दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण में आया कुछ सुधार

दिल्ली-एनसीआर में हवा चलने से प्रदूषण के स्तर में कुछ कमी आई है। वायु प्रदूषण का स्तर अति गंभीर से गंभीर की श्रेणी में आ गया है। राजधानी की जहरीली हवा में थोडा सुधार हुआ है। रविवार और सोमवार के मुकाबले मंगलवार को दिल्ली एनसीआर की हवा थोडी साफ सुथरी रही लेकिन अब भी ये लोगों के सांस लेने लायक नहीं है ।

मंगलवार को राजधानी दिल्ली के आनंद विहार इलाके में मंगलवार दोपहर तीन बजे वायु गुणवत्ता 366  अंकों पर बहुत ख़राब स्तर पर कायम रही। वहीं, दिल्ली के द्वारका उप-नगर में 324 अंकों के साथ बहुत ख़राब, तो लोधी रोड पर 324 , आईटीओ इलाके में 351, ओखला में 324 अंकों के साथ बहुत ख़राब के स्तर पर कायम रहा। कुल मिलाकर देखें तो दिल्ली में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। 

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बड़े शहरों की बात करें तो ग़ाज़ियाबाद में हालात सबसे ज्यादा बुरे रहे, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 364 दर्ज किया गया जबकि सामान्य स्तर से करीब सात गुणा ज्यादा है। करीब यही हाल ग्रेटर नोएडा का रहा जहां वायु गुणवत्ता का आंकड़ा बहुत ख़राब 343 के स्तर पर रहा। वहीं, गुरुग्राम में ये आंकड़ा 288 से 367 रहा, जिसे ख़राब से बहुत ख़राब माना जाता है। हरियाणा के हिसार में भी हालात 238 अंकों के साथ ख़राब बने रहे। बिहार की राजधानी पटना में वायु गुणवत्ता 421 अंकों के साथ गंभीर हालात के बने रहे। वहीं, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 393 के साथ बहुत ख़राब तो औद्य़ोगिक नगरी कानपुर में 458 के साथ बेहद गंभीर की श्रेणी में रहे।

कुल मिलाकर दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण के हालात बेहद गंभीर से सुधरते दिखाई दे रहे हैं तो इसका कारण बहती हवाओं को बताया जा रहा है । लेकिन कानपुर, पटना जैसे शहरों में हालात जस से तस बने हुए दिखते हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री ने खुद कमान संभाली और उत्‍तर भारत के विभिन्‍न हिस्‍सों में बढ़ते प्रदूषण की स्थिति की मंगलवार को समीक्षा की। कैबिनेट सेक्रेटरी भी प्रदूषण के हालात पर रोजाना नजर रख रहे हैं,  

सरकार के साथ अदालतें भी कडा रुख अपनाए हुए हैं । मंगलवार को सबकी निगाहें थीं, दिल्ली के राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण यानी एनजीटी पर, क्योंकि यही पर कई राज्यों के बड़े अधिकारियों से प्रदूषण को लेकर सवाल-जवाब किए जाने थे। सवाल यही था कि क्या लोगों को दम घुटने के लिए छोड़ा जा सकता है, अगर नहीं तो जिम्मेवार सरकार और प्रशासन कहां है, अब तक, क्या किया गया है, ?

मंगलवार को NGT की सुनवाई के दौरान दिल्ली के मुख्य सचिव ने माना कि जो भी कदम उठाए गए हैं, वे अधूरे हैं। दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए अभी और कदम उठाने की आवश्यकता है। वहीं, दिल्ली के मुख्य सचिव ने कूड़ा जलाने के मामले पर कहा कि ऐसे मामलों में कमी आई है। और लापरवाही को लेकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। एनजीटी ने केंद्र से भी प्रदूषण रोकने के उपायों के बारे में पूछा तो सरकार की तरफ से बताया गया कि राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक हुई है। हमने इस समस्या से निपटने के लिए 1150 करोड़ रु संबंधित राज्यों को दिए हैं। 

जानकारों का भी कहना है कि इसके लिए लंबे समय की योजनाएं बनाने की जरुरत है । वायु प्रदूषण को लेकर तमाम कोशिशें तो हो रही हैं और उसे आईना भी दिखाया जा रहा हो, लेकिन अब सच ये भी है कि वैज्ञानिक आंकड़े  बताने लगे हैं कि प्रदूषण के कारण लोगों की जीवन अवधि में कमी आई है, जिसका सबसे बड़ा शिकार आने वाली पीढ़ियां हैं। 



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