कश्मीर का सच और अमित शाह का बयान

केंद्र सरकार की मानें तो जम्मू-कश्मीर में सब कुछ ठीक है. जिंदगी फिर से पुराने ढर्रे पर लौट आई है. शिकारे चल रहे हैं. सैलानी तफरीह के लिए आ रहे हैं. सेबों के दरख्त फलों से लदे हैं. जन्नत का नजारा वहां दिखाई दे रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए दावा किया था कि जम्मू-कश्मीर में शांति-शांति है, सब कुछ ठीक है. कांग्रेसी सांसद और सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद सहित दूसरे नेताओं ने कश्मीर के सच को जानना चाहा था. इससे पहले कांग्रेस के अधीररंजन चौधरी ने लोकसभा में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला सहित दूसरे नेताओं की गिरफ्तारी पर सरकार को घेरा था.अमित शाह ने राज्य सभा में दावा किया कि भारत प्रशासित कश्मीर में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है. अमित शाह केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पहली बार सदन में जम्मू-कश्मीर के हालात पर बयान दे रहे थे.

अमित शाह ने राज्यसभा में कहा था कि वहां पर स्थिति सामान्य ही है. इसके बारे में कई भ्रांतियां फैली हुई हैं. मैं पूरी स्थिति के सामान्य होने के बारे में बताना चाहता हूं. अब बीबीसी ने अमिक शाह के दावे के बाद लिखा है कि पांच अगस्त के बाद से अस्पताल से लेकर स्कूल और अशांति थी और पिछले दिनों बर्फ़बारी के बाद से घाटी में स्थितियां सामान्य होती दिख रही थीं. लेकिन अमित शाह के बयान के बाद से फिर कश्मीर में सुगबुगाहट है. कश्मीरी लोगों पर इस भाषण के असर का जिक्र करते हुए रियाज़ कहते हैं कि बीते दिनों से यहां पर अनाधिकारिक हड़ताल चल रही थी. दुकानें 11 बजे तक खुलती थीं और इसके बाद दुकानें बंद हो जाती थीं. लेकिन बर्फ़बारी होने के बाद से घाटी में हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे थे. लोग दुकानें खोल रहे थे. लेकिन अमित शाह के भाषण के एक घंटे बाद ही लाल चौक पर दुकानें बंद हो गई. इसके साथ ही डाउन टाउन श्रीनगर में भी दुकानें बंद हो गईं और कुछ लड़कों ने दुकानों पर पत्थरबाज़ी भी की.

अमित शाह ने सदन में सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि 195 पुलिस स्टेशन से सीआरपीसी 144 हटा ली गई है और पत्थरबाज़ी की घटनाओं में कमी आई है. रियाज़ मसरूर के मुताबिक यह बात बिलकुल दुरुस्त है. कश्मीर में अब उतनी पत्थरबाज़ी नहीं होती जितनी पहले ऐसी परिस्थितियों में होती थीं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इसकी वजह पांच अगस्त के बाद से साढ़े छह हज़ार लोगों की गिरफ़्तारी है. हालांकि, इनमें से पांच हज़ार लोगों को बाद में छोड़ दिया गया.

यहां पर पथराव की घटना सिर्फ़ एक बार देखी गई है जब यहां पर यूरोपीय संघ का प्रतिनिधि मंडल आया था. इस एक दिन में साठ ऐसी घटनाएं घटी थीं. अमित शाह ने यह भी कहा था कि पांच अगस्त के बाद से पुलिस फ़ायरिंग में किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है. लोगों का कहना है कि इसमें सच्चाई है. पुलिस की फाइरिंग से कश्मीर में किसी की मौत नहीं हुई है. छह अगस्त को पुलिस ने विरोध प्रदर्शन कर रहे कुछ लड़कों का पीछा किया था. इसके बाद लगभग चार-पांच लड़कों ने दरिया में छलांग लगा दी जिससे पानी में डूबने की वजह से एक लड़के की मौत हो गई थी. इसी तरह सौरा इलाके में एक अन्य व्यक्ति की मौत हुई थी जिनका नाम असरार ख़ान था. इन्हें टियर गैस का शेल लगा था. एक और बुजुर्ग की मौत टीयर गैस के धुएं में दम घुटने की वजह से हुई थी. ऐसे में अमित शाह की बात बिलकुल सही है.

अमित शाह ने दावा किया है कि कश्मीर में हालात सामान्य हो गए हैं. उन्होंने कहा कि व्यापार ठीक ढंग से चल रहा है, बच्चे स्कूल जा रहे हैं और अस्पताल भी सुचारू ढंग से चल रहे हैं. बीते डेढ़ महीने में कश्मीर के अलग-अलग अस्पतालों का दौरा करने वाले रियाज़ कहते हैं कि ये सरकारी आंकड़े हैं और इन आंकड़ों को ज़मीनी स्थिति से मिलाया जाए तो कुछ अलग तस्वीर सामने आती है. दूसरी तरफ फल व्यापारियों की स्थिति को लेकर रियाज़ कहते हैं कि सेब किसानों ने 27 सितंबर तक फल तोड़े ही नहीं थे. इसके बाद सरकार ने कहा कि उनके फल नैफेड के तहत ख़रीदे जाएंगे. यह एक अच्छी पहल थी क्योंकि किसानों को अपने घर से ही माल बेचने का मौका मिल रहा था.

इस के तहत पहले 51 रुपए और फिर 64 रुपए कीमत लगाई गई. लेकिन किसानों के लिए यह कीमत आकर्षक नहीं थी. इसके बाद फल व्यापारियों के सामने सुरक्षा को लेकर समस्याएं भी आईं क्योंकि संदिग्ध बंदूकधारियों ने कई लोगों को मार दिया. ऐसे में 20 हज़ार डिब्बे यहां से निकल ही नहीं पाए और लोगों ने स्थानीय स्तर पर ही उन्हें बेचा. ऐसे में जब आप पूरी स्थिति को देखते हैं और कड़ी से कड़ी मिलाते हैं तो स्थिति सामान्य नज़र नहीं आती है. ऐसे में इस स्थिति को सरकार किस तरह सामान्य बता रही है, इसे लेकर सरकार और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की स्थिति है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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