भाजपा की वाशिंग मशीन और उसमें धुलते भ्रष्टाचारी नेता

कुछ सालों से देश की सियासत में इस बात के खूब चर्चे होते रहे हैं कि भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है या भ्रष्टाचारियों के लिए लड़ रही है. जिन नेताओं को वह भ्रष्टाचार के लिए घेरा करती थी, भाजपा में शामिल होते ही उन नेताओं का शुद्धीकरण हो जाता है. इसलिए यह लतीफा भी सियासी गलियारे में खूब मशहूर है कि भ्रष्टाचार के लिए जेल जाना जरूरी नहीं है, बल्कि भाजपा में चले जाना ही सब ठीक कर देता है. भाजपा के इस वाशिंग मशीन में धुल कर कई भ्रष्टाचारी नेता मिस्टर क्लीन बन गए. लंबी सूची है. दिलचस्प यह है कि यह सूची किसी और ने नहीं भाजपा ने ही बनाई थी. अब वही भाजपा उन्हें बेदाग मान रही है या यूं कहें कि सत्ता के लिए भाजपा को उन नेताओं के दाग भी अच्छे लगने लगे है.

जिन अजित पवार पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सत्तर हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले का आरोप लगाते नहीं थकते थे, वही अजित पवार अब उन्हीं फडणवीस के लिए संत पुरुष बन गए हैं. दिलचस्प यह है कि महाराष्ट्र में सियासी हलचल के बीच ही यह खबर आई कि भ्रष्‍टाचार निरोधक ब्‍यूरो (एसीबी) ने सिंचाई घोटाले से जुड़े नौ केस बंद कर दिए हैं. सिंचाई घोटाले में अजित पवार भी आरोपी हैं लेकिन अब वे फडणवीस की सरकार में उपमुख्यमंत्री भी बन गए हैं. यानी उप मुख्यमंत्री बनने के 48 घंटे के अंदर ही अजित पवार को एसीबी ने क्लीन चिट दे दी. वैसे एसीबी का कहना है कि जो नौ केस बंद किए गए हैं, उनका वास्ता अजित पवार से नहीं है. लेकिन इस घोटाले के कुछ मामलों का बंद होना भी अहमियत रखता है. इन केसों के बंद होने की टाइमिंग को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ी है और सियासी गलियारे में भी भाजपा के चाल, चरित्र और चेहरे पर सवाल उठ रहे हैं.

महाराष्‍ट्र के भ्रष्‍टाचार निरोधक ब्‍यूरो (एसीबी) का वैसे कहना है कि बंद किए गए नौ मामलों में से कोई भी मामला अजित पवार से नहीं जुड़ा है जिन्‍होंने शनिवार की सुबह बड़े ही नाटकीय घटनाक्रम में मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ उप मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली थी. ब्‍यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि यह एक रुटीन प्रक्रिया है. वरिष्‍ठ अधिकारी परमबीर सिंह ने का कहना है कि सिंचाई से जुड़ी शिकायतों के मामले में करीब 3000 टेंडरों की जांच हम कर रहे हैं. ये नियमित जांच है जो बंद हुई हैं और बाकी मामलों में जांच पहले की तरह ही जारी है. उन्‍होंने कहा कि जिन मामलों को बंद किया गया है उनमें से कोई भी अजित पवार से जुड़े नहीं हैं. हालांकि इन मामलों के बंद किए जाने के समय ने विवाद खड़ा कर दिया है क्‍योंकि भाजपा ने शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की कोशिशों पर पानी फेरकर अजित पवार के साथ मिलकर राज्‍य में सरकार बना ली. अजित पवार ने दावा किया है कि एनसीपी के 54 विधायक उनके साथ हैं जबकि उनके इस दावे का उनके चाचा व पार्टी प्रमुख शरद पवार खंडन कर रहे हैं.

देवेंद्र फडणवीस और भाजपा सिंचाई घोटाले को लेकर हमेशा अजित पवार पर निशाना साधते रहे हैं. पांच साल पहले 2014 में मुख्‍यमंत्री बनने के बाद जो पहली कार्रवाई उन्‍होंने की थी वह थी सिंचाई घोटाले में अजित पवार की कथित भूमिका की जांच के आदेश देना. आरोपों में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार के वक्‍त जब अजित पवार उप मुख्‍यमंत्री थे तब करीब 70000 करोड़ रुपए के हेराफेरी के भी आरोप हैं. सिंचाई घोटाले में महाराष्‍ट्र में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार के दौरान कई सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी देने और उनके क्रियान्‍वयन में अनियमितताएं शामिल हैं.

पिछले महीने महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, शरद पवार और अजित पवार दोनों पर प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन का आरोप लगाया था जो एक कोऑपरेटिव बैंक से जुड़ा था. चुनाव प्रचार के समय देवेंद्र फडणवीस ने एक रैली में कहा था कि चुनाव के बाद अजित पवार जेल में चक्‍की पीस रहे होंगे. उन्‍होंने फिल्‍म 'शोले' के डायलॉग चक्‍की पीसींग एंड पीसींग एंड पीसींग का भी इस्‍तेमाल किया था. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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