महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन, सरकार बनाने के लिए किसी भी राजनीतिक दल के पास पर्याप्त संख्या नहीं

महाराष्ट्र में 24 अक्टूबर को आए विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद से जारी राजनीतिक गतिरोध के चलते राज्य में सरकार का गठन नहीं हो सका और आखिरकार राज्यपाल की सिफारिश के बाद महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने दोपहर में राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश गृह मंत्रालय को भेजी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुलाई गई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में महाराष्ट्र के राजनीतिक हालात पर चर्चा हुई और प्रदेश में केंद्रीय शासन लगाने का राष्ट्रपति से अनुरोध करने का निर्णय किया गया । देर शाम राष्ट्रपति ने कैबिनेट की सिफारिश पर मुहर लगा दी। इसके साथ ही विधानसभा चुनाव नतीजों के 19 दिन बाद राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है।

राज्यपाल ने अपनी सिफारिश में कहा- ''वह संतुष्ट हैं कि सरकार को संविधान के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है, (और इसलिए) संविधान के अनुच्छेद 356 के प्रावधान के अनुसार आज एक रिपोर्ट सौंपी गई है।''
 
राष्ट्रपति शासन में राज्यपाल राज्य का शासन चलाएंगे। इस दौरान 6 महीने के लिए विधानसभा को निलंबित अवस्था में रखा गया है। हालांकि केंद्र सरकार इन 6 महीनों के दौरान कभी भी राष्ट्रपति शासन को हटा सकती है। बीजेपी ने फैसले का स्वागत किया है तो कांग्रेस, एनसपी और शिवसेना ने फैसले का विरोध किया है। शिवसेना फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गयी है।

इससे पहले शिवसेना ने सोमवार को दावा किया था कि एनसीपी और कांग्रेस ने उसे महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिये सिद्धांत रूप में समर्थन देने का वादा किया है लेकिन राज्यपाल की ओर से तय समय सीमा समाप्त होने से पहले वह समर्थन का पत्र पेश करने में विफल रही। इसके बाद राज्यपाल ने एनसीपी को सरकार बनाने की संभावना के बारे में पूछा और 24 घंटे का समय दिया। लेकिन सूत्रों के मुताबिक एनसीपी ने दिन में 11 बजे राज्यपाल को खत लिखकर 48 घंटे और मांगे जिसके बाद राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की। उघर दिल्ली और मुंबई में दिन भर एनसीपी और कांग्रेस में बैठकों का दौर चलता रहा। एनसीपी की बैठक के बाद विधायकों ने पार्टी प्रमुख शरद पवार को 'वैकल्पिक सरकार' का गठन करने के लिए अधिकृत किया है। वहीं दिल्ली में सोनिया गांधी से चर्चा के बाद कांग्रेस के कुछ नेता मुंबई पहुंतचे और शरद पवार से मंत्रणा की। एनसीपी का कहना है कि  कि कांग्रेस के समर्थन और 'तीनों दलों' के विचार-विमर्श के बिना महाराष्ट्र में सरकार नहीं बन सकती। वहीं कांग्रेस का कहना है कि जब दलों के पास संख्या बल हो और वे सरकार बनाने की दावेदारी कर सकते हों तो बाद में राष्ट्रपति शासन हटाया भी जा सकता है।
 
गौरतलब है कि विधानसभा चुनावों में  288 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के 105 , शिवसेना के 56 , एनसीपी के 54 और कांग्रेस के 44 विघायक है। फिलहाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया है लेकिन लोगों को अब भी चुनी सरकार की उम्मीद कायम है।



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