मनीला रोप या रस्सी का निर्भया कनेक्शन

निर्भया के दोषियों को फांसी पर चढ़ाने की तिहाड़ जेल ने तैयारी शुरू कर दी है। जेल प्रशासन को जब भी आदेश मिलेगा निर्भया के गुनहगारों को फांसी पर लटका दिया जाएगा। कहते हैं कि कई बार नियति भी ऐसा खेल रचती है कि देखने और सुनने वाले भी हैरान रह जाते है। जी हां हम आपको ऐसी ही एक नियति के बारे में बता रहे है। वो नियति है निर्भया के दोषियों को जिस रस्सी ने फांसी पर लटकाया जाएगा वो रस्सी बिहार के जेल बक्सर से तैयार होकर तिहाड़ जेल में पहुंची है।

अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें नियति क्या है तो आपको बताते है कि निर्भया का पैतृक गांव बलिया जिले के मेड़वरा कला में है। मेड़वरा कला गांव बक्सर शहर स्थित केंद्रीय कारागार से बमुश्किल 14-15 किमी पर है या यूं कहें कि निर्भया के गांव और जिस जेल में उसके गुनाहगारों के लिए फांसी का फंदा तैयार किया गया है उसके बीच बस गंगा नदी का ही फासला है।

जिन लोगों ने उसके साथ गुनाह किया अब उसके गांव के पास की ही मनीला रस्सी पर लटकाया जाएगा। इस रस्सी को मनीला रस्सी क्यों कहा जाता है और ये सिर्फ बक्सर जेल में ही क्यों बनती है इसके पीछे भी एक रोचक कहानी है। आपको यह जानकर थोड़ी सी हैरानी हो सकती है, कि अंग्रेजों के जमाने से ऐसी ही व्यवस्था चली आ रही है। इतना ही नहीं, देश के किसी भी कोने में फांसी देने की अगर नौबत आती है तो फंदा सिर्फ बिहार के बक्सर जेल में ही तैयार होता है।

फांसी का फंदा मनीला रस्सी से बनता है। ब्रिटिश काल में पहले फिलीपिंस की राजधानी मनीला में फांसी के लिए रस्सी तैयार होती थी। जिसके कारण ही इसे मनीला रोप या मनिला रस्सी कहते है। पहले ये मनीला के एक खास तरह के पेड़ से तैयार की जाती थी और उसे भारत मंगवाया जाता था। बाद में बक्सर जेल में वैसी ही रस्सी का निर्माण होने लगा।

कच्चे सूत की एक मनीला रस्सी बनाने में 172 धागे को मशीन में पिरोकर घिसाई के बाद इसे बनाया जाता है। सभी को मोम में पूरी तरह भिगो दिया जाता है। उसके बाद सभी धागों को मिलाकर एक मोटी रस्सी तैयार की जाती है। सबसे बेहतर धागा के लिए जे-34 रूई का इस्तेमाल किया जाता है। रात में गंगा नदी के किनारे से आने वाली नमी और ओस से रस्सी को मुलायम किया जाता है।

कुल तीन रस्सी को एक साथ मशीन में घुमाकर मोटी रस्सी बनाई जाती है। इसके लिए अंग्रेजों के समय की मशीन भी बक्सर जेल में लगी हुई है। बक्सर जेल के पास गंगा नदी बहती है यही कारण है कि वहां का मौसम मनीला रस्सी बनाने के लिए सबसे उपयुक्त है। फंदा बनाने के दौरान नमी की बहुत जरूरत होती है, जिससे रस्सी मुलायम और मजबूत होती है।

आमतौर पर रस्सी 20 फीट की बनाई जाती है, लेकिन फांसी पाए व्यक्ति के वजन और उसकी लंबाई के आधार पर छोटी बड़ी भी बनाई जा सकती है लेकिन उसके लिए पहले से गर्दन, शरीर, वजन और लंबाई का माप पहले देना पड़ता है। एक तैयार रस्सी पर करीब 168 किलो के व्यक्ति तक को लटकाया जा सकता है। अब सवाल ये है कि गुनहगारों को फांसी पर लटकाने के बाद रस्सी का क्या किया जाता है।

भारत में इसके लिए शायद कोई  कानून नहीं है आमतौर पर रस्सी को या तो जल्लाद को दे दिया जाता है या डेथ स्क्वायड के लोगों को बंद दिया जाता है या फिर उस रस्सी को फांसी लगाने के बाद नष्ट कर दिया जाता है।

 

नीरज सिंह वरिष्ठ संवाददाता डीडी न्यूज़



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