नागरिकता कानून के बहाने लोगों को लड़ाने में लगी है भाजपा

नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी पर देश में उबाल है. इसके खिलाफ रोज ही प्रदर्शन हो रहे हैं. हालांकि रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली की रैली में सफाई भी दी और उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को चेताया भी जो सीना ठोक कर कह रहे थे कि वे अपने यहां एनआरसी लागू नहीं होने देंगे. इन मुख्यमंत्रियों बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हैं. नीतीश कुमार ने कहा था कि एनआरसी बिहार में लागू नहीं होगा लेकिन नरेंद्र मोदी ने कड़े शब्दों में उन्हें भी चेताया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बीच ही सीएए के खिलाफ प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह देश के लोगों को बांट रहे हैं और अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए नफरत के पीछे छिप रहे हैं. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि भारत के प्रिय युवाओं, मोदी और शाह ने आपके भविष्य को बर्बाद कर दिया है. वे नौकरियों की कमी और अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर आपके गुस्से का सामना नहीं कर सकते. यही वजह है कि हमारे प्यारे भारत को बांट रहे हैं और नफरत के पीछे छिप रहे हैं.

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राहुल गांधी ने कहा कि हम हर भारतीय के प्रति स्नेह दिखाकर इनको पराजित कर सकते हैं. दूसरी तरफ, रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार की लगाई आग ने कई जिंदगियां लील ली हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न ही गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर अफसोस जताया और न ही मारे गए लोगों के परिजनों से संवेदना जताई. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भाजपा की साजिश को समझें और देश को तोडऩे वालों से सावधान रहें. उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को हिंदू बनाम मुस्लिम करने में लगी है. लेकिन यह मसला हिंदू-मुस्लिम का नहीं, देश का है. सीएए और एनआरसी के जरिए केंद्र सरकार गरीबों, पिछड़ों, दलितों और मुसलमानों को निशाना बनाने में लगी है. उन्होंने समाज के सभी वर्ग से अपील की कि वे भाजपा की साजिश को समझें और आपस में न लड़ें.

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कांग्रेस नागरिकता संशोधन कानून को असंवैधानिक करार देते हुए इसका खुलकर विरोध कर रही है. उसने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सोमवार को राजघाट पर सत्याग्रह करने का फैसला किया है जिसमें पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सहित पार्टी के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना है. कांग्रेस ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सोमवारको राजघाट पर धरना देने का फैसला किया है, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद पार्टी सूत्रों ने बताया कि छात्रों के आंदोलन के समर्थन और नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ यह धरना दिया जाएगा. सूत्रों के अनुसार इस धरने में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी और कांग्रेस के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं के भाग लेने की संभावना है. कांग्रेस नागरिकता संशोधन कानून को असंवैधानिक करार देते हुए इसका खुलकर विरोध कर रही है.

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पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने एक बयान जारी कर नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को संविधान की मूल आत्मा के खिलाफ करार देते हुए दावा किया कि जनता की आवाज दबाने के लिए सरकार द्वारा तानाशाही का तांडव हो रहा है. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि नागरिकता कानून और एनआरसी के नाम पर गरीब लोगों को प्रताड़ित किया जाएगा.

जनता दल (यूनाइटेड) के उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने शनिवार को विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ सड़क पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं अनुपस्थिति पर नाराजगी जाहिर की थी. उन्होंने कांग्रेस पार्टी के नेताओं से कहा कि वे इन प्रदर्शनों में भाग लें नहीं तो सोनिया गांधी जैसी शख्सीयत का इस संबंध में वीडियो जारी करने का कोई मतलब नहीं रह जाता. ऐसा कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर के ट्वीट के बाद ही कांग्रेस ने सोमवार को राजघाट पर धरना देने का फैसला किया.(राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).

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