एयर इंडिया व भारत पेट्रोलियम बिकने को तैयार, बोलो खरीदोगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रैलियों में अक्सर कहते रहे हैं कि देश का दखल जिस तरह से बढ़ रहा है और सार्वजनिक उपक्रम कौड़ियों के मोल उन्हें दिया जा रहा है उससे नरेंद्र मोदी की करनी और कथनी का फर्क दिखाई देता है. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने में लगी हुई है. सरकार के फैसले पर सवाल भी उठ रहे हैं. फायदे में चल रहे सरकारी उपक्रमों को लगातार निजी हाथों को सौंपा जा रहा है. रेलवे निजी हाथों को सौंप दिया गया है. नवरत्न कंपनियों को निजी कंपनियों को सौंपा गया. बीएसएनएल और एमटीएनएल मरने की कगार पर है लेकिन सरकार निजी कंपनियों को फायदा देने में लगी है. सरकार की नीयत पर विपक्ष सवाल उठा रहा है और तुकबंदी बनाई जा रही है कि एअर इंडिया बिकाउ है, बोलों खरीदोगे.

अब राज्य के स्वामित्व वाली दो कंपनियों एयर इंडिया और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन को अगले साल मार्च तक सरकार बेचने जा रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में यह बात कही. वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश वित्तीय मंदी का सामना कर रहा है और उस पर लगभग 58 हजार करोड़ रुपए का कर्ज चढ़ा हुआ है. सीतारमण ने कहा कि हम इस उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं कि हम इस साल इसे पूरा कर सकते हैं. इससे जमीनी हकीकत सामने आएगी. इस महीने की शुरुआत में एयर इंडिया के चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने एयर इंडिया के कर्मचारियों को खुला खत लिखा था. उन्होंने कहा था कि विभाजन एयरलाइन की स्थिरता को सक्षम कर सकता है. वहीं सीतारमण ने कहा कि एयर इंडिया के लिए निवेशक रुचि दिखा रहे हैं.

बीते साल सरकार ने एयरलाइन में 76 फीसद हिस्सेदारी और प्रबंधन नियंत्रण को रद्द करने के लिए एयर इंडिया के लिए ईओआई मंगाई थी लेकिन इसे एक भी खरीदार नहीं मिला था. सरकार के पास वर्तमान में एयर इंडिया की सौ फीसद इक्विटी है. एयर इंडिया की हिस्सेदारी बिक्री को भी पिछले साल किसी ने लेने में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी, क्योंकि निवेशकों ने बाकी की चौबीस फीसद हिस्सेदारी के साथ सरकारी हस्तक्षेप की आशंका जताई थी, विमानन सलाहकार फर्म सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक एविएशन ने एक रिपोर्ट में यह बात कही. हालांकि सरकार ने कहा कि अब उस बाधा को हटा दिया गया है. 

एयर इंडिया ने पिछले वित्त वर्ष में लगभग 4600 करोड़ रुपए का ऑपरेटिंग नुकसान दर्ज किया था. तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी मुद्रा के नुकसान के कारण ऐसा हुआ. लेकिन कर्ज से लदी मालवाहक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, 2019-20 में परिचालन के लाभदायक होने की उम्मीद है.

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के मामले में, सचिवों के एक समूह ने अक्टूबर में सरकार की पूरी 53.29 फीसद हिस्सेदारी की बिक्री के लिए सहमति व्यक्त की थी. भारत पेट्रोलियम का बाजार पूंजीकरण लगभग 1.02 लाख करोड़ रुपए है. इसकी 53 फीसद हिस्सेदारी की बिक्री के साथ, सरकार किसी भी प्रवेश प्रीमियम सहित लगभग 65,000 करोड़ रुपये की निकासी की उम्मीद कर रही है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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