उपेंद्र कुशवाहा आमरण अनशन पर बैठे, ताकि बच्चों को मिले बेहतर तालीम

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने शिक्षा के सवाल पर बिहार में आरपार की लड़ाई छेड़ दी है. करीब तीन साल से राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की अगुआई में बिहार की बदहाल शिक्षा व्यवस्था के सवाल पर रालोसपा लगातार आंदोलन करती रही है. अब उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार की सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक डाला है. वे आमरण अनशन पर बैठ गए है. बड़ी बात यह है कि शिक्षा के सवाल पर महागठबंधन के तमाम दलों का तो साथ मिला ही, वाम दलों ने भी उनका साथ दिया है.

यूं तो देश भर के सरकारी स्कूलों की हालत कमोबेश एक जैसी ही है लेकिन बिहार में पिछले पंद्रह सालों में सरकारी स्कूलों पर बिहार के मुख्यमंत्री ने ध्यान नहीं दिया. सच तो यह है कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था बदहाल है. सरकारी स्कूलों की कोई सुध लेना वाला नहीं. नारों में जरूर नीतीश कुमार कहते रहे हों कि पढ़ेगा युवा, तभी बढ़ेगा युवा. लेकिन सच्चाई यह है कि सरकारी स्कूलों पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया. नीतीश कुमार के डिग्री लाओ और नौकरी पाओ की योजना ने ऐसे-ऐसे शिक्षक पैदा कर डाले जो मुहावरों में नहीं हकीकत में नौ और छह में फर्क नहीं समझते हैं. बिहार की बदहाल शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ राष्ट्रीय लोक समता पार्टी करीब ढाई साल से बिहार में बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए सरकार के खिलाफ आंदोलनरत है.

रालोसपा का मानना है कि शिक्षा सुधार, जन-जन का अधिकार है. रालोसपा सड़कों पर भी उतरी और इस दौरान पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा पर पुलिस ने लाठियां भी बरसाईं. लेकिन पार्टी का शिक्षा सुधार कार्यक्रम जारी था और आगे भी जारी रहेगा. नीतीश कुमार के रवैये से यह लगने लगा है कि वे पिछड़ों-अतिपिछड़ों, गरीबों, अल्पसंख्यकों, दलितों को शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं. नहीं तो सरकारी स्कूलों की हालत इतनी खस्ता नहीं होती. रालोसपा ने उनके सामने शिक्षा में सुधार के लिए पच्चीस सूत्री मांग भी रखी थी, लेकिन सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया.

अब नवादा ओर औरंगाबाद के देवकुंड में केंद्रीय विद्यालय खुलवाने के लिए रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा आमरण अनशन पर बैठ गए हैं. मिलर स्कूल मैदान में कुशवाहा के आमरण अनशन को राजद, कांग्रेस, हम, वीआईपी, भाकपा, माकपा और भाकपा माले ने समर्थन दिया. इन दलों के नेता व प्रतिनिधि यहां पहुंचे. कुशवाहा सहित विपक्षी नेताओं ने राज्य सरकार पर शिक्षा व्यवस्था बदहाल करने का आरोप लगाया.

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि इन दोनों जगहों पर केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने पिछले साल ही अनुमति दे दी थी. लेकिन अब तक राज्य सरकार ने जमीन हस्तांतरित करने सहित प्रक्रिया पूरी नहीं की है. इस साल 19 सितंबर को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र भेज कर प्रक्रिया पूरा कराने का अनुरोध किया था. केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री रहते हुए बिहार के छह जिलों में केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए केंद्र सरकार की योजना में शामिल कराया था. केंद्र सरकार ने 2016 में बिहार सरकार से प्रस्ताव भी मांगा था लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ली. हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि गरीबों के बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़े. अमीरों के बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं, लेकिन गरीबों के बच्चों को सरकारी स्कूल का आसरा रहता है. इसलिए सरकारी स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था सुधारना चाहिए.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदनमोहन झा ने कहा कि सरकार गैर जिम्मेदाराना कार्रवाई कर रही है. विपक्ष की उचित मांगों पर सरकार को ध्यान देना चाहिए. आम लोग अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य और विधि व्यवस्था की उम्मीद सरकार से रखते हैं. भाकपा के राज्य सचिव सत्यनारायण सिंह ने कहा कि कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार सख्त कदम उठाए. 

राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पटना के मिलर हाईस्‍कूल में आमरण-अनशन पर बैठ गए. कुशवाहा की भूख हड़ताल में बिहार महागठबंधन के नेताओं का भरपूर सहयोग मिला है. हालांकि, राजद की ओर से खुद तेजस्‍वी यादव नहीं पहुंचे, लेकिन उनकी पार्टी के कई वरीय नेता पहुंचे हैं. उधर, कांग्रेस, हम और वीआइपी के भी वरीय नेता पहुंचे हुए हैं. वहीं यह भी बताया जाता रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा का ब्‍लड प्रेशर बढ़ कर 170 पर पहुंच गया है.

आमरण अनशन पर बैठने के पहले कुशवाहा ने ट्वीट कर मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला भी किया. उन्‍होंने अपने ट्वीट में कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी, माना कि उपेंद्र कुशवाहा से आपकी कोई राजनीतिक ईर्ष्या-द्वेष होगी, लेकिन बिहार के लाखों बच्चों के भविष्य से कैसा ईर्ष्या-द्वेष, आज इन नन्हें बच्चों के हाथों में कलम की बजाए शिक्षा सुधार वरना जीना बेकार की तख्तियां क्यों. अपनी ज़िद छोड़िए! कुशवाहा को लोगों का समर्थन भी मिल रहा है. रालोसपा का मानना है कि शिक्षा हर इंसान का बुनियादी अधिकार है और यह सियासी नहीं सामाजिक मुद्दा है.  (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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