यूपी उपचुनावः नतीजों ने मायावती को दिखाया आईना, सपा को हुआ फायदा

यूपी में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का साथ मिल कर चुनाव लड़ने के फैसले ने उम्मीदों के नए दरवाजे खोले थे लेकिन नतीजों ने इस महागठबंधन को खारिज कर दिया था. नतीजों के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया था और कहा था कि यादवों का वोट उन्हें नहीं मिला और फिर उन्होंने गठबंधन तोड़ने का एलान कर डाला था. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जीत-हार के लिए बसपा पर ठीकरा नहीं फोड़ा. यूपी के ग्यारह सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने मायावती के दावों की कलई उतार दी है. सपा और बसपा ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था और नतीजों ने साफ कर दिया कि बसपा अपना आधार खो रही है. नतीजों में भले कांग्रेस ने एक भी सीट नहीं जीती लेकिन उसका वोट फीसद बढ़ा और यह बात बसपा को परेशान कर सकती है. उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव में सबसे बड़ा लाभ सपा को हुआ, जिसने एक-एक सीट भाजपा और बसपा से छीनी जबकि रामपुर सीट पर कब्जा बरकरार रखा.

ग्यारह विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में सत्ताधारी भाजपा ने सात और उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने एक सीट जीती. सपा ने जैदपुर सीट भाजपा से छीनी तो जलालपुर सीट बसपा से छीनकर अपने खाते में डाली. रामपुर सीट पर पार्टी का कब्जा बरकरार रहा. भाजपा ने बलहा, गंगोह, मानिकपुर, घोसी, इगलास, लखनऊ कैंट और गोविंदनगर सीटों पर जीत हासिल की जबकि अपना दल (एस) ने प्रतापगढ सीट जीती. राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा है कि उपचुनाव में मोदी फैक्टर ने काम नहीं किया. इस वजह से ही भाजपा को अपनी सीट गंवानी पड़ी और उसका वोट फीसद भी घटा. हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जमकर प्रचार किया था और भाजपा सभी ग्यारह सीटों पर जीत का दावा कर रही थी. 

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में सपा उम्मीदवारों की जीत पर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि यह लोकतंत्र बचाने के लिए मिला जनादेश है. यह भाजपा की गलत व जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जनता की नाराजगी है. भाजपा और खास कर योगी आदित्यनाथ के लिए सबसे बड़ा झटका रामपूर सीट रहा. आजम खान के खिलाफ सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. बकरी-भैंस से लेकर किताबों तक की चोरी का मुकदमा उनके खिलाफ दर्ज हुआ लेकिन आजम खान ने अपनी सीट बचा कर योगी आदित्यनाथ को बता दिया कि रामपूर उनका है और उनका ही रहेगा. रामपुर सीट पर सपा सांसद आजम खां की पत्नी और सपा उम्मीदवार तंजीन फातिमा ने भाजपा के भारत भूषण को 7700 से अधिक वोट से हरा दिया. 

इगलास सीट पर भाजपा के राजकुमार सहयोगी ने बसपा के अभय कुमार को लगभग 26 हजार मतों से पराजित किया. गोविंदनगर में भाजपा के सुरेंद्र मैथानी ने कांग्रेस की करिश्मा ठाकुर को 21 हजार से अधिक मतों से हराया. सबसे पहला नतीजी जैदपुर का आया था. इस सीट पर सपा के गौरव कुमार ने भाजपा के अंबरीश को 4165 मतों से हराया. यह सीट सपा ने भाजपा से छीनी है. बलहा (सुरक्षित) सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार है. यहां भाजपा की सरोज सोनकर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सपा की किरण भारती को 46 हजार 487 मतों से हराया. घोसी विधानसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा ने जीत हासिल किया और इस सीट पर कब्जा बरकरार रखा. 

नतीजों के मुताबिक भाजपा के विजय कुमार राजभर ने सपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुधाकर सिंह को 1773 मतों से हराया. जलालपुर विधानसभा सीट सपा ने बसपा से छीन ली है. सपा उम्मीदवार सुभाष राय ने बसपा की छाया वर्मा को 790 मतों के नजदीकी अंतर से हराया, 2017 के विधानसभा चुनाव में यह सीट बसपा ने जीती थी. अपना दल उम्मीदवार राजकुमार पाल प्रतापगढ़ विधानसभा सीट पर चुनाव जीत गए. पाल ने सपा के बृजेश वर्मा को 29 हजार 714 मतों से हराया. भाजपा की सहयोगी अपना दल ने अपनी यह सीट बरकरार रखी है. भाजपा ने लखनऊ कैंट सीट बरकरार रखी है. 

पार्टी उम्मीदवार सुरेश चंद्र तिवारी ने इस सीट पर सपा के मेजर आशीष चतुर्वेदी को पराजित किया. तिवारी को 56 हजार 684 वोट मिले जबकि सपा के चतुर्वेदी को 21 हजार 261 मत हासिल हुए. कांग्रेस के दिलप्रीत सिंह को 19 हजार 445 और बसपा के अरुण द्विवेदी को 10 हजार 709 मत मिले. लखनऊ कैंट सीट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी चुनाव जीती थीं. रीता के इलाहाबाद से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद लखनऊ कैंट सीट खाली हुई थी. कांग्रेस गंगोह में पहले बढत बनाए हुए थी लेकिन अंतिम दौर की मतगणना में भाजपा आगे हो गई. 

गंगोह सीट पर भाजपा उम्मीदवार ने पीछे रहने के बाद जोरदार वापसी करते हुए अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार को हराया. यहां भाजपा उम्मीदवार को 68 हजार 237 जबकि नौमान मसूद को 62 हजार 875 वोट मिले. सपा के चौधरी इन्द्रसेन को 57 हजार 352 व बसपा के चौधरी इरशाद को 32 हजार 269 वोट हासिल हुए. कांग्रेस ने लगातार बढ़त बनाए रहे अपने उम्मीदवार के ऐन मौके पर हारने का विरोध किया है. पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने चुनाव आयोग से मामले की निष्पक्षता से जांच कराने की मांग की है. प्रियंका ने कहा कि भाजपा इतने अहंकार में है कि गंगोह से हमारे जीतते हुए उम्मीदवार को मतगणना स्थल से निकालकर उसके मंत्री ने जनता का निर्णय बदलवा दिया. जिलाधिकारी को पांच-पांच बार फोन करके गड़बड़ी कराई गई. यह लोकतंत्र का सरासर अपमान है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस इसके खिलाफ सख्ती से लड़ेगी. निर्वाचन आयोग से मांग है कि वह इस मामले की निष्पक्षता से जांच कराए. 

उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज करने वाले सभी उम्मीदवारों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बधाई दी. योगी ने कहा कि इस जीत को सभी चुने गए जनप्रतिनिधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्र सबका साथ, सबका विकास के माध्यम से सबका विश्वास में बदलेंगे. मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि जीते हुए सभी उम्मीदवार जन आकांक्षाओं को पूरा करने में अपना पूर्ण योगदान देंगे व प्रदेश की प्रगति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे. लेकिन नतीजों ने भाजपा की परेशानी तो बढ़ाई ही है. कांग्रेस लगातार अपनी जमीन तलाश करने में जुटी है. प्रियंका गांधी यूपी में लगातार सक्रिय हैं और इसका फायदा होता दिख रहा है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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