यूपी उपचुनाव के नतीजों से भाजपा में मायूसी, योगी आदित्यनाथ कठघरे में

तीन महीने में ऐसा क्या हुआ जो यूपी में माहौल बदल गया. यह सही है कि भाजपा ने ग्यारह सीटों पर हुए उपचुनाव में उसने सात सीटें जीतीं लेकिन यह नतीजे उसके लिए चौंकाने वाला रहा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज को लेकर सवाल उठने लगे हैं. कानून-व्यवस्था चौपट है और नौजवान व किसान मायूस हैं. नतीजे इसकी अक्कासी भी करते हैं कि भाजपा के लिए सब कुछ ठीक नहीं है. लोकसभा चुनाव में जीत से उत्साहित थी भाजपा. नेता बमबम थे और कार्यकर्ता ऐंठ-अकड़ रहे थे. लेकिन ग्यारह विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजों ने भाजपा को आईना तो दिखा ही दिया है. भाजपा भले ही सात सीटें जीतने में कामयाब हुई हो, लेकिन उसे हर सीट पर विपक्ष से कड़ा संघर्ष करना पड़ा.

रामपूर सीट पर मिली हार से वह सकते में है. समाजवादी पार्टी क कद्दवर नेता आजम खान को हराने के लिए योगी आदित्यनाथ ने हर तरह के जतन किए. पिछले तीन-चार महीनों में योगी आदित्यनाथ और उनकी पुलिस ने आजम खान पर बकरी व भैंस चोरी से लेकर किताबों तक की चोरी तक का मुकदमा दर्ज किया लेकिन आजम खान को चुनाव में योगी आदित्यनाथ हरा नहीं पाए. आजम खान ने अपनी सांसद पत्नी को टिकट दिला कर सरकार के सारे विरोध के बावजूद जिता कर अपनी बादशाहात तो बरकरार रखी है. हालांकि योगी आदित्यनाथ रामपूर में न सिर्फ प्रचार किया बल्कि व्यक्तिगत तौर पर भी दिलचस्पी ली थी लेकिन आजम खान की सत्ता को वे चुनौती तक नहीं दे पाए. वैसे रामपुर में हार के बावजूद पार्टी के वोट बढ़े हैं.

इतना ही नहीं उपचुनाव में मजबूत किलेबंदी के बावजूद भाजपा को अपनी जैदपुर सीट गंवानी पड़ी. इसके अलावा भाजपा का वोट फीसद भी 2017 के मुकाबले बहुत घट गया है. भाजपा का लगभग हर सीट पर मतदान फीसद घटना भी चिंता का सबब हो सकता है. सिर्फ लखनऊ कैंट और बलहा ऐसी दो सीटें हैं, जहां पार्टी ने 2017 का प्रदर्शन बरकरार रखा है. सहारनपुर की गंगोह विस सीट पर इस उपचुनाव में कुल 60.30 फीसद मतदान हुआ. यहां जीत के बावजूद भाजपा का वोट लगभग आठ फीसद घटा. इस सीट पर हुए कुल 60.30 फीसद मतदान में भाजपा को महज 30.41 फीसद ही वोट मिले, 2017 के आम चुनाव में गंगोह सीट पर कुल 71.92 फीसद वोट पड़े थे और भाजपा ने 38.78 फीसद वोट के साथ जीत हासिल की थी. राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा है कि विपक्ष जब बिखरा हुआ है तब भाजपा की यह हालत है, विपक्ष एकजुट होता तब तो नतीजे ही कुछ और होते.

भाजपा संगठन ने 22 जून से ही सभी सीटों पर सरकार के एक मंत्री और संगठन के एक प्रदेश पदाधिकारी को जिम्मेदारी देकर जीत के लिए अभियान शुरू कर दिया था. मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने सभी सीटों पर चुनावी अधिसूचना जारी होने से पहले और बाद में एक-एक बार जरूर दौरा किया था. इसके बावजूद पार्टी को जैदपुर सीट गंवानी पड़ी. विपक्ष की ओर से अखिलेश यादव एक सीट पर प्रचार करने गए थे और उनकी पार्टी को तीन सीटों पर जीत हासिल हुई. हर सीट पर उनका वोट फीसद भी बढ़ा है. भाजपा को घोसी सीट पर काफी संघर्ष करना पड़ा और पार्टी उम्मीदवार 1734 वोट से किसी तरह जीत हासिल कर पाए. इस सीट पर 2017 में फागू चौहान ने 7000 से अधिक वोटों से जीत दर्ज की थी.

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता बताया कि भाजपा भले ही सात सीटें जीकर उत्साहित हो रही है, पर जमीनी हकीकत यह है कि उसे विपक्ष से लगभग हर सीट पर शिकस्त ही मिली है. लगभग दस फीसद वोट घटना बड़ी बात है. जिस प्रकार से ग्यारह सीटों पर सपा दूसरे नंबर पर है, यह भाजपा के लिए अच्छा संकेत नहीं है. एक बात तो यह भी है कि विपक्ष के विखराव के बावजूद हमें 11 सीटों पर सफलता नहीं मिली. यह आत्मचिंतन का विषय है. संगठन और सरकार की पूरी फौज उतरने के बाद भी हमारे वोट फीसद में कमी हुई और एक सीट गंवानी पड़ी है तो पार्टी को अपनी रणनीति पर सोचना पड़ेगा. अधिकारी योजनाओं को सिर्फ कागाजों में रखे हुए हैं. जमीन पर अभी भी कुछ पहुंचा नहीं है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनाव सबके लिए आत्ममंथन का विषय हैं. भाजपा का वोट फीसद घटा है, योगी सरकार की नीतियां या तो जमीन तक नहीं पहुंच पा रही हैं, या जमीन पर पहुंच गई हैं तो कार्यकर्ता इसका प्रचार ठीक से नहीं कर पा रहे हैं. जिन सीटों पर वोट फीसद घटा है, वहां रणनीति फेल क्यों हुई. कार्यकर्ता नाराज क्यों हैं. इन विषयों पर आत्ममंथन की जरूरत है. हालांकि इस बार भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं को ही टिकट दिया था. फिर भी नतीजा उनके अनुकूल नहीं आए. इसे पता करने की जरूत है. संगठन की खामी को ढूढ़ना होगा. मिशन 2022 में कार्यकर्ताओं और योजनाओं को जमीन पर जांच कर ही उतरना पड़ेगा. इस चुनाव में बड़ा नुकसान बसपा और मायावती को हुआ. कांग्रेस को अपने प्रदर्शन से संतोष हो सकता है क्योंकि कई क्षेत्रों में उसने बसपा को पीछ छोड़ा दिया. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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