सरकार गठन में गतिरोध के बीच देवेंद्र फडणवीस मिले आरएसएस प्रमुख से

महाराष्ट्र में सरकार को गठन को लेकर रार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. सरकार बनाने के लिए न तो भाजपा झुकने के मूड में है और न ही शिवसेना अपने कदम पीछे खींचना चाह रही है. गठबंधन के दोनों दल अब आरपार की लड़ाई के मूड में हैं. महाराष्‍ट्र में सरकार गठन की समय सीमा खत्‍म होने में अब 72 घंटे ही बचे हैं. लेकिन सरकार बनने के आसार नहीं दिख रहे हैं. इस बीच मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की. सूत्रों ने यह जानकारी दी. माना जा रहा है कि भाजपा की दूसरी टीम शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से उनके मुंबई स्थित आवास पर मुलाकात कर सकती है.

महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे 24 अक्तूबर को आए थे. नतीजे आने के बाद से ही 50-50 फॉर्मूले को लेकर भाजपा और शिवसेना में खींचतान जारी है और इसी वजह से अभी तक राज्‍य में नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है. इससे पहले मंगलवार को ही भाजपा ने शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने पर जोर देते हुए बातचीत के लिए चौबीस घंटे दरवाजे खुले होने का दावा किया. कहा जा रहा है कि गेंद शिवसेना के पाले में है. कोर कमिटी की ढाई घंटे लंबी मीटिंग के बाद बाहर निकलकर भाजपा नेताओं ने दावा किया कि सरकार गठबंधन की बनेगी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में बनेगी.

महाराष्ट्र में सरकार गठन पर जारी गतिरोध के बीच कृषि कार्यकर्ता व हाल ही में शिवसेना में शामिल हुए किशोर तिवारी ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को भाजपा और शिवसेना के बीच चल रहे सत्ता संघर्ष को सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए. भागवत को लिखे पत्र में तिवारी ने कहा कि आरएसएस प्रमुख को इस स्थिति का गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए और महाराष्ट्र में सरकार गठन में गतिरोध दूर करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए. उन्होंने कहा कि लोग इस मुद्दे पर संघ की चुप्पी से चिंतित है. तिवारी ने भागवत को उनके लिखे पत्र के बारे में पूछे जाने पर कहा कि गडकरी दो घंटे के अंदर इस स्थिति का समाधान करने में कामयाब होंगे.

उन्होंने दावा किया कि भाजपा गडकरी को हाशिये पर डाल रही है. पार्टी या अमित शाह गडकरी को हस्तक्षेप के लिए अधिकृत करते हैं तो वे दो घंटे में गतिरोध दूर कर सकते हैं. गैर सरकारी संगठन विदर्भ जन आंदोलन समिति के संस्थापक तिवारी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले पाला बदलकर भाजपा से शिवसेना मे आ गए थे. इस गैर सरकारी संगठन ने महाराष्ट्र में खासकर विदर्भ में किसानों के बड़े पैमाने पर आत्महत्या के विषय को प्रमुखता से सामने रखा था. भाजपा और शिवसेना मुख्यमंत्री का पद साझा करने को लेकर एक दूसरे से उलझी हुई हैं.

उद्धव ठाकरे की अगुआई वाली शिवसेना ने दोनों दलों के लिए ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मांग की है जिसे भाजपा ने खारिज कर दिया है. शिवसेना के सांसद संजय राउत ने कहा है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री उनके दल का होगा. सोमवार को दिल्ली और मुंबई में कई उच्चस्तरीय बैठकें हुईं लेकिन उनसे राज्य में सरकार गठन पर नतीजों के बाद से जारी गतिरोध दूर होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं. सोमवार को राकांपा प्रमुख शरद पवार की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी हुई. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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