महाराष्ट्र में राकांपा-शिवसेना व कांग्रेस की सरकार बनना तय, औपचारिक एलान बाकी

महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना की सरकार बननी लगभग तय है. सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गईं हैं. न्यूनतम साझा कार्यक्रम भी तय हो गया है. माना जारहा है कि औपचारिक एलान बाकी है. कांग्रेस और एनसीपी की बैठक के बाद पृथ्वीराज चव्हाण और नवाब मलिक ने बुधवार को साझा प्रेस कॉंफ्रेंस कर इसका एलान किया. करीब दो घंटे से ऊपर चली बैठक के बाद जब पृथ्वीराज चव्हाण और नवाब मलिक साझा प्रेस कॉन्फ़्रेंस के लिए आए तो लगा कि वे एक बड़ा एलान करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. एलान तो हुआ जरूर, लेकिन एलान ऐसा नहीं था जो सुर्खियां बनतीं. मीडिया को मायूसी भी हुई लेकिन एलान जो हुए उससे साफ हो गया कि बस अब औपचारिकता ही बाकी है. दनों नेताओं ने कहा कि स्थिर सरकार बनेगी, लेकिन कुछ चर्चा बाक़ी है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह सच है कि शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस की साझा सरकार बनना आसान नहीं है.

एलान के बावजूद कई सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब मिलना बाकी है. सवाल यह है कि आख़िर सरकार गठन के मुद्दे पर पेच कहां फंसा है और कांग्रेस शिवसेना को लेकर संदेह से घिरी है क्या. इनके अलावा सवाल यह भी है कि क्या तीनों दल अपने-अपने वैचारिक मतभेद भुला पाएंगे. लेकिन इन सवालों को किनारे कर सरकार गठन की तैयारी कर रहे हैं.

माना जा रहा है कि तीनों दलों के बीच साझा कार्यक्रम की बात भी हो चुकी, सरकार का फॉर्मूला भी आ चुका, लेकिन बताया जा रहा है कि शिवसेना ने कहीं अपने मुद्दे थोपने की कोशिश की तो कांग्रेस बाहर आ सकती है. एनसीपी एक मजबूत पुल बनाने की कोशिश में जुटी है. यह बात साफ़ है कि अगर सरकार बनेगी तो फ़ॉर्मूला जो भी हो, मुख्यमंत्री पद पहले शिवसेना को जाएगा. संजय राउत ने भी इस बैठक के बाद ये भरोसा जताया. 

पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस और एनसीपी के बीच चर्चा का अगला दौर पूरा हो गया. सभी मुद्दों पर हमारी बात पूरी हो चुकी है. अब मुंबई में बाकी सहयोगियों से भी बात होगी. इसके बाद हम शिवसेना से बातचीत करेंगे. इसके बाद हम यह जानकारी दे देंगे कि गठबंधन कैसा होगा. 

इससे पहले संजय राउत ने कहा था कि अगले दो-चार दिनों में सभी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. संजय राउत के मुताबिक तीन दल सरकार बनाते हैं तो प्रक्रिया लंबी होती है. यह प्रक्रिया शुरू हो गई है. आने वाले कुछ दिनों में जब प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तो महाराष्ट्र में सरकार बनाई जाएगी. संजय राउत ने कहा कि शिवसेना का मुख्यमंत्री बनना चाहिए यह महाराष्ट्र की जनता की इच्छा है. यह राज्य की भावना है कि उद्धव ठाकरे जी नेतृत्व करें. महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 105, शिवसेना के पास 56 सीटें हैं, जबकि राकांपा और कांग्रेस के पास क्रमश: 54 और 44 सीटें हैं. राज्य में सरकार बनाने को इच्छुक किसी भी दल या गठबंधन को विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए कम से कम 145 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी

इस बीच रामदास अठावले ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस को महाराष्ट्र में अगर बारी-बारी से मुख्यमंत्री पद नहीं मिलता है तो उसे सरकार गठन में शिवसेना और एनसीपी का समर्थन नहीं करना चाहिए. अठावले की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब इस तरह की खबरें हैं कि शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बीच ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद संभालने का समझौता हो सकता है और कांग्रेस को उपमुख्यमंत्री पद मिल सकता है. दूसरी तरफ महाराष्ट्र के सिल्लोड़ से शिवसेना विधायक अब्दुल सत्तार ने कहा कि कोई भी शिवसेना के विधायक को फोड़ने (तोड़ने) की कोशिश करेगा तो हम उनका सर फोड़ देंगे, उसके साथ-साथ उसका पांव भी तोड़ देंगे, लेकिन दवाखाने का भी इंतजाम शिवसेना करेगी. उनके लिए एम्बुलेंस भी तैयार रहेगी. इससे एक दिन पहले अब्दुल सत्तार ने बताया था कि सभी विधायकों को 22 नवंबर को बैठक के लिए 'मातोश्री' बुलाया गया है. हमें पांच दिनों के लिए अपना कपड़ा, आईडी कार्ड, आधार कार्ड और पैन कार्ड लेकर आने के लिए कहा गया है. मुझे लगता है कि हमें दो-तीन दिनों के लिए एक जगह पर रहना होगा, फिर अगला कदम तय किया जाएगा. उद्धव ठाकरे जी निश्चित रूप से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री होंगे. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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