प्रधानमंत्री लेंगे पूर्वी एशिया सम्मेलन में भाग

आरसीईपी की तीसरी बैठक में मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाए जाने के लिए आसियान सदस्य देशों के सहित कुल 16 देशों के बीच बैठक प्रस्तावित है। क्षेत्रीय समग्र आर्थिक साझेदारी को अंतिम रूप देने के लिए तकरीबन सभी देशों के बीच सहमति है। लेकिन सबकी नज़रें भारत की ओर लगी हुई है। भारत व्यापार घाटे को लेकर चिंतित है और इसके समाधान की बात लगातार करता रहा है। 

प्रधानमंत्री ने थाईलैंड डेली को दिए गए साक्षात्कार में भारत व्यापार समझौते को लेकर भारत की सभी स्थिति को स्पष्ट रूप से सामने रखा भी था। 

RCEP को लेकर भारत की नीति 

भारत एक समग्र और संतुलित समझौते की अपेक्षा करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की चिंता असमान व्यापारिक घाटे को लेकर है। भारतीय बाज़ार में अवसरों उपलब्ध होंगे लेकिन साथ ही ये भी सुनिश्चित होना चाहिए कि समान अवसर भारतीय व्यवसाय और उत्पादों को भी मिले जिससे भारत की स्थिति भी बराबरी की हो। 

व्यापार, निवेश, गुड्स एण्ड सर्विसेज, बाज़ार की उपलब्धता, आर्थिक सहयोग और ई-कॉमर्स को कंबोडिया में साल 2012 में बातचीत शुरू हुई थी और कई दौर की वार्ता के बाद क्षेत्रीय सहयोग को लेकर कई मुद्दे स्पष्ट हो रहे हैं। ऐसे में भारत के रूख पर कई आयाम निर्भर करते हैं। 

 



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