674 करोड़ रुपए की राशि भी पैकेज में शामिल की गई है. प्रसाद ने बताया कि इस मामले में सरकार का रुख साफ है. ये भारत की सामरिक संपत्तियां हैं. सेना के पूरे नेटवर्क का रखरखाव बीएसएनएल करता है. उन्होंने कहा कि वीआरएस पैकेज के तहत पात्र कर्मचारियों को 60 साल की आयु तक कंपनी की सेवा करके अर्जित होने वाली आय का 125 फीसद मिलेगा. इस फैसले के साथ हमने इन सार्वजनिक कंपनियों के लाखों कर्मचारियों के हित का ध्यान रखा है. बीएसएनएल में करीब 1.68 लाख कर्मचारी हैं जबकि एमटीएनएल के करीब 22,000 कर्मचारी हैं. 

प्रसाद के मुताबिक वीआरएस पूरी तरह से स्वैच्छिक है. कोई भी इसे अपनाने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है. दोनों कंपनियों पर कुल 40,000 करोड़ रुपए का कर्ज है, जिसमें से आधा कर्ज एमटीएनएल का है, जो सिर्फ दिल्ली और मुंबई में परिचालन करती है. दोनों कंपनियां बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए लंबे समय से स्पेक्ट्रम की मांग कर रही थीं ताकि 4 जी सेवा शुरू की जा सके. दूरसंचार सचिव अंशु प्रकाश ने कहा कि दोनों कंपनियों को एक महीने के अंदर प्रशासनिक स्तर पर स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया जाएगा. सरकार तीन साल की अवधि में बीएसएनएल और एमटीएनएल की 37,500 करोड़ रुपए की संपत्ति का मौद्रीकरण करते हुए उसकी बिक्री करेगी या फिर पट्टे पर देगी. उन्होंने कहा कि परिसंपत्ति में मुख्य रूप से जमीन शामिल हैं. अकेले दिल्ली में एमटीएनएल के पास करीब 29 खुदरा आउटलेट (केंद्र) हैं. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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