सरकार के निशाने पर जेएनयू, फीस बढ़ाए जाने के खिलाफ छात्र सड़कों पर उतरे

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में संग्राम हफ्तों से जारी है. सोमवार को छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फूटा और घंटों पुलिस के साथ उनका संघर्ष होता रहा. सरकार जेएनयू को लेकर जिस तरह का भेदभाव कर रही है उससे साफ होता है कि जेएनयू सरकार के निशाने पर है. सरकार ने हॉस्टल की फीस मनमानी बढ़ा दी और नौ सौ से एक हजार फीसद तक बढ़ा दी है. इससे छात्र नाराज हैं और वाइस चांसल छात्रों से मिलने से कतरा रहे हैं. हफ्तों से वे युनिवर्सिटी परिसर में इसका विरोध कर रहे थे. लेकिन सोमवार को संग्राम सड़कों पर दिखाई दिया. जेएनयू के छात्रों ने सोमवार को फीस बढ़ोतरी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया.

छात्रों की मांग है कि प्रशासन फीस बढ़ोतरी समेत कई अहम घोषणाओं को वापस ले. सोमवार को ही विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह भी हो रहा है. इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को हिस्सा लेना था. इसी दौरान छात्रों ने हॉस्टल फीस बढ़ोतरी और ड्रेस कोड के मुद्दे पर कैंपस में विरोध मार्च निकाला. छात्रों ने वाइस चांसलर के खिलाफ जेएनयू कैंपस के बाहर उग्र प्रदर्शन भी किया. छात्रों के प्रदर्शन को रोकने के लिए भारी संख्या में सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस के जवान तैनात रहे. प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों को जवानों ने टांग कर बस में बैठाया. छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और लड़कियों के साथ बदतमीजी की. प्रदर्शन में भाजपा की छात्र इकाई एबीवीपी को छोड़ कर सभी छात्र संगठनों ने हिस्सा लिया.

जेएनयू छात्रों का कहना है कि जब उनकी फीस में कटौती की मांग को स्वीकार नहीं किया जा रहा तो उन्हें दीक्षांत समारोह में जाना भी मंजूर नहीं. उनका आरोप है कि हॉस्टल फीस बढ़ोतरी का मामला यूनिवर्सिटी में काफी आगे बढ़ चुका है और इसका कोई हल नहीं निकला जा रहा है. छात्र संघ की मांग है कि फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस लिया जाए. इसे लेकर छात्र संघ ने पहले ही छात्रों से अपील करते हुए ज्यादा से ज्यादा संख्या में जुटने और मार्च में शामिल होने के लिए कहा था. छात्र संघ का कहना है कि जब छात्रों को सस्ती शिक्षा नहीं मिल रही तो दीक्षांत समारोह की क्या जरूरत है.

प्रदर्शन कर रहे छात्र अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् की तरफ आगे बढ़ना चाहते थे लेकिन गेट पर अवरोधक लगा दिए गए हैं. उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू इस स्थान पर दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे. अधिकारियों ने बताया कि मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक' भी सुबह से ही एआईसीटीई ऑडिटोरियम में थे. छात्रों के प्रदर्शन के मद्देनजर मंत्रालय में दो पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द करने पड़े. जेएनयू से लगभग तीन किलोमीटर दूर एआईसीटीई के दरवाजों को बंद कर दिया गया और सुबह शुरू हुए विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर परिसरों के बाहर सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया गया था.

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जेएनयू परिसर के उत्तरी और पश्चिमी गेट के बाहर और बाबा बालकनाथ मार्ग पर एआईसीटीई ऑडिटोरियम और जेएनयू के बीच स्थित सड़क पर बैरिकेड लगाए गए थे. हाथों में तख्तियां लेकर छात्रों ने दिल्ली पुलिस वापस जाओ जैसे नारे लगाए. छात्रों ने कुलपति एम जगदीश कुमार के खिलाफ भी नारेबाजी की. छात्रों की मांग थी कि मसौदा छात्रावास मैनुअल को वापस लिया जाए जिसमें उनके अनुसार फीस वृद्धि, कर्फ्यू का वक्त और ड्रेस कोड जैसी पाबंदियों का प्रावधान है. छात्रों ने बताया कि सुबह शुरू हुआ यह प्रदर्शन छात्रावास के मैनुअल के विरोध के अलावा पार्थसारथी रॉक्स में प्रवेश पर प्रशासन की पाबंदी तथा छात्र संघ के कार्यालय को बंद करने के प्रयास के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों का ही हिस्सा है.

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) ने जेएनयू में फीस बढ़ाए जाने पर केंद्र सरकार की आलोचना की और कहा कि इससे गरीबों, पिछड़े, दलितों, अल्पसंख्यकों व सामान्य वर्ग के गरीब छात्र जेएनयू में पढ़ाई करने से वंचित हो जाएंगे. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि केंद्र सरकार जेएनयू को निशाना बना रही है और उनके निशाने पर कमजोर तबके के छात्र हैं ताकि वे पढ़ाई नहीं कर सकें व सरकार से सवाल नहीं पूछ सकें. कुशवाहा का मानना है कि सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है और होस्टल की फीस में नौ सौ से लेकर एक हजार फीसद तक बढ़ोतरी कर गरीबों के शिक्षा के अधिकार पर हकमारी कर रही है. कुशवाहा ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की बर्बरता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपने हक के लिए सड़कों पर उतरे छात्रों के साथ पुलिस का रवैया शर्मनाक था.

कुशवाहा ने छात्रों के प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि पुलिस ने महिलाओं के साथ भी अभद्र व्यवहार किया. कुशवाहा ने हैरत जताई कि पिछले कई दिनों से युनिवर्सिटी परिसर में छात्र प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन वाइस चांसलर ने छात्रों से मिलने की कोशिश तक नहीं की, जबकि छात्रों ने वीसी से मिलने की कई बार कोशिश की. कुशवाहा ने बढ़ी फीस को वापस लेकर युनिवर्सिटी में शिक्षा का माहौल बनाने की अपील की. बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भाजप पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के जेएनयू में हॉस्टल, मेस समेत फीस की अप्रत्याशित बढ़ोतरी व नियमों के बदलाव के खिलाफ छात्रों की वाजिब मांगों पर पुलिस बल का प्रयोग निंदनीय है. भाजपा नहीं चाहती कि गांव-गरीब के बच्चे जेएनयू जैसी यूनिवर्सिटी में पढ़ें. हम मजबूती से छात्रों की मांगों के साथ हैं.  (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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