केंद्र व बिहार सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरा विपक्ष

सालों बाद बिहार की सड़कों पर विपक्ष एकजुट नजर आया. महागठबंधन में शामिल दलों के अलावा वाम दलों ने केंद्र व बिहार की एनडीए सरकार क खिलाफ पूरे बिहार में आक्रोश मार्च निकाला. इस आक्रोश मार्च की अगुआई यूं तो राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने की, उन्हें दूसरे दलों का साथ भी मिला और हाथ भी मिला. केंद्र और राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ पटना और बिहार के जिला मुख्यालय की सड़कों पर विपक्षी दलों के महागठबंधन ने आक्रोश मार्च निकाला. कांग्रेस, राजद, वीआईपी, हम, रालोसपा और वाम दल सभी एक साथ राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे. आक्रोश मार्च के पहले कुशवाहा ने ट्विटर पर हुंकार भरी और लिखा- सरकारी निरंकुशता अब चरम के पार ! बदलो सरकार, तभी बदलेगा बिहार.

बिहार में चुनाव अगले साल चुनाव होने वाले हैं. इसे देखते हुए इस आक्रोश मार्च को महत्त्वपूर्ण माना जा रहा था. महागठबंधन ने सड़कों पर उतर कर माहौल बनाया. सरकार के खिलाफ हल्ला बोला. विपक्ष ने बिहार में गिरती कानून व्यवस्था, खराब शिक्षा व्यवस्था के साथ केंद्र की विघटनकारी नीति को मुद्दा बनाया. हालांकि आक्रोश मार्च से पहले महागठबंधन में टूट की खबरें भी आती रहीं थी. मीडिया कभी जीतनराम मांझी तो कभी तेजस्वी यादव के बहाने महागठबंधन के टूटने का एलान कर डालता था लेकिन पटना की सड़कों पर महागठबंधन ने उतर कर तमाम अटकलों को विराम भी दे डाला.

पूर्व केंद्रीय मंत्री और रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, पूर्व मुख्यमंत्री और हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा, वीआईपी के अध्यक्ष मुकेश सहनी, वामदल के नेताओं के साथ राजद के प्रतिनिधियों ने आक्रोश मार्च निकाला. हालांकि इस आक्रोश मार्च में राजद नेता तेजस्वी यादव नहीं पहुंचे. बताया गया कि वे दिल्‍ली में थे और शाम में रांची लौटेंगे. लेकिन राजद ने अपना प्रतिनिधि भेजा जरूर भेजा. राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने बताया कि आक्रोश मार्च पटना में गांधी मैदान से जिला समाहरणालय तक गया. इसमें महागठबंधन के अलावा वामदलों के सभी बड़े नेता शामिल रहे. उन्होंने कहा कि पटना सहित हर जिला मुख्यालय में आक्रोश मार्च निकाला गया. उन्‍होंने कहा कि जनता परेशान है और उसकी अपेक्षा है कि विपक्षी दल सरकार के खिलाफ ज्वलंत मुद्दों को लेकर आंदोलन चलाएं.

पटना के अलावा गया, लखीसराय, दरभंगा, समस्‍तीपुर, सीतामढ़ी, शेखपुरा सहित दूसरे जिलों में आक्रोश मार्च में महागठबंधन के अलावा वाम दलों के नेताओं ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. सभी जिला मुख्यालयों पर महागठबंधन व वाम दलों का आक्रोश मार्च सफल रहा. सभी जिलों में विपक्ष एकजुट दिखा. आक्रोश मार्च देश व राज्यों में हो रहे भ्रष्टाचार जन विरोधी काम, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था में गिरावट, देश का आर्थिक स्थिति खराब जैसे मुद्दों पर महागठबंधन ने एकजुटता दिखाते हुए आक्रोश मार्च किया. उपेन्द्र कुशवाहा ने महागठबंधन के एकजुट होने का दावा किया था, इस आक्रोश मार्च में कम से कम यह एकजुटता तो दिखी.

बड़ी बात यह है कि पहले राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि के बहाने महागठबंधन को एक मंच पर लाने में उपेंद्र कुशवाहा सफल रहे थे अब इस आक्रोश मार्च के सूत्रधार भी वे रहे और महागठबंधन के नेताओं के साथ सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे. कहा जा सकता है कि इस मार्च के बाद उपेंद्र कुशवाहा का कद महागठबंधन में बढ़ा. मार्च के दौरान कुशवाहा ने नीतीश सरकार पर जमकर हल्ला बोला. उन्होंने मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड, चमकी बुखार के दौरान चौपट हुई स्वास्थ्य व्यवस्था, पटना में जलजमाव, बदतर शिक्षा व्यवस्था, बढ़ते अपराध पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरा और आरोप लगाया और कहा कि नीतीश सरकार को चेताया कि यह तो अभी शुरुआत है, भविष्य में भी सरकार की जनविरोधी नीति के खिलाफ हम सड़कों पर उतरेंगे. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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