चुनावी नतीजों से मायावती नाराज, महाराष्ट्र के अध्यक्ष को पद से हटाया

बहुजन समाज पार्टी और उसकी मुखिया मायावती गुस्से में हैं तो इसकी वजह भी है. हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव में बसपा का प्रदर्शन तो खराब रहा ही, उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में भी मायावती का प्रदर्शन बेहद खराब रहा. उसने अपनी सीटें गंवाईं. समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन बहुत बेहतर रहा और कांग्रेस भी अच्छा करता हुआ दिखी. यूपी उपचुनाव में मायावती की बहुजन समाज पार्टी को एक भी सीट पर जीत नसीब नहीं हुईं. महाराष्ट्र व हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी बसपा की झोली खाली ही रही. मायावती ने नतीजों के बाद जम कर अपनी नाराजगी जग-जाहिर की. मायावती ने ट्वीट पर अपनी भड़ास निकाली और महाराष्ट्र में उन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को बाहर का रास्ता दिखा दिया. महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष सुरेश साखरे पर पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से उन्हें बसपा से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है.

चुनावी नतीजे आने के बाद बसपा के महाराष्ट्र के प्रभारी अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि साखरे ने पूरे राज्य में चुनाव प्रचार करने के बजाय पार्टी नेतृत्व की इच्छा के खिलाफ खुद नागपुर उत्तर सीट से चुनाव लड़ा और बुरी तरह से हारे. इससे चुनाव में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा. अशोक सिद्धार्थ ने साखरे पर बसपा के जनाधार वाली सीटों पर भी अन्य दलों से सांठगांठ कर कमजोर नेताओं को उम्मीदवार बनाने का आरोप लगाया, जिस कारण बसपा सभी सीट हार गई.

सिद्धार्थ ने कहा कि पार्टी की केंद्रीय इकाई के निर्देश पर साखरे को प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निष्ठापूर्वक निभाने में नाकाम रहने और विरोधी दलों से मिलीभगत के आरोप में बसपा से निष्कासित किया गया. मायावती को भी समझ में आरहा है कि उनका जनाधार खिसक रहा है और यूपी में उनकी जगह कांग्रेस ले रही है. यह बात बसपा के लिए खतरे की घंटी है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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