बिहार में बदहाल शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ उपेंद्र कुशवाहा करेंगे आमरण अनशन

यूं तो देश भर के सरकारी स्कूलों की हालत कमोबेश एक जैसी ही है लेकिन बिहार में पिछले पंद्रह सालों में सरकारी स्कूलों पर बिहार के मुख्यमंत्री ने ध्यान नहीं दिया. सच तो यह है कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था बदहाल है. सरकारी स्कूलों की कोई सुध लेना वाला नहीं. नारों में जरूर नीतीश कुमार कहते रहे हों कि पढ़ेगा युवा, तभी बढ़ेगा युवा. लेकिन सच्चाई यह है कि सरकारी स्कूलों पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया. नीतीश कुमार के डिग्री लाओ और नौकरी पाओ की योजना ने ऐसे-ऐसे शिक्षक पैदा कर डाले जो मुहावरों में नहीं हकीकत में नौ और छह में फर्क नहीं समझते हैं. बिहार की बदहाल शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ राष्ट्रीय लोक समता पार्टी करीब ढाई साल से बिहार में बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए सरकार के खिलाफ आंदोलनरत है.

रालोसपा का मानना है कि शिक्षा सुधार, जन-जन का अधिकार है. रालोसपा सड़कों पर भी उतरी और इस दौरान पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा पर पुलिस ने लाठियां भी बरसाईं. लेकिन पार्टी का शिक्षा सुधार कार्यक्रम जारी था और आगे भी जारी रहेगा. नीतीश कुमार के रवैये से यह लगने लगा है कि वे पिछड़ों-अतिपिछड़ों, गरीबों, अल्पसंख्यकों, दलितों को शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं. नहीं तो सरकारी स्कूलों की हालत इतनी खस्ता नहीं होती. रालोसपा ने उनके सामने शिक्षा में सुधार के लिए पच्चीस सूत्री मांग भी रखी थी, लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया.

उपेंद्र कुशवाहा केंद्र में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री थे तो कोशिश यह थी कि बिहार में ज्यादा से ज्यादा केंद्रीय विद्यालय खोले जाएं लेकिन नीतीश सरकार के सामने बार-बार प्रस्ताव के बावजूद सरकार ने दिलचस्पी नहीं ली. तब नीतीश कुमार महागठबंधन में थे और उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के साथ थे. मंत्री रहते हुए ही उपेंद्र कुशवाहा ने शिक्षा के सवाल पर नीतीश कुमार की घेरेबंदी की और आंदोलन शुरू किया. अपने कार्यकाल में निजी कोशिशों से उपेंद्र कुशवाहा ने नावादा और औरंगाबाद में दो केंद्रीय विद्यालय खोलने की मंजूरी हासिल की और बिहार सरकार को जमीन हस्तांतरित करने को कहा.

तब तक नीतीश महागठबंधन छोड़ कर एनडीए में आ चुके थे. लेकिन उपेंद्र कुशवाहा के सियासी कद को देखते हुए नीतश कुमार ने इस सिलसिले में पहल नहीं की. साल भर से ज्यादा हो गया जमीन हस्तांतरित करने की फाइल कहीं धूल फांक रही है. हालांकि उपेंद्र कुशवाहा ने समय-समय पर नीतीश कुमार से इन दो स्कूलों के लिए जरूरी कार्रवाई करने का अनुरोध किया लेकिन नीतीश है कि मानते ही नहीं.

बिहार में नए केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए राज्य सरकार की तरफ से जमीन हस्तांतरण को लेकर अब केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ने नीतीश कुमार को सितंबर में पत्र लिखा था, लेकिन अब तक इस पर पहल नहीं हो सकी है. पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने केंद्रीय विद्यालय खोलने को लेकर नीतीश सरकार की सुस्ती पर सवाल उठाया है. रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि उनके केंद्रीय राज्य मंत्री रहते बिहार में नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की पहल की गई थी. केंद्र सरकार ने राज्य में कई नए केंद्रीय विद्यालय खोलने का निर्णय लिया लेकिन इसके सालभर गुजर जाने के बावजूद अब तक भूमि और अस्थायी भवन जैसी सुविधाएं राज्य सरकार की तरफ से मुहैया नहीं कराई जा सकी हैं. उपेंद्र कुशवाहा ने राज्य सरकार पर उदासीनता बरतने का आरोप लगाया.

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल ने नीतीश कुमार को जो पत्र लिखा है उसमें केंद्रीय विद्यालय नवादा और केंद्रीय विद्यालय औरंगाबाद सहित तेरह केंद्रीय विद्यालयों को खोले जाने की चर्चा करते हुए भूमि और अस्थाई भवन संबंधी औपचारिकताएं राज्य सरकार की तरफ से जल्द पूरा करने को कहा गया था. कुशवाहा अब इस सवाल पर अब आरपार की लड़ाई के मूड में हैं. उन्होंने एलान किया कि राज्य सरकार ने दस दिनों में केंद्रीय विद्यालय के लिए जमीन हस्तांतरित नहीं कराई तो वे आमरण अनशन पर बैठेंगे. कुशवाहा ने 26 जनवरी से आमरन अनशन करने का एलान किया.

उपेंद्र कुशवाहा जब मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री थें, उस वक़्त केंद्र से बिहार को दो केंद्रीय विद्यालय खोलने का प्रस्ताव पारित कराया था. लेकिन आज तक बिहार सरकार उसपर कोई ध्यान नहीं दे रही है. कुशवाहा ने कहा कि नीतीश सरकार केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए कोई सार्थक पहल नहीं कर रही है. अफसोस इस बात का है कि, गरीब बच्चों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मैं दुःखी मन से आमरण अनशन पर बैठने का फैसला किया है.

उन्होंने साफ किया कि इसे सियासत से जोड़ कर नहीं देखा जाए. उन्होंने शिक्षा को सियासी नहीं सामाजिक मुद्दा माना और कहा कि वे दूसरे सियासी दलों से भी आमरन अनशन को समर्थन देने की गुहार कर रहे हैं, ताकि बिहार में दो केंद्रीय स्कूल जल्द खोला जा सके. कुशवाहा ने कहा कि राष्ट्रीय लोक समता पार्टी कई सालों से शिक्षा को लेकर सड़कों पर उतरी रही है और कई कार्यक्रम किए हैं. उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए पार्टी ने अब शिक्षा सुधार वर्ना जीना बेकार कार्यक्रम का एलान किया. उन्होंने कहा कि रालोसपा शिक्षा के सवाल पर सरकार को लगातार घेरते रही है और आगे भी हम इस सवाल को उठाते रहेंगे क्योंकि हमने शपथ ली है कि शिक्षा में सुधार करेंगे, कर के रहेंगे. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).

 



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