मुर्गे के हत्यारे को ढूंढने में लगी है बिहार पुलिस, छूट रहे हैं पसीने

बिहार में अपराघ अपने उफान पर है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भले क्राइम पर जीरो टॉलरेंस की बात भाषणों में लगातार करते रहते हों लेकिन सच तो यह है कि अपराधी सरकार की आंखों से काजल चुरा कर ले जा रहे हैं. बिहार में अपराधियों की बहार है और लूट, हत्या व बलात्कार का खुला खेल फर्रूखाबादी चल रहा है. सरकार सिर्फ दावे कर रही है लेकिन सरकार के दावों में दम नहीं और पुलिस अपराध पर काबू पाने में नाकाम है. पुलिस करे भी क्या. नीतीश कुमार ने उन्हें अपराधी को पकड़ने की जगह शराब और शराब बेचने व पीने वालों की धर-पकड़ के लिए लगा रखा है. ज्यादा समय पुलिस इसी में परेशान रहती है. उसके लिए ठीक भी है क्योंकि शराब से उसकी आमदनी में बहुत इजाफ हुआ है. इसलिए बिहार पुलिस भी क्या क्या करे, आए दिन हत्या, चोरी, लूटपाट से जूझती पुलिस अपराधियों को पकड़ने का दावा भले करती हो. लेकिन अपराध बेलगाम है इन दिनों.

अब बिहार में पुलिस एक मुर्गे की हत्या की गुत्थी सुलझाने में जुटी हुई है. मुर्गे की हत्या का मामला पुलिस के जी का जंजाल बन गया है. कैमूर जिले के दुर्गावती थाना के तिरोजपुर की पुलिस इस केस को लेकर खुद हैरान है. पुलिस फिलहाल मुर्गे के हत्यारे को ढूंढने में लगी है. कैमूर जिले के दुर्गावती थाना क्षेत्र के तिरोजपुर गांव की निवासी कमला देवी ने एक मुर्गा फार्म खोल रखा है. एक दिन पड़ोसी ने दौड़ाकर एक मुर्गे को पकड़ लिया और उसे मार डाला. मुर्गा की हत्या के इस मामले को लेकर दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि मामला पुलिस तक पहुंच गया. मुर्गा फार्म चलाने वाली कमला देवी ने अपने मुर्गा की हत्या का आरोप लगाते हुए उसकी जांच करने की प्राथमिकी दर्ज करा दी. अब पुलिस कातिल की तलाश में जुटी है.

पुलिस के मुताबिक कमला देवी के पड़ोसी ने दौड़ाकर मुर्गा को पकड़ लिया और उसकी हत्या कर दी. इसके बाद विवाद शुरू हुआ तो आरोपियों ने मुर्गा फार्म चलाने वाले कमला देवी और उसके पुत्र इंदल को पीट पीटकर जख्मी कर दिया. जिसके बाद पीड़ित कमला देवी ने दुर्गावती थाने में मामला दर्ज करवा दिया. दिलचस्प मामला यह भी है कि मुर्गा का पोस्टमार्टम प्रखंड पशु अस्पताल में भी कराया गया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अब तक खुलासा नहीं हुआ है. इस बीच मुर्गे की मौत मामले में सात लोगों पर प्राथमिकी भी दर्ज करा ली गई है.

उधर डाक्टर के बयान से मामला और पेचीदा हो गया है. मुर्गे का पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक ने बताया मुर्गा के गर्दन पर ब्लड रुकने का प्रमाण मिला है. जिसकी रिपोर्ट पुलिस को सौंपी जाएगी. वहीं कैमूर एसपी दिलनवाज अहमद ने बतया कि इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई है और छानबीन जारी है. यूपी पुलिस तो चोरी की भैंसों को तलाशने में बदनाम हुई थी. बिहार पुलिस के इस अभियान को लेकर विपक्ष ने तंज भी कसा है. रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए ट्वीट किया कि अब यही बच गया था नीतीश जी.नीतीश कुमार की पुलिस मुर्गा के हत्यारे को लेकर अपनी फजीहत करवा रही है. लोग कह रहे हैं कि नीतीश कुमार से उनकी पुलिस संभल नहीं रही है. मुर्गा कथा कहां जाकर थमता है, यह देखना दिलचस्प होगा. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



Post a Comment

0 Comments