शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस नेता आज राज्यपाल से मिलेंगे

महाराष्ट्र में सियासी उठापठक के बीच आज कांग्रेस- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना के नेता राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात करेंगे। हालांकि, राकांपा प्रवक्ता नवाब मलिक ने शुक्रवार को साफ किया कि वे किसानों के मुद्दे को लेकर उनसे मुलाकात करने वाले हैं। राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने नागपुर में दोहराया कि सरकार बनाने में अभी थोड़ा और वक्त लगेगा। इस बीच, शनिवार को ‘सामना’ के लेख में भाजपा पर निशाना साधा गया। शिवसेना के मुखपत्र सामना में ‘105 चिल्लाहट… और पागलों का घोड़ाबाजार’ शीर्षक के साथ संपादकीय लिखा गया है। इसके मुताबिक, ‘‘महाराष्ट्र में नए समीकरण से कई लोगों के पेट में दर्द हो रहा है। छह महीने सरकार न टिकने के श्राप दिए जा रहे हैं। यह सब कुछ अपनी कमजोरी छिपाने के लिए किया जा रहा है।’’

नागपुर में कांग्रेस विधायक नितिन राउत के आवास पर पहुंचे पवार ने मध्यावधि चुनाव की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार बनने में भले थोड़ा विलंब हो, लेकिन प्रदेश में 5 साल के लिए स्थायी सरकार बनाई जाएगी।’’ महाराष्ट्र में सरकार गठन के मुद्दे पर राकांपा प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच दिल्ली में बैठक होनी है। सोनिया से मिलने के लिए पवार 17 या 18 नवंबर को दिल्ली जाने वाले हैं। अभी तीनों दलों के बीच सरकार गठन से पहले ड्राफ्ट किए गए कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर भी शीर्ष नेताओं की मुहर लगनी बाकी है।

सामना में शिवसेना ने लिखा

  • ‘‘महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग गया है और राष्ट्रपति शासन लगने के बाद 105 वालों का आत्मविश्वास इस प्रकार झाग बनकर निकल रहा है। मानो मुंबई किनारे के अरब सागर की लहरें उछाल मार रही हों। पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने विधायकों को बड़ी विनम्रता से कहा कि बिंदास रहो, राज्य में फिर से भाजपा की ही सरकार आ रही है।’’
  • ‘‘गुरुवार को ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि राज्य में जिसके पास 145 का आंकड़ा है उसकी सरकार आएगी और ये संवैधानिक रूप से सही है। हालांकि अब जो ऐसा कह रहे हैं कि अब भाजपा की सरकार आएगी, वे 105 वाले पहले ही राज्यपाल से मिलकर साफ कह चुके हैं कि हमारे पास बहुमत नहीं है। इसलिए सरकार बनाने में हम असमर्थ हैं, ऐसा कहने वाले राष्ट्रपति शासन लगते ही ‘अब सिर्फ हमारी सरकार है’ की बात कह रहे हैं।’’
  • ‘‘ये किस मुंह से कह रहे हैं? जो बहुमत उनके पास पहले नहीं था, वो बहुमत राष्ट्रपति शासन के सिलबट्टे से कैसे बाहर निकलेगा? यह सवाल तो है ही, लेकिन हम लोकतंत्र और नैतिकता का खून करके ‘आंकड़ा’ जोड़ सकते हैं, जैसी भाषा महाराष्ट्र की परंपरा को शोभा नहीं देती। फिर ऐसा बोलनेवाले मुंह का डिब्बा किसी भी पार्टी का हो। राष्ट्रपति शासन की आड़ में घोड़ाबाजार लगाने का मंसूबा अब साफ हो गया है।’’

न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर बनी सहमति

शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के बीच न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर सहमति बन गई है। जिन मुद्दों पर सहमति बनी है उनमें किसान कर्जमाफी, फसल बीमा योजना की समीक्षा, रोजगार और छत्रपति शिवाजी महाराज और बीआर अंबेडकर स्मारक शामिल हैं। वहीं पूरे कार्यकाल के लिए शिवसेना को मुख्यमंत्री पद मिलेगा। जबकि राकांपा और कांग्रेस को एक-एक डिप्टी सीएम पद दिया जाएगा। इसके अलावा शिवसेना को 14 मंत्री पद, राकांपा को 14 और कांग्रेस को 12 मंत्री पद मिलेंगे।

सरकार भाजपा की बनेगी

कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना जहां तीनों मिलकर सरकार बनाने की कवायद में जुटे हैं। वहीं, महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने दावा किया कि उनके पास 119 विधायक हैं। उनके बिना राज्य में स्थिर सरकार नहीं बन सकती। पाटिल ने कहा कि भाजपा ने 105 सीटें जीती हैं। निर्दलीय विधायकों के समर्थन से हमारे पास विधायकों की संख्या 119 है। राज्य में बीजेपी के बिना सरकार नहीं बन सकती।

‘25 साल तक राज करेगी शिवसेना

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में आगामी 25 सालों तक राज करेगी। मीडिया ने जब चर्चा के दौरान राउत से सीएम पद के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि सिर्फ पांच साल क्यों। हम 25 सालों तक महाराष्ट्र पर शासन करेंगे। वहीं कार्यवाहक मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस पर व्यंग्य करते हुए राउत ने कहा कि उनकी पार्टी अब यह घोषणा नहीं करेगी कि हम ही लौटेंगे, हम ही लौटेंगे, हम ही लौटेंगे।

महाराष्ट्र का मालिक समझने की मानसिकता से बाहर आएं: सामना

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल के बयान पर ‘सामना’ में लिखा गया है कि भाजपा किस मुंह से कह रही है कि राज्य में इनकी सरकार बनेगी। आगे लिखा है कि खुद को महाराष्ट्र का मालिक समझने की मानसिकता से बाहर आएं। उन्होंने कहा कि सत्ता या सीएम पद के साथ कोई जन्म नहीं होता है।


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