उपेंद्र कुशवाहा के अनशन ने विपक्ष को किया एकजुट

बिहार की सियासत में इसे हाल के दिनों की बड़ी घटना कहा जा सकता है. राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा पांच दिनों तक आमरण अनशन पर रहे. सवाल शिक्षा में सुधार का था. करीब तीन साल से वे बिहार में शिक्षा के सवाल पर नीतीश कुमार की सरकार को घेरते रहे थे. केंद्र में मंत्री रहते हुए भी वे बिहार के सरकारी स्कूलों की खस्ताहाली और चौपट हो गई शिक्षा व्यवस्था पर लगातार सवाल उठाते रहे थे. कंद्र की एनडीए सरकार से अलग होने के बाद भी वे शिक्षा सहित दूसरे मुद्दों को लेकर वे नीतीश कुमार पर हमलावर रहे थे. केंद्र में मंत्री रहते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार में दो सेंट्रल स्कूल खोलने की मंजूरी ली थी. यह स्कूल औरंगाबाद और नवादा में खोला जाना था.

औरंगाबाद की जमीन तो बिहार सरकार को एक मठ के महंत ने दान में दी ताकि सेंट्रल स्कूल खुले और बिहार के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके. नवादा में भी जमीन के लिए स्थानीय प्रशासन तो राजी है लेकिन फाइल सचिवालय में अटकी पड़ी है. स्कूल खुलने की मंजूरी करीब साल भर हो गया. देश भर में तेरह स्कूल खोलने की केंद्र ने मंजूरी दी थी, उनमें से ग्यारह स्कूलों में तो पढ़ाई भी शुरू हो गई लेकिन बिहार में स्कूल खुल नहीं सका और इसकी वजह नीतीश कुमार ही रहे. बेहतर शिक्ष व्यवस्था और सेंट्रल स्कूल खोलने को लेकर उपेंद्र कुशवाहा ने कई बार नीतीश कुमार से गुहार लगाई लेकिन नीतीश कुमार बेहतर शिक्षी की बजाय साइकिल और पोशाक बांट कर ही अपनी पीठ थपथपाते रहे.

नीतीश कुमार की सरकार ने जब बात नहीं मानी तो वे आमरण अनशन पर बैठ गए. विपक्षी दलों का उन्हें साथ भी मिला. लेकिन चौथे दिन उनकी तबीयत बिगड़ी तो प्रशासन ने आनन-फानन में उन्हें पीएमसीएच में भर्ती करा डाला. सरकार ने तो अपनी तरफ से इसे नाकाम करने की हर मुमकिन कोशिश की लेकिन सरकार के अड़ियल रवैये ने विपक्ष को एकजुट कर डाला. विपक्ष के तमाम नेताओं ने प्रेस वार्ता की और उपेंद्र कुशवाहा के समर्थन में नीतीश सरकार के खिलाफ हमला बोला है. विपक्षी दल के नेताओं ने फिर कुशवाहा का आमरण अनशन खत्म करवाया लेकिन इस भरोसे के साथ कि इस आंदोलन को और आगे ले जाया जाएगा.

पीएमसीएच पहुंच कर विपक्षी नेताओं ने पांचवें दिन रालोसपा प्रमुख का अनशन तुड़वाया. 'शिक्षा सुधार वरना जीना बेकार' के संकल्प के साथ कुशवाहा पांचवें दिन लगातार आमरण अनशन पर थे. चौथे दिन कुशवाहा की हालत ज्यादा नाजुक होने के कारण प्रशासन उन्हें पीएमसीएच में इलाज के लिए भर्ती कराया था. अनशन पर बैठे कुशवाहा की हालत लगातार ख़राब होती जा रही थी. जिसे लेकर विपक्षी नेताओं ने चिंता जाहिर की. पीएमसीएच पहुंचे महागठबंधन के दिग्गज नेताओं ने कुशवाहा का अनशन तुड़वाया. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, शरद यादव और जीतन राम मांझी ने यह अनशन तुड़वाया.

कुशवाहा के आमरण अनशन ने विपक्षी दलों को एकजुट कर दिया. इनके साथ वाम दलों के नेता भी थे. महागठबंधन के सारे बड़े नेता एक साथ पीएमसीएच में दिखे. बिहार की सियासत में इसे बड़ी घटना के तौर पर देखा जा रहा है. तेजस्वी यादव ने कहा कि यह तो ट्रेलर था, शिक्षा में सुधार के लिए हम आगे भी आंदोलन करेंगे. शरद यादव ने कहा कि विपक्ष एकजुट है. हम साथ मिलकर राज्य सरकार के खिलाफ संघर्ष करेंगे. इस बीच भाजपा के विधान पार्षद संजय पासवान भी उपेंद्र कुशवाहा से पीएमसीएच में मिले। उन्होंने कहा कि इस मांग को इनका पूरा समर्थन है.

शिक्षा में सुधार को लेकर लेकर कुशवाहा और उनकी पार्टी लगातार आवाज़ उठा रही है. केंद्रीय विद्यालय के लिए राज्य सरकार से जमीन की मांग को लेकर कुशवाहा अनशन पर बैठे थे. चौथे दिन कुशवाहा का सुगर बेहद कम हो गया था. उन्होंने कहा था कि अस्पताल में उनका अनशन जारी रहेगा. लेकिन उनकी स्थिति नाजुक होते जा रही थी. विपक्ष के तमाम नेताओं ने शनिवार को उपेंद्र कुशवाहा के समर्थन में नीतीश सरकार के खिलाफ हमला बोला.

प्रदेश आरजेडी कार्यालय में विपक्षी दलों की प्रेस वार्ता में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के साथ-साथ शरद यादव, जीतन राम मांझी, अखिलेश प्रसाद सिंह, जगदानंद सिंह मौजूद रहे. तेजस्वी ने कहा कि नीतीश सरकार घमंड में चूर होकर बिहार के छात्रों के साथ नाइंसाफी कर रही है. तेजस्वी ने कहा उपेंद्र कुशवाहा केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए जिस जमीन की मांग कर रहे हैं वह राज्य सरकार नहीं दे रही है. पूरा विपक्ष उपेंद्र कुशवाहा के साथ खड़ा है. तेजस्वी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को केवल अपने कुर्सी की चिंता है. विपक्षी दलों के नेता ने साफ किया कि यह लड़ाई लंबी है लेकिन लड़ाई लड़ेंगे और इसे आंदोलन का रूप देंगे. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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