प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: 'न्यू इंडिया' में नहीं है भय, कटुता और नकारात्मकता का कोई स्थान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि समाज के सभी वर्गों द्वारा उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया जाना, भारत की सामाजिक सद्भाव की प्राचीन संस्कृति और परम्परा को दर्शाता है। राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में पीएम ने कहा कि आज के दिन, अगर किसी के मन में कोई कटुता है, तो यह उसे भुला देने का दिन है। उन्होंने कहा कि आज का दिन भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में भी एक स्वर्णिम अध्याय है क्योंकि न्यायालय ने दशकों पुराना एक मामला निपटाया है।

क्या रही पीएम मोदी के संबोधन की पांच बड़ी बाते आइए देखते हैं।

स्वर्णिम अध्याय का दिन

--आज के दिन का संदेश जोड़ने का है-जुड़ने का है और मिलकर जीने का है
--किसी के मन में कटुता रही हो तो उसे तिलांजली देने का दिन

स्वर्णिम अध्याय का दिन
--नौ नवंबर को दो विपरीत धाराओं ने नया संकल्प लिया
---बर्लिन की दीवार को गिराया गया
--करतारपुर साहिब की शुरूआत हुई 
---साथ रहकर आगे बढ़ने की सीख मिलती है

स्वर्णिम अध्याय का दिन

--विविधता में एकता का मंत्र अपनी पूर्णता के साथ खिला हुआ है
--विविधता में एकता के प्राणतत्व को समझना होगा
---इतिहास के पन्नों में आज की घटना का जरूर उल्लेख होगा
---कठिन से कठिन मसले का हल संविधान के दायरे में आता है
---न्यायालय के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय 
----सर्वसम्मति से लिया गया फैसला

 स्वर्णिम अध्याय का दिन

---राष्ट्रनिर्माण में हमारी जवाबदेही बढ़ी है
---देश की न्यायिक प्रणाली का पालन करने का दायित्व बढ़ गया है
---सद्भाव, सौहार्द, स्नेह देश के लिए विकास के लिए जरूरी

स्वर्णिम अध्याय का दिन
---फैसले के बाद न्यू इंडिया के निर्माण का संकल्प 
---नए भारत के निर्माण की नई शुरूआत
---सबका विश्वास हासिल कर सबको साथ साथ लेकर सबका विश्वास

 



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