फडणवीस की पहले कुर्सी गई और अब अदालत ने भेजा समन

भाजपा नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अच्छे दिन कहीं पीछे छूट गए हैं. पहले विधानसभा चुनाव में नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आए. पिछली बार जितनी सीटें आईं थीं वह कम गईं. शिवसेना से गठबंधन कर चुनाव लड़ा. बहुमत मिला भी गठबंधन को लेकिन फिर मामला फंस गया. ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री के सवला पर दोस्ती टूटी और गठबंधन की गाठें भी खुल गईं. लंबे इंतजार के बाद रातोंरात सरकार बनाई भी, मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ली. देश में पहली बार सुबह सवेरे शपथ लेने का रिकॉर्ड भी बनाया लेकिन फिर सुप्रीम कोर्ट का चाबुक चला और देवेंद्र फडणवीस के सारे कस-बल निकल गए. फ्लोर टेस्ट के आदेश के साथ ही फडणवीस ने हथियार डाल दिए और इस्तीफा दे डाला. अब नई मुसीबत गले पड़ गई है.

नागपुर पुलिस ने स्थानीय अदालत से उनके नाम जारी समन की गुरुवार को तामील की. फडणवीस पर चुनावी हलफनामे में अपने खिलाफ दो आपराधिक मुकदमों के बारे में सूचनाएं छिपाने के आरोप से जुड़ा मामला है. इसी मामले में समन की तामील हुई है. सदर थाने के एक अधिकारी ने बताया कि यहां फडणवीस के घर पर समन की तामील की गई. यह घटनाक्रम ऐसे वक्त हुआ है, जब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में कांग्रेस-राकांपा और शिवसेना गठबंधन ने सरकार बनाई है. फडणवीस नागपुर से विधायक हैं. मजिस्ट्रेट अदालत ने एक नवंबर को एक याचिका पर फिर से सुनवाई शुरू की थी, जिसमें भाजपा नेता के खिलाफ कथित तौर पर सूचनाएं छिपाने के लिए आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई थी. 

शहर के वकील सतीश उके ने अदालत में एक याचिका दायर कर फडणवीस के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी. बंबई हाई कोर्ट ने उके की याचिका खारिज करने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने पहली अक्टूबर को मजिस्ट्रेटी अदालत में उके की दायर याचिका पर सुनवाई के लिए आगे बढ़ने का निर्देश दिया था. फडणवीस के खिलाफ 1996 और 1998 में जालसाजी और धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए थे लेकिन दोनों मामले में आरोप नहीं तय किए गए थे. उके ने आरोप लगाया था कि फडणवीस ने अपने चुनावी हलफनामे में इस सूचना की जानकारी नहीं दी थी. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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