महाराष्ट्र में सरकार बनाने की कवायद तेज, राज्यपाल ने अब एनसीपी को दिया न्योता

महाराष्ट्र में सियासी समीकरण भी बदल रहे हैं और इनके बीच ही सरकार गठन की कवायद जारी है. हालांकि अभी भी तसवीर साफ नहीं हुई है लेकिन मुंबई से लेकर दिल्ली तक गहमागहमी है. बैठकों का दौर चल रहा है और मिलने-मिलाने का भी. फोन पर भी बातचीत हो रही है. रणनीति बन रही है, बनाई जा रही है. दिन की बड़ी घटना रही शिवसेना का एनडीए से अलग होना. नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल पार्टी के इकलौते सांसद अरविंद सावंत ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया तो लगा कि सब कुछ पटरी पर आ गया है और शिवसेना सरकार बना ही लेगी.

शिवसेना के नेताओं ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की. उन्हें हालात की जानकारी दी और सरकार बनाने के लिए तीन दिनों का और समय मांगा जिसे राज्यपाल ने नहीं स्वीकारा. इसके बाद राज्यपाल ने तीसरी बड़ी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को सरकार बनाने का न्योता दिया है और उसे चौबीस घंटे का समय दिया है. आमंत्रण मिलने के बाद एनसीपी के नेता राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की. एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि राज्यपाल का आज पत्र मिला है, हम अपने गठबंधन के साथी कांग्रेस से चर्चा कर अंतिम फैसला लेंगे. उन्होंने कहा कि हम कोशिश करेंगे कि राज्य में स्थिर सरकार बनाने के लिए उचित कदम उठाएंगे. वैसे माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने की कवायद अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है. एनसीपी ने शिवसेवा को समर्थन देने का रूख साफ कर दिया था. कांग्रेस की हामी का इंतजार था.

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच फोन पर लंबी बातचीत भी हुई. दिल्ली में सोनिया गांधी के घर पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हुई. देर तक चली बैठक में सरकार गठन को लेकर चर्चा की गई. लेकिन फिलहाल कांग्रेस ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. बैठक में महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी से जीते विधायक भी आए थे. माना जा रहा है कि कांग्रेस शरद पवार को समर्थन देने के लिए तैयार है. बस कुछ कागजी कार्रवाई होनी बाकी है. 

इससे पहले मोदी सरकार में शिवसेना के एकमात्र मंत्री अरविंद सावंत ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया. इसी के साथ भाजपा-शिवसेना की तीस साल पुरानी दोस्ती टूट गई. शरद पवार ने कहा है कि शिवसेना के साथ सरकार बनाने का फैसला कांग्रेस से विचार करने के बाद किया जाएगा. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि पार्टी की बैठक में आलाकमान जो निर्देश देगा उसके हिसाब से फैसला लिया जाएगा.

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव मे भाजपा को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं. भाजपा और शिवसेना ने मिलकर बहुमत का 145 का आंकड़ा पार कर लिया था. लेकिन शिवसेना ने 50-50 फॉर्मूले की मांग रख दी जिसके मुताबिक ढाई-ढाई साल सरकार चलाने का मॉडल था. शिवसेना का कहना है कि भाजपा के साथ समझौता इसी फॉर्मूले पर हुआ था लेकिन भाजपा का दावा है कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ. इसी लेकर मतभेद इतना बढ़ा कि दोनों पार्टियों की तीस साल पुरानी दोस्ती टूट गई.

सावंत ने भाजपा पर सत्ता में हिस्सेदारी के तय फार्मूले से मुकरने का आरोप लगाया और कहा कि हमने विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़ा था. इसमें कुछ बातों पर सहमति बनी थी. उन्होंने कहा कि इसमें मुख्यमंत्री पद सहित सीटों के 50-50 के अनुपात में बंटवारे का फार्मूला तय हुआ था लेकिन भाजपा अब इससे इनकार कर रही है. शिवसेना नेता ने कहा कि वे इस झूठ से आहत हैं और अब उनके बीच कोई विश्वास नहीं बचा.

उन्होंने कहा कि चूंकि अब कोई विश्वास नहीं बचा है, इसलिए मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया है. मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया है. यह पूछे जाने पर कि क्या शिवसेना एनडीए से अलग हो गई है तो सावंत ने कहा कि जब मैंने इस्तीफा दे दिया है तो आप समझ सकते हैं कि इसका क्या अर्थ है. भाजपा महाराष्ट्र में सियासी घटनाक्रम से सकते में है. शिवसेना के रुख से आलाकमान की पेशानी पर बल तो है लेकिन इस चक्रव्यूह को भेद पाने में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह भी अपने को बेबस पा रहे हैं. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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