सरकार बनाने के लिए गोपाल कांडा से समर्थन लेने में भाजपा को गुरेज नहीं

सियासत का खेल निराला है और सत्ता पाने की ललक दलों को क्या से क्या करा देता है. कुछ साल पहले जिस गोपाल कांडा की गिरफ्तारी को लेकर भाजपा सड़को पर प्रदर्शन कर रही थी, अब उसी गोपाल कांडा के सहारे वह हरियाणा में सत्ता में लौटने के जुगाड़ में जुट गई है. यह भी दिलचस्प है कि जिस हरियाणा से भाजपा ने बेटी बचाओ का नारा लगाया, उसी हरियाणा में भाजपा को सरकार बनाने के लिए गोपाल कांडा का सहारा लेना पड़ रहा है जो कभी गीतिका शर्मा की आत्महत्या के मामले में देश में चर्चित हुआ था. गीतिका शर्मा की मां की मौत के लिए भी गोपाल कांडा को ही जिम्मेदार माना गया था. लेकिन यह किसी और दौर की बात है. अब सत्ता में आना है तो गोपाल कांडा का सारा इतिहास भाजपा भूलने को तैयार है.

हरियाणा के मतदाताओं ने भाजपा को सबसे बड़ा दल बनाने के बावजूद त्रिशंकु विधानसभा का जनादेश दिया. चुनावी नतीजों के रुझानों के साथ इस बात की सुगबुगाहट शुरू हो गई थी कि अब दुष्यंत चौटाल तय करेंगे कि राज्य में किसकी सरकार बनेगी. लेकिन फिर सियासी समीकरण बदले और शाम होते-होते यह बात साफ हो गई कि भाजपा सरकार बनाने के लिए पहल करेगी. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भाजपा अब जेजेपी के समर्थन के बैगर सरकार बना लेगी.

छह निर्दलीय विधायकों ने भाजपा को समर्थन देने का मन बना लिया है. इनमें सिरसा से गोपाल कांडा, रानिया विधानसभा सीट से रणजीत चौटाला, बादशाहपुर से राकेश दौलताबाद, पृथला विधानसभा सीट से नयनपाल रावत, दादरी से सोमबीर सांगवान और महम से बलराज कुंडू का नाम शामिल है. ऐसा कहा जा रहा है कि दो विधायकों को भाजपा सांसद सुनीता दुग्गल दिल्ली ले आईं. निर्दलीय विधायक गोपाल कांडा और रणजीत सिंह को सिरसा की सांसद सुनीता दुग्गल एक चार्टर्ड विमान से दिल्ली ले आईं.

इन छह में से तीन विधायक बलराज कुंडू, नयनपाल रावत, सोमबीर सांगवान पूर्व में भाजपा के ही सदस्य थे. लेकिन विधानसभा चुनावों से पहले टिकट न मिलने पर भाजपा छोड़ दी थी. हरियाणा की सभी 90 सीटों के नजीते आ चुके हैं. यहां 40 सीटें जीतकर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी है. कांग्रेस को 31 सीटें मिली हैं. दुष्यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी ने दस, निर्दलीय सात, इंडियन नेशनल लोकदल और हरियाणा लोकहित पार्टी को एक-एक सीटें मिलीं हैं. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सरकार बनाने का संकेत दे चुके हैं और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राज्यपाल से मिलने का समय भी मांगा है. भाजपा को सरकार बनाने के लिए छह और विधायकों की जरूरत पड़ेगी.

दूसरी तरफ भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा के सभी जीते हुए उम्मीदवारों से अपील की है कि राज्य में गैर भाजपा सरकार बनाने के लिए एक साथ आएं. चौटाला खानदान में आपसी कलह के बाद इनेलो में दो फाड़ होने के चलते दुष्यंत ने जेजेपी का गठन किया था. राज्य विधानसभा चुनाव में जेजेपी की झोली में दस सीटें आई हैं जबकि सात पर निर्दलीयों की किस्मत खुली है. कुशल राजनीतिज्ञ की तरह दुष्यंत ने अभी इस बात को लेकर अपने पत्ते नहीं खोलें हैं कि वे राज्य सरकार बनाने के लिए भाजपा को समर्थन देंगे या कांग्रेस को. बहरहाल अभी कई तरह के खेल चलेंगे. खेल परदे के पीछे होंगे. लेकिन गोपाल कांडा की मदद से सरकार बनाने की पहल पर भाजपा पर महिला और बेटी विरोधी होने का दाग भी लगेगा. लेकिन सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने में उससे मदद मिलती है तो दाग अच्छे हैं. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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