नीतीश कुमार के कुशासन के खिलाफ विपक्ष का हल्ला बोल, सड़कों पर उतरेगा महागठबंधन

महागठबंधन ने बिहार में एनडीए सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कुशासन के खिलाफ सड़कों पर उतरने का एलान किया है. अगले साल चुनाव होना है और विपक्ष सरकार के खिलाफ गोलबंदी में लगा है. हालांकि जीतनराम मांझी ने महागठबंधन को झटका देते हुए अकेले चुनाव लड़ने का फैसला लिया है लेकिन मांझी के पलटी मारने को पीछे छोड़ते हुए महागठबंधन ने अपनी एकजुटता दिखाने के लिए नीतीश सरकार के खिलाफ 13 नवंबर को प्रदर्शन का कार्यक्रम तय कर दिया है. 13 नवंबर को महागठबंधन में शामिल घटक दलों के साथ-साथ वाम दल भी जिला मुख्यालय पर नीतीश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे. विपक्षी दलों का यह प्रदर्शन जिला स्तर पर होगा. महागठबंधन और वाम दलों की तरफ से एक साझा प्रेस कांफ्रेंस में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के कार्यक्रम का एलान किया.

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह, वीआईपी प्रमुख मुकेश साहनी और वाम दल के नेता सत्यनारायण सिंह ने हल्ला बोल का एलान किया. हालांकि नीतीश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के इस कार्यक्रम की घोषणा के वक्त राजद का कोई बड़ा नेता मौजूद नहीं था. तेजस्वी यादव रांची में थे. लेकिन राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे भी प्रेस कांफ्रेंस में नहीं पहुंचे. इसे लेकर कई तरह के सवाल उठा रहे हैं. रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश सरकार पर निशाना साधा और कहा कि बिहार की नीतीश सरकार के साथ-साथ केंद्र की एनडीए सरकार भी आम आदमी के जन सरोकारों पर लगातार हमला कर रही है. विपक्षी दलों ने सरकार के इस रुख के खिलाफ प्रदर्शन का कार्यक्रम तय किया है.

उपेंद्र कुशवाहा ने प्रदेश की नीतीश सरकार पर बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने कहा है कि बिहार में नीतीश कुमार की अगुआई वाली एनडीए सरकार के विकास की तस्वीर पटना और बिहार के लोग पानी और बाढ़ में देख चुके हैं, पटना में विकास सड़क पर तैरता दिखाई दे रहा था. मंत्री से लेकर संतरी तक पानी में फंसे हुए थे. पंद्रह साल के सुशासन की तस्वीर बेहतर डराने वाली थी. पटना में जल जमाव के बाद नीतीश कुमार की पंद्रह साल को लेकर बस इतना ही कहा जा सकता है की पंद्रह साल बदहाल बिहार.

बिहार में डबल इंजन का राग अलापा जाता है. लेकिन बिहार और देश में सरकार नौजवानों के भविष्य बर्बाद कर रही है. कुशवाहा ने कहा कि सरकार से सवाल पूछने वालों को फौरन देशद्रोही घोषित कर दिया जाता है नफरत का माहौल देश में उफान पर है दलितों के खिलाफ एक अभियान चल रहा है इतना ही नहीं देश आर्धिक मंदी से जूझ रहा है, बेरोजगारी अपने चरम सीमा पर है. बैंक की हालत खस्ता है नोटबंदी और जीएसटी से देश की अवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है. कल कारखाने बंद हो रहे हैं सभी क्षेत्रों में उत्पादन कम हो रहा है. नौकरी जा रही है जबकि सत्ता में आने से पहले करोड़ नौकरी देने की वादा किया जाता था.

उपेनद्र कुशवाहा ने कहा कि पिछले पंद्रह सालों के एनडीए शासन में बिहार रसातल में चला गया. राज्य में हत्या, लूट और सांप्रदायिक घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है. आज राज्य के किसी न किसी जिले से हर रोज हत्या, बलात्कार और लूट की घटना सामने आती है और राज्य सरकार इनपर लगाम लगाने में पूरी तरह से विफल है. कुशवाहा ने कहा है कि प्रदेश में किसानों का हाल खास्ता है. बेरोजगारी चरम पर है. आज स्थिति यह है कि काम के अभाव में युवा भटके रहे है उनकी जवानी खत्म हो रही है. उपेन्द्र कुशवाहा ने केंद्र सरकार पर भी हमला बोला. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपने विरोधियों को दबाने का काम करती है.

राजद और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के नेता तो प्रेस कांफ्रेंस में नहीं पहुंचे लेकिन वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने अपने सहयोगी जीतन राम मांझी को गच्चा दे दिया. जीतन राम मांझी ने गुरुवार को यह एलान किया था कि वे अब महागठबंधन में शामिल नहीं है और 2020 का चुनाव उनकी पार्टी महागठबंधन के साथ नहीं लड़ेगी. मांझी ने यह भी संकेत दिया था कि आगामी विधानसभा चुनाव में वीआईपी जैसी पार्टियों से उनका गठबंधन रह सकता है. एक दिन पहले तक मांझी जिन मुकेश सहनी पर भरोसा जता रहे थे. अगले ही दिन वही मुकेश सहनी उन्हें गच्चा दे गए.

एनडीए सरकार के खिलाफ 13 नवंबर को बिहार में होने वाले प्रदर्शन को लेकर महागठबंधन और वाम दलों के नेताओं ने प्रेसवार्ता बुलाई थी. महागठबंधन के नेताओं के साथ मुकेश सहनी भी मौजूद थे. मुकेश सहनी को महागठबंधन के नेताओं के साथ देखकर मांझी सबसे ज्यादा बेचैन हुए होंगे हालांकि प्रेस वार्ता में राजद का कोई बड़ा नेता मौजूद नहीं दिखा. कांग्रेस ने मांझी के फैसले पर यह सफाई दे डाली कि वे नाराज हो सकते हैं लेकिन महागठबंधन से बाहर नहीं. कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा है कि जीतन राम मांझी की नाराजगी जल्द दूर कर ली जाएगी. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले बदलते सियासी रिश्तो के बीच मांझी को सहनी ने जिस तरह गच्चा दिया है उससे मांझी जरूर परेशान होंगे. महागठबंधन और वाम दल बुधवार को जिला में सड़क पर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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