महाराष्ट्र के सियासी चौसर पर पिटी भाजपा

महाराष्ट्र में दिन भर सियासी गतिविधियां उफान पर रही. सुबह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही भाजपा की परेशानी बढ़ गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फ्लोर टेस्ट का न सिर्फ आदेश दिया बल्कि राज्यपाल की भूमिका पर भी टिप्पणी की. हालांकि महाराष्ट्र की सियासत में भविष्य की तस्वीर तो सोमवार की शाम को सामने आगई थी, जब कांग्रेस, शिवसेना और राकांपा ने 162 विधायकों की परेड होटल में कराई थी. सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोट टेस्ट का आदेश देकर भाजपा को बैकफुट पर ढकेल दिया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी हालांकि घंटों सियासी नाटक हुआ. अपने-अपने खेमे को मजबूत करने की कोशिश हुई लेकिन भाजपा सियासी चौसर पर पिट गई. राकांपा प्रमुख शरद पवार ने भाजपा को बताया कि महाराष्ट्र की सियासत में चाणक्य तो वे ही हैं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ घंटों के अंदर ही पहले उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने इस्तीफा दिया, फिर मुख्यमंत्री देवंद्र फडणवीस ने भी कुर्सी छोड़ दी. हालांकि चार दिनों के घटनाक्रम से भाजपा की जितनी भद्द पिटनी थी, वह पिट गई.

माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फ्लोर टेस्ट कराने के आदेश के बाद संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बीच बैठक हुई. दोनों नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विकल्पों पर चर्चा की. इस बात की भी चर्चा हुई कि देवेंद्र फणणवीस को शक्ति परीक्षण का सामना करना चाहिए या इस्तीफा दे देना चाहिए. सूत्रों का कहना है कि बैठक के बाद देवेंद्र फडणवीस को एक संदेश भेजा गया. इसके बाद देवेंद्र फणडवीस ने करीब साढ़े तीन बजे इस्तीफे की घोषणा कर दी और कुछ देर बाद राजभवन जाकर राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया.

इससे पहले 23 नवंबर की सुबह भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेकर पूरे देश को चौंका दिया था. साथ में अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. लेकिन रातों-रात हुए इस नाटक के बाद कांग्रेस, शिवसेना व राकांपा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे. सोमवार को इस मामले में सुनवाई हुई और फैसला सुरक्षित रख लिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बुधवार शाम पांच बजे तक सदन में देवेंद्र फडणवीस बहुमत साबित करें. साथ ही यह भी निर्देष दिया कि बहुमत साबित करने के लिए गुप्‍त मतदान नहीं होंगे और इसका लाइव प्रसारण किया जाएगा.

इस फैसले के बाद सदन में बहुमत साबित करने की तैयारी शुरू हो गई. भाजपा ने कहा कि हम सदन में बहुमत साबित कर देंगे. एनसीपी अजित पवार को लगातार मनाने की कोशिश करती रही. इसी बीच अजित पवार ने अपने पद से इस्‍तीफा देकर सबों को चौंका दिया. अजित पवार के इस्‍तीफे के बाद देवेंद्र फडणवीस की तरफ से प्रेस कॉन्‍फ्रेंस किए जाने की सूचना आई. देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन को जनता ने जनादेश दिया था लेकिन शिवसेना ने धोखा दिया. शिवसेना सरकार गठन को लेकर हमसे बातचीत करने की बजाय कांग्रेस और राकांपा के साथ बात करने लगी. शिवसेना ने सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की बात की. लेकिन चुनाव से पहले इस मुद्दे पर बात ही नहीं हुई थी. शिवसेना ने गलतबयानी से काम लिया और हमें धोखा दिया. देवेंद्र फडणवीस ने बहुमत नहीं होने की बात कहते हुए इस्तीफे का एलान किया.

महाराष्ट्र की सियासत पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई थीं. अगर पूरी प्रक्रिया की बात करें तो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद महाराष्ट्र में भाजपा के पास विकल्प सीमित थे. अजित पवार ने हाथ खड़े कर दिए थे और कहा था कि इतने कम समय में जरूरी विधायकों को साथ लेना संभव नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश में प्रोटेम स्पीकर की अध्यक्षता में विश्वास मत लेने को कहा गया जो आज तक कभी नहीं हुआ है. सुप्रीम कोर्ट के कड़े फैसले ने भाजपा का रास्ता बंद कर दिया था. अजित पवार ने भरोसा दिलाया था कि उनके पास बड़ी संख्या में विधायक हैं लेकिन ऐसा नहीं हुआ. भाजपा का सरकार बनाने का फैसला सही था, सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उसका दावा बनता था. अजित पवार के समर्थन से जरूरी संख्या जुटाने का भरोसा था. 

भाजपा को भरोसा था कि तीन पार्टियों की यह सरकार लंबी नहीं चलेगी. महाराष्ट्र में विपक्ष का पूरा स्पेस अब भाजपा का है. भाजपा के मुताबिक राज्य में जल्द ही मध्यावधि चुनाव होंगे. इसके बाद भाजपा को बहुमत से वापसी की उम्मीद है. महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन से पहले भाजपा विधायक कालिदास कोलंबकर को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है. राजभवन में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उन्हें शपथ दिलाई. शपथ लेने के बाद कालिदास कोलंबर ने कहा कि 27 नवंबर को विधानसभा का सत्र बुलाया. भाजपा ने जिस तरह सरकार बनाई उससे उसकी साख पर बट्टा लगा. लेकिन शरद पवार ने इस पूरे सियासी खेल में अपनी ताकत दिखाई. हालांकि उन्हें लेकर कई तरह के कयास लगाए गए लेकिन वे शिवसेना के साथ तो खड़े ही रहे, कांग्रेस को भी गठबंधन के लिए तैयार किया. देखना यह है कि नया सियासी गठबंधन किस राह को जाएगा. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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