प्रणब मुखर्जी ने भाजपा के नेहरू विरोधी रवैये की आलोचना की

प्रणब मुखर्जी बहुत कम बोलते हैं. लेकिन बोलते हैं तो फिर किसी तरह का दावपेंच नहीं होता. बिना लागलपेट के साफ-साफ और खरी-खरी बोलते हैं. संघ मुख्यालय जाने पर भी वे चुप रहे थे और इसी तरह के दूसरे सवालों पर भी उन्होंने खुद को विवादों से दूर रखा. हाल के कुछ महीनों में देश की वर्तमान स्थिति के लिए केंद्र की एनडीए सरकार पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर ही आरोप लगाते रहते हैं. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस तरह के बयानों की कड़ी आलोचना की है. प्रणब मुखर्जी का कहना है कि आधुनिक भारत की नींव उन संस्थापकों ने रखी थी, जिनका योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था में मज़बूत भरोसा था, जैसा आजकल नहीं है, जब योजना आयोग को खत्म कर दिया गया है.

दिल्ली में आयोजित एक समारोह में उनके भाषण के सियासी मतलब निकाले जा रहे हैं. पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि जो लोग 55 साल के कांग्रेस शासन की आलोचना करते हैं, वे यह बात नज़रअंदाज़ कर देते हैं कि आज़ादी के वक्त भारत कहां था, और हम कितना आगे आ चुके हैं. यह सही है कि दूसरे लोगों ने भी योगदान दिया, लेकिन आधुनिक भारत की नींव हमारे उन संस्थापकों ने रखी थी, जिन्हें योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था में मज़बूती से भरोसा था. लेकिन आज ऐसा नहीं है, जब योजना आयोग को ही खत्म कर दिया गया है.

प्रणब मुखर्जी के मुताबिक जो 50-55 साल के कांग्रेस शासन की आलोचना करते हैं, वे यह भूल जाते हैं कि हमने कहां से शुरू किया था, और कहां जाकर छोड़ा था. अगर भारत की अर्थव्यवस्था को 50 खरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाना है, तो हमने 18 खरब डॉलर की मज़बूत नींव छोड़ी थी, जो लगभग शून्य से शुरू हुई थी. उन्होंने कहा कि भारत को भविष्य में 50 खरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बना पाने की नींव पिछली सरकारों ने रखी थी, जिनमें जवाहरलाल नेहरू, डॉ मनमोहन सिंह और पीवी नरसिम्हा राव की सरकारें भी शामिल थीं. पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि वित्तमंत्री ने बजट पेश करते हुए कहा था कि वर्ष 2024 तक भारत की अर्थव्यवस्था 50 खरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगी. लेकिन यह दर्जा आसमान से उतरकर नहीं आएगा. इसके लिए मज़बूत नींव मौजूद है, और उस नींव को अंग्रेज़ों ने नहीं, आज़ादी के बाद हम भारतीयों ने ही बनाया था.

डॉ प्रणब मुखर्जी ने एक तरह से अपने भाषण पर केंद्र सरकार पर हमला किया. उनका कहना था कि भारत ने तेज़ी से तरक्की की, क्योंकि जवाहरलाल नेहरू और दूसरे लोगों ने आईआईटी, इसरो, आईआईएम बैंकिंग नेटवर्क वगैरह की स्थापना की. इसे मनमोहन सिंह और नरसिम्हा राव के अर्थव्यवस्था का उदारीकरण करने से भी मदद मिली, जिससे भारत की आर्थिक संभावनाएं बेहद बढ़ गईं. प्रणब मुखर्जी का मानना है कि उसी बुनियाद पर केंद्र सरकार यह दावा कर सकती है कि भारत 50 खरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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