महाराष्ट्र में सरकार गठन के लिए शिवसेना व राकांपा के बीच फार्मूला तय

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर अभी तसवीर साफ नहीं हुई है. रहस्य बरकरार है. हालांकि परदे के पीछे सरकार बनाने और बहुमत का आंकड़ा जुटाने के लिए खेल चल रहा है. फिलहाल सरकार गठन को लेकर दिल्ली में सारा खेल चल रहा है और जो खबरे आ रहीं हैं उसे देखते हुए लगता है कि अगले हफ्ते तक तस्वीर साफ हो जाएगी और राकांपा, शिवसेना व कांग्रेस पार्टी की साझा सरकार बन जाएगी. सियासी गलियारे में इस बात की चर्चा है कि शिवसेना और राकांपा का मुख्यमंत्री होगा. यानी ढाई साल शिवसेना का और ढाई साल राकांपा का. यह भी कहा जा रहा है कि पहले ढाई साल शिवसेना का मुख्यमंत्री होगा. कांग्रेस को स्पीकर का पद दिया जाएगा.

हालांकि इन सबको लेकर सस्पेंस अब भी बरकरार है और अटकलों के बीच ही सरकार गठन के लिए कोशिशें लगातार जारी है. दो दिन पहले केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने महाराष्ट्र में सरकार गठन का नया फॉर्मूला सुझाया था. रामदास अठावले ने कहा था कि उन्होंने भाजपा और शिवसेना में समझौते के लिए संजय राउत से बातचीत की थी. अठावले के मुताबिक मैंने उन्हें एक नया फॉर्मूला सुझाया है. जिसके तहत तीन साल मुख्यमंत्री पद भाजपा के लिए और दो साल शिवसेना के लिए हो सकता है. हालांकि तब न तो भाजपा ने इसकी पुष्टि की थी न ही शिवसेना ने तसदीक. लेकिन अब उन्हीं संजय राउत ने कहा कि आपका शुक्रिया, लेकिन हमें इसकी जरूरत नहीं है. उन्हें हमारे लिए चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. हालांकि संजय राउत ने भरोसा जताया कि शिवसेना की अगुवाई वाली सरकार जल्द ही सत्ता में आएगी. 

इससे पहले शिवसेना नेता संजय राउत ने सोमवार देर शाम राकांपा प्रमुख शरद पवार से उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की थी. शरद पवार और कांग्रेस अध्यक्ष सोनियां गांधी से मुलाकात के बाद ये दोनों नेता मिले. शरद पवार से मुलाकात के बाद संजय राउत ने कहा कि मुझे भरोसा है कि जल्द ही सरकार बन जाएगी. संजय राउत ने कहा कि सरकार बनाने की जिम्मेदारी हमारी नहीं थी. जिन लोगों की यह जिम्मेदारी थी, वे भाग गए, लेकिन मुझे विश्वास है कि जल्द ही सरकार बन जाएगी.

इससे पहले दिल्ली में शरद पवार और सोनिया गांधी की मुलाकात हुई थी. शरद पवार ने मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सोनिया गांधी के साथ राज्य के राजनीतिक हालात को लेकर बात हुई. उन्‍होंने कहा कि सोनिया गांधी के साथ मुलाकात में महाराष्‍ट्र में जारी राजनीतिक गतिरोध पर चर्चा हुई और उन्‍होंने कांग्रेस अध्‍यक्ष को राज्‍य की स्थिति से अवगत कराया. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों का ऐलान 24 अक्टूबर को ही हो गया था. जिसमें भाजपा 105 सीटें जीतकर सबसे बड़ा दल बनकर सामने आई थी, वहीं शिवसेना 54 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर काबिज हुई थी. नतीजों के बाद भाजपा और शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री पद के लिए मतभेद हो गया जो दोनों दलों के अलग होने तक जारी रहा. अब शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाने की नई गुंजाइश को देख रही है जिस पर फिलहाल बातचीत का दौर जारी है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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