अबूझमाड़ में घूमता विकास का पहिया

-शशिरत्न पाराशर 

Naxal Area Abujhmad
देश-दुनिया के लिए पहले अबूझ माने जाने वाले विकासखण्ड ओरछा (अबूझमाड़) इलाके में निवासरत आदिवासी ग्रामीण आधुनिकता की दौड़ से कोसो दूर थे। भौगोलिक परिस्थितियों से विषम इस क्षेत्र में सुविधाओं का अभाव होने के कारण अबूझमाडि़या देश-दुनिया में होने वाली गतिविधियों से भी अनजान बने रहते थे, लेकिन अब अबूझमाड़ को बूझने के लिए नई पहल शुरू की गई है। माड़ में अब विकास का पहिया घूम रहा है। चौतरफा विकास की अंगड़ाई से माडि़या लोगों के चेहरे पर मुस्कान आने लगी है। इसमें नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ सहित दूरस्थ अंचल के इलाकों में मिनी थिएटर कम डेवलपमेंट सेन्टर का निर्माण होने लगा है। वहीं स्थानीय आम जनता के लिए आधुनिक व्यायाम शाला (जिम) खोलने का सिलसिला शुरू हो गया है। अबूझमाडि़यों को लिए स्थानीय युवा ने सरकारी कर्ज लेकर फोटो स्टूडियों के साथ फोटोकापी सेंटर भी खोला है, जहां ग्रामीण अपनी तस्वीर खिचवानें आने लगे है।

विकास ही नक्सल हिंसा से निपटने के लिए कारगर कदम है। जिले के दूरस्थ अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और समय पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाकर लोगों का दिल जीतने का प्रयास किया गया है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सड़क-पुल-पुलिया निर्माण अन्य जगह से यहां ज्यादा कठिन है। जिला मुख्यालय से ओरछा (अबूझमाड) विकासखंड मुख्यालय तक सड़क निर्माण कार्य में कई बाधाएं एवं विपदा आयी, लेकिन इसके बावजूद सड़क निर्माण कार्य अन्तिम दौर में है। अब यहां की जनता को पक्की सड़कों की बारहमासी यातायात की सुविधाएं मिलने लगी है। विकास की मुख्यधारा सहज-सुगम, सुरक्षित और बेहतरीन रास्तों से ही दूर-दूर तक और जन-जन तक पहुंच सकती है और पहंुच भी रही है।

धुर नक्सल प्रभावित एवं चारों ओर से घने जंगलों, नदी-नालों और पहाड़ों से घिरे नारायणपुर जिले के विकासखण्ड ओरछा मुख्यालय में धीरे-धीरे सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया हो रही हैं, जो नगरीय क्षेत्र में होती है। नक्सल प्रभावित ओरछा मुख्यालय में कुमारी किरता ने पहली दवाई की दुकान खोलकर लोगों के लिए जीवनदायिनी बनी, तो वहीं स्थानीय युवाओं ने मिलकर ओरछा मार्ट नाम से आधुनिक दुकान खोली। मार्ट खोलकर युवाओं ने साप्ताहिक हॉट-बाजार का इंतजार भी खत्म कर दिया है। अब यहां हर समय वह सभी जरूरी चीजें मिलती है, जो एक घरेलू महिला या नौकरी पेशा आदमी को चाहिए होती है। वही सुदूर अंचल सोनपुर के युवक ने आईटीआई की पढ़ाई बीच में छोडकर सरकारी क़जऱ् लेकर जनरल स्टोर की दुकान खोली है, जिसमें सभी दैनिक उपयोग की सामग्रियां मिलती है। इन सभी दुकानों के खुल जाने से सामान खरीदने के लिए 70 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय नारायणपुर की और हाट-बाजार के दिन को टकटकी लगाकर देखने का समय विलुप्त हो रहा है। अंचलवासियों के असुविधा और दिक्कतों को समझा और प्रशासन ने भी उसकी मदद की।

इस इलाकें में पहले आवाजाही के सीमित साधन थे, लेकिन अब सड़क, पुल-पुलिया के साथ अन्य निर्माण काम तेजी के साथ हो रहा है। आवाजाही पहले से बेहतर हुई है। मुख्यालय नारायणपुर और ओरछा के बीच दिन में लगभग 4-5 बसें रोज चलती है। लोग विकास की मुख्यधारा से जुड़ने लगे है। इसके साथ ही पैसे के लेनेदेन के लिए ग्रामीण बैंक भी है। जहां कर्मचारी पूरी मुस्तैदी के साथ काम कर रहे है। यहां अब बेहतर नेट कनेक्टिविटी के लिए दूरसंचार ने टॉवर खडे़ किए है। पहले से काफी बेहतर नेट कनेक्टिविटी हो गयी है। बैंक के साथ अन्य सरकारी काम ऑनलाइन हो रहे है। दूर-दराज वाले इलाके में घर-घर तक बिजली की सुविधा मुहैया कराना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन इस दिशा में किए गए कामों की जनता ने सराहना की है, जहां पारंपरिक विद्युत लाईन नहीं पहंुचाई जा सकी वहां सौर ऊर्जा चलित संयत्र स्थापित कर बिजली मुहैया कराई गई है।

ओरछा में बच्चे-बच्चियों को गुणवत्तापूर्ण अच्छी शिक्षा के लिए छात्रावास-आश्रम के साथ ही हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल संचालित है, जिसमें पर्याप्त संख्या में शिक्षकगण पदस्थ हैं। वहीं नक्सली हिंसा पीडि़त बच्चों के लिए पोटाकेबिन आवासीय विद्यालय संचालित है, जिसमें लगभग 650 बच्चे वहां रहकर अपनी पढ़ाई करते हैं। वहीं बच्चियों के लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय सुचारू रूप से चल रही है। इसके साथ ही अंग्रेजी मीडियम में शिक्षा के लिए मुख्यमंत्री डी.ए.व्ही. पब्लिक स्कूल में भी बेहतर पढ़ाई-लिखाई हो रही है। यह हायर सेकेण्डरी तक स्कूल संचालित है। इस स्कूल में बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा दी जा रही है। माडि़या जनजाति के बच्चे भी हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी में बातचीत करने लगे है। वहीं उनके अभिभावकों के रहन-सहन और खान-पान में परिवर्तन की झलक देखने को मिल रही है। बच्चे पढ़ाई के साथ खेल गतिविधियों में भी अबूझमाड़ का नाम रोशन कर रहे है।

पोटाकेबिन के बालक-बालकाओं ने मलखम खेल में देश की राजधानी सहित विभिन्न प्रदेशों में राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर अगले ओलम्पियाड में 6 बच्चों के शुभारंभ पर प्रदर्शन के लिए चयन की बात सामने आयी है। इसी प्रकार अंडर 14 और अंडर 17 फुटबॉल में भी दो बच्चों का चयन हुआ है। जिले में विकासखंड स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक खेल प्रतियोगिता का आयोजन होने लगा है। माह जनवरी में माड़ महोत्सव के अवसर पर रन फॉर पीस अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया था। जिसमें देश के साथ ही विदेशी लोगों ने इस दौड़ में हिस्सा लिया। केन्या से आये श्री मोजेस ने प्रथम स्थान हासिल किया था। माड़ के प्रवेश द्वार मुख्यालय नारायणपुर में भी खेल गतिविधियों के लिए इंडोर स्टेडियम, ऑडिटोरियम आदि का निर्माण किया गया है। इन दोनों में खेल से संबंधित जरूरी आधुनिकता की सभी चीजें उपलब्ध है। माड़ में जनता के स्वास्थ्य के लिए भी पहले से बेहतर काम हुआ है। क्षेत्र के अन्दरूनी इलाकों में मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, नर्स आदि को स्वास्थ्य का बेहतर प्रशिक्षण देकर जरूरी उपचार की दवाई दी जा रही है। गंभीर मरीजों को बाईक एम्बुलेंस से नजदीक अस्पताल लाकर उनका बेहतर इलाज किया जा रहा है।

ओरछा में नवीन तहसील कार्यालय के साथ-साथ अधिकारियों-कर्मचारियों को सरकारी आवास का निर्माण भी तेज गति से हो रहा है। वहीं 12 कमरों का ट्रांजिट हॉस्टल का काम भी लगभग पूरा हो गया है। प्रकृति को करीब से जानने और समझने वालों के लिए उनके रूकने के लिए आधुनिक सुख-सुविधाओं और स्थानीय कला से साज-सज्जित और फर्नीचर से परिपूर्ण नवीन रेस्ट हाउस बनकर तैयार हो गया है, जो ओरछा मुख्यालय में थाने के सामने स्थिति छोटी पहाड़ी पर बना है। यहां से सुबह और शाम के समय घने जंगल, खूबसूरत नजारे और पहाडि़यांे को निहारने का मजा ही अलग है।

ओरछा विकासखण्ड के ग्राम बासिंग में पहला मिनी थिएटर कम डेवलेपमेंटर सेंटर खोला गया, वहीं अब ओरछा मुख्यालय में इसके लिए जमीन चिन्हांकित कर ली गई है। इस थिएटर के खुल जाने से अबूझमाडि़यों को देश-दुनिया में होने वाले गतिविधियों से अवगत कर आधुनिकता की दौड़ में शामिल कर मुख्यधारा मंे लाने का प्रयास किया जा रहा है। इस थिएटर कम डेवलेपमेंटर सेंटर में ग्रामीणों को मनोरंजन के साथ ही ताजा खबरों और गतिविधियों की जानकारी मिलती रहेगी। जो एक नगरीय क्षेत्र के लोगों को आसानी से उपलब्ध होती है, लेकिन अब सुदूर अंचल में भी यह सुविधा उपलब्ध होने लगी है। इसमें आसपास गांव के ग्रामीण शिक्षाप्रद सिनेमा के साथ ही देश-विदेश और जिले में चल रही विकास गतिवधियों के बारे में टेलीविजन के माध्यम से जान सकेंगे। इसमें प्रोजेक्टर के माध्यम से बड़ी स्क्रीन पर टेलीविजन दिखाने की सुविधा उपलब्ध है। 

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