भाजपा के मर्म में चुभा राहुल बजाज के सवालों का तीर

देश की सियासत के केंद्र में अचानक उद्योगपति राहुल बजाज आ गए हैं. कभी बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर-हमारा बजाज नारा गढ़ने वाले बजाज समूह के मुखिया राहुल बजाज ने केंद्रीय गृह मंत्री से एक चुभता हुआ सवाल क्या पूछ दिया, पूरा भाजपा खेमा उनके पीछे लट्ठ लेकर पड़ गया. उनके सवाल को भी राष्ट्रहित से जोड़ कर देखा जाने लगा. भाजपा का आईटी सेल उनके पुराने बयानों को सोशल मीडिया पर परोस कर उन्हें कांग्रेसी बताने में लगा हुआ है तो कई-कई मंत्री सरकार के बचाव में आए. लेकिन सरकार और भाजपा ने जिस तरह से राहुल बजाज के सवाल को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं उसने राहुल बजाज के सवाल को और भी प्रासंगिक बना डाला है.

राहुल बजाज ने अमित शाह के सामने उद्योग जगत में भय का सवाल उठाकर सबको चौंकाया था. अब दो दिन बीत गए हैं लेकिन उन पर लगातार तंज कसे जा रहे हैं. अपनी बात रखने के दो दिन बाद भी राहुल बजाज को सरकार की ओर से जवाब सुनना पड़ रहा है. पहले इसे राष्ट्रीय हित के ख़िलाफ़ बताने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने सोमवार को लोकसभा में भी कहा कि वे आलोचना सुनती रही हैं, सुनने को तैयार हैं. निर्मला सीतारमन ने कहा कि मैं उस दिन मंच पर मौजूद थी. हम हर तरह की बात सुनने को तौयार हैं. हम किसी भी तरह की आलोचना का जवाब देने के लिए भी तैयार हैं.

उद्योगपति किरण मजूमदार शॉ का कहना है कि मुझे नहीं लगता कि राहुल बजाज पर किसी को हमला करना चाहिए. राहुल बजाज के पास इस मुद्दे को उठाने का अधिकार है. मेरी राय में राहुल बजाज के इस मुद्दे को उठाने से पूरे उद्योग जगत ने राहत महसूस की होगी. संसद परिसर में भी राहुल बजाज के सवाल की गूंज सुनाई देती रही. विपक्ष ने राहुल बजाज के आरोप को सही बताया. राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता आनंद शर्मा ने कहा कि इंडस्‍ट्री में भय का माहौल सरकार की नीतियों की वजह से ही खड़ा हुआ है. जब तक डर का माहौल रहेगा, अर्थव्‍यवस्‍था की चुनौती बनी रहेगी. यह सरकार की जिम्‍मेदारी है कि भय का माहौल दूर करे.

राजद नेता मनोज झा ने कहा कि राहुल बजाज का डर सही साबित हो रहा है. उनके बयान के बाद जिस तरह की प्रतिक्रिया आई है, उन्‍हें ट्रोल किया जा रहा है, उनका इतिहास खंगाला जा रहा है, उससे उनकी बात सही साबित हुई है. कुछ सांसद मानते हैं सरकार की नीतियां ही भय के माहौल के लिए जिम्मेदार हैं और इससे निजी क्षेत्र में नया निवेश को प्रोत्‍साहित करने की सरकार की कोशिश पर असर पड़ सकता है. कुछ सांसदों का नज़रिया अलग है. लेकिन इस मसले पर राहुल बजाज ने देश में एक बड़ी बहस छेड़ दी है

राहुल बजाज ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि देश में ऐसा माहौल है कि लोग सरकार की आलोचना नहीं कर सकते. राहुल बजाज ने कहा है कि इस समय ऐसा माहौल है कि लोग सरकार की आलोचना करने से डरते हैं कि पता नहीं उनकी आलोचना को सही से लिया जाएगा या सरकार में बैठे लोग नाराज हो जाएंगे. गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में उन्होंने सीधे अमित शाह से ही ये बातें कहीं. राहुल बजाज ने कहा कि इससे पहले की यूपीए-दो में हम सरकार को गाली भी दे सकते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होता. उद्योग जगत में एक तरह से कहा गया है कि किसी को कुछ नहीं बोलना है. ऐसा माहौल ठीक नहीं है. राहुल बजाज के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भाजपा से जुड़े लोगों ने उनकी खिंचाई भी की.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल बजाज के इस बयान पर ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा है कि गृह मंत्री अमित शाह ने उन सवालों का जवाब दे दिया है जिन्हें राहुल बजाज ने उठाया है. आलोचनाएं सुनी जाती हैं और उसका हल निकाला जाता है. अपने विचार का प्रचार करने के बजाय जवाब पाने का बेहतर तरीका ढूंढना चाहिए. ऐसे विचार के प्रचार से राष्ट्रीय हित को नुकसान होता है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि राहुल बजाज गृहमंत्री अमित शाह के सामने खड़े हो सकते हैं, बिना किसी डर के अपनी बात रख सकते हैं और दूसरों को उनके साथ जुड़ने के लिए संकेत दे सकते हैं तो इसका सीधा सा मतलब है कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्य जीवित और समृद्ध हैं. यही लोकतंत्र है.

लेकिन कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि राहुल बजाज ने जो कहा, वह देशभर में, हर क्षेत्र की साझी भावना है. अगर एक समाज में, एक देश में, एक शहर में सामंजस्य नहीं है तो आप कैसे यह उम्मीद कर सकते हैं कि निवेशक आएंगे और अपना पैसा वहां लगायेंगे. पैसा केवल वहीं निवेश किया जाता है जहां वह बढ़ सकता है और जहां उसके कई गुणा बढ़ने की उम्मीद हो सकती है.

उन्होंने कहा कि और यह केवल उन क्षेत्रों में बढ़ सकता है जहां शांति, सद्भाव, पारस्परिक निर्भरता और खुशी का माहौल हो. कांग्रेस के एक अन्य प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि काफी समय बाद ‘कॉरपोरेट जगत से किसी व्यक्ति ने सत्ता के बारे में कुछ सच बोलने का साहस दिखाया है, जबकि जयराम रमेश ने एक ट्वीट में कहा कि भारतीय कॉरपोरेट विज्ञापन उद्योग में सबसे प्रसिद्ध टैगलाइनों में से एक है कि ‘आप बजाज को हरा नहीं सकते हैं.' अमित शाह को भी पता चल गया है कि आप बस एक बजाज को चुप नहीं करा सकते हैं. हमारा बजाज ने बैंड बजा दिया. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मिलिंद देवड़ा ने ट्वीट किया कि मैं राहुल बजाज को हमेशा से ही गैर राजनीतिक, प्रखर राष्ट्रवादी और बहुत ईमानदार व्यक्ति के रूप में जानता हूं. उनकी टिप्पणी उसी के अनुरूप है जो एमएसएमई, बैंकर और उद्योगपति मुझे बता रहे हैं कि अगर कारोबारी भावना जल्द नहीं सुधरी तो सबसे बुरा समय आ जाएगा. फिलहाल तो राहुल बजाज के सवाल का तीर भाजपा के मर्म में जा चुभा है. इसकी तकलीफ उसे लंबे समय तक महसूस होगी. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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