विदेश मंत्री का नीदरलैंड्स के समाचार पत्र को साक्षात्कार

समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में विदेश मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में दुकानें खुली हुई है और लोग फिर से सड़क पर निकल रहे हैं। टेलीफोन लाइनें अब फिर से खुली हुई हैं, लेकिन इंटरनेट सेवा अभी तक पूरी तरह से ठीक नहीं हुआ है, क्योंकि आतंकवादियों द्वारा पहले के हिंसक समय के दौरान सोशल मीडिया का उपयोग कट्टरपंथीकरण और भीड़ जुटाने के लिए किया जा रहा था।

उन्होंने कश्मीर में विभिन्न प्रतिबंधों को सही ठहराते हुए कहा कि अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया होता, तो हिंसा की एक लम्बी श्रृंखला चलने लगती। उन्होंने कहा कि 2016 में, सरकार ने लोगों को राजनीतिक बैठकें करने की अनुमति प्रदान की और हिंसा अपने चरम पर पहुंच गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की बैठकों का अक्सर आतंकवादियों और अलगाववादियों द्वारा दुरुपयोग किया जाता है। उन्होने कहा कि कश्मीर की लड़ाई में पिछले 30 वर्षों में 40,000 लोगों की जानें गई है। विदेशमन्त्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति बिल्कुल अलग है क्योंकि यह पड़ोसी देश की आतंकवाद नीति से प्रभावित होता है।

एस जयशंकर ने यह भी कहा कि हम डिजिटलीकरण, कौशल विकास, वैश्वीकरण के आधुनिक युग में प्रवेश कर रहे हैं और इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि हिंसा के अन्य तीस वर्षों से बचने के लिए कुछ निर्णायक कदम उठाया जाए।



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