प्रचार के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल करने वाले नीतीश कुमार का केजरीवाल पर तंज

बिहार के मुख्यमंत्री दिल्ली में संभावनाएं तलाश रहे हैं. बिहार और उत्तरप्रदेश के लोगों की तादाद अच्छी खासी है और चुनाव में उनकीअब निर्णायक भूमिका होती है. इसलिए जदयू उन्हें साधने में जुट गई है. दिल्ली विधानसभा का चुनाव अगले साल की शुरुआत में होगा. जदयू दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहती है इसलिए वह वोटरों को रिझाने के लिए हर तिकड़म में जुटा है. नीतीश कुमार दिल्ली आए. अपने कार्यकर्ताओं को उन्होंने संबोधित किया. जदयू के सम्मेलन में उन्होंने हिस्सा लिया. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खबरों में बने रहने काफन जानते हैं. बिहार में तो मीडिया को उन्होंने साध ही रखा है. सत्ता संभालने के बाद पहला काम उन्होंने मीडिया पर अघोषित सेंसरशिप लगाने से किया. खास कर प्रिंट मीडिया को उन्होंने अपने निशाने पर लिया. विज्ञापन का लालीपॉप दिखाया और जो चाहा वह लिखवाया.

नीतीश कुमार तब सुपर संपादक बन गए थे. अखबारों में क्या छपेगा और कितना छपेगा, यह नीतीश कुमार तय करते थे. उनके शुरुआती कार्यकाल से लेकर पटना के अखबारों को देखने पर पता चलता है कि नीतीश कुमार किस तरह अपना प्रचार-प्रसार करते और करवाते हैं. विपक्ष की खबरें पहले पेज पर कम ही छप पातीं हैं. यह स्थिति आज भी है. पटना के अखबारों को नीतीश कुमार का निर्देश है कि पहले पेज पर उनकी तस्वीर तो छपे ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कम उनकी खबर को तवज्जो नहीं दी जानी चाहिए. प्लेसिंग से लेकर हेडिंग तक में उनका दखल होता है. अब वही नीतीश कुमार दिल्ली में आकर आप सरकार और उसके मुखिया पर तंज कस रहे हैं कि वे प्रचार-प्रसार में यकीन नहीं रखते. उन्होंने

अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री रघुबर दास पर भी तंज कसा. रघुवर दास भी खबरों के आगे भी भागते हैं और पीछे भी. लेकिन नीतीश कुमार उनसे कहां कम हैं. हालांकि नीतीश कुमार ने दिल्ली में अपने बचाव में कहा है कि वे काम करने में और लोगों की सेवा करने में विश्वास करते हैं और जो काम नहीं करते वे केवल प्रचार-प्रसार से सुर्ख़ियों में बने रहते हैं. नीतीश कुमार ने दावा किया कि विज्ञापनों पर सबसे कम पैसे बिहार सरकार ही खर्च करती है.

नीतीश कुमार दिल्ली में अपने पार्टी के कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि कुछ लोग ख़ूब विज्ञापन देते हैं लेकिन आप देख लीजिए मेरा विज्ञापन बहुत कम मिलेगा. जहां ज़रूरत होती है उतना ही सरकार की उपलब्धि के लिए बिहार सरकार विज्ञापन देती है. लेकिन कुछ लोग केवल विज्ञापन के माध्यम से छाये रहते हैं. मेरा मानना है कि आप सरकारी ख़ज़ाने के ट्रस्टी हैं मालिक नहीं. सरकारी पैसा मत ख़र्च करो अनाप-शनाप तरीक़े से अपने प्रचार पर, यह कहकर नीतीश ने कहा कि गांधी जी ने भी लोगों की सेवा करने को बात कही थी. लेकिन पटना से लेकर जिला मुख्यालयों तक में नीतीश कुमार के होर्डिंग-बैनर लगे मिलेंगे. सिखों के प्रकाशोत्सव से लेकर मुसलमानों के दीन बचाओ सम्मेलन के जरिए नीतीश कुमार ने सरकार खजाने से अपना जिस तरह प्रचार किया वह किसी से छुपा नहीं है. लेकिन अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने में क्या हर्ज है. नीतीश कुमार ने अपनी पीठ खुद ही थपथपाई.

दरअसल नीतीश मीडिया में विज्ञापन ख़ासकर झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जिस प्रकार से सरकारी विज्ञापनों के माध्यम से चैनलों पर ख़बर से लेकर विज्ञापनों तक में छाए रहते हैं, उससे नाराज हुए हैं. नीतीश ने यह भी कहा कि अपने मंत्रिमंडल में भाजपा के सहयोगियों को भी यह बात साफ़ कर दी है कि पैसे देकर ख़बर दिखाए जाने के वे ख़िलाफ़ हैं और वही पैसा वे लोगों के ऊपर ख़र्च करना चाहेंगे ना कि अपने प्रचार प्रसार पर. भाजपाके मंत्रियों का कहना था कि जैसे झारखंड सरकार क्षेत्रीय चैनलों पर विज्ञापन देती है वैसे ही बिहार सरकार को भी चैनलों से डील करना चाहिए.

दिल्ली की सभा की ख़ास बात यह रही कि नीतीश कुमार ने एलान किया कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव लड़ेगी. उन्होंने हालांकि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग का समर्थन किया. वैसे उन्होंने अरविंद केजरीवाल का नाम नहीं लिया लेकिन माना जा रहा है कि पूर्ण राज्य का दर्जा जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के मैनिफेस्टो में पहले से रहा है और नीतीश कुमार अभी भी अपनी मांगों पर अडिग हैं. उनके विरोधियों का कहना है कि यही वही नीतीश कुमार हैं जिन्‍होंने सत्ता में बने रहने के लिए जब जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा ख़त्म किया गया तो सांकेतिक विरोध दिखाकर मौन धारण कर लिया था. नीतीश ने यह भी कहा कि उन्होंने पंद्रह साल में बिहार को जन्नत जैसा बना डाला है.

दरअसल उनकी इस बात पर विपक्ष खूब मजे ले रहा है. सोशल मीडिया पर भी गालिब के शेर का उल्लेख करते हुए कहा गया कि हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन, दिल को खुश करने को गालिब यह ख्याल अच्छा है. पटना में बारिश से हुआ जल जमाव अभी भी कई इलाकों में है, लेकिन नीतीश कुमार बिहार को जन्नत का बनाने का दावा कर रहे हैं जबकि उनके शासन में ही सृजन घोटाला, मोबाइल घोटाला सहित चालीस घोटाले हुए लेकिन विज्ञाप्नों का लालीपॉप देकर खबरें रोकी गईं और रुकवाई गईं. मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड में स्थानीय चैनलों ने अगर खबरें नहीं दिखाई होतीं तो अखबारों ने तो उस जघन्य अपराध पर भी मौन साध लिया होता. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बदतर हैं और नीतीश कुमार दिल्ली में दावा कर रहे हैं कि बिहार को जन्नत बना डाला. नीतीश के इस बयान ने जन्नत की तस्वीर ही बदल डाली है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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