असम में एनडीएफबी से समझौते के बाद 1500 काडर्स ने किया सरेंडर, मुख्यधारा में हुए शामिल

ये इस महीने राज्य में दूसरी बार है जब इतनी बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण हुए हैं। असम सरकार ने आश्वासन दिया है कि बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद के इलाके में इस बोडो समझौते के बाद गैर बोडो लोगों के हित प्रभावित नहीं होंगे। मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस समझोते के लिए प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद अदा किया। 

एनडीएफबी काडर के आत्मसमर्पण की प्रधानमंत्री ने प्रशंसा की है, ट्विटर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि.. 

बोडो संगठनों से ऐतिहासिक समझौते के बाद अब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बोडो क्षेत्रों का विकास है। इसके लिए 1500 करोड़ रुपये के पैकेज पर जल्द कार्य शुरू करवाया जाएगा। बोडो साथियों का जीवन आसान बने, उन्हें सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ मिले, इस पर विशेष जोर दिया जाएगा।

बोडो साथियों द्वारा शांति का मार्ग अपनाना, हर क्षेत्र के लिए संदेश है। हिंसा छोड़कर, लोकतंत्र एवं संविधान में आस्था से ही सारी समस्याओं का समाधान संभव है। मैं बोडो साथियों का विकास की मुख्यधारा में स्वागत करता हूं। 

पूज्य बापू की पुण्यतिथि पर आज असम में 5 दशकों से चली आ रही समस्या का समाधान हुआ है। बोडो संगठनों और सरकार के बीच हुए समझौते ने असम की एकता-अखंडता को और मजबूत किया है। 

बोडो संगठनों के साथ हुआ समझौता, असम के साथ ही देश के अन्य हिंसा प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी एक संदेश है। हिंसा और भय से मुक्त वातावरण में ही देश के विकास को गति दी जा सकती है। 

बोडो साथियों के साथ समझौता असम के अन्य समुदायों के हितों की रक्षा करते हुए किया गया है। ये जीत और उसके लिए हुए प्रयास सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र से प्रेरित हैं, एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना से प्रेरित हैं।

2020 के ऐतिहासिक बोडो समझौते में केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद, ऑल बोडो स्टूडेंट यूनियन, गोबिंदो बासुमतारी धड़ा, धीरेन्द्र बोडो धड़ा, रंजन दैमारी और सराइग्वरा धड़ा पक्ष हैं।

दरअसल बोडो इलाके में अलग बोडोलैंड की मांग 50 साल पुरानी है और इसके कारण कई लोगों की जान भी जा चुकी है. 2020 बोडो समझौता सभी पक्षों को साथ लाकर उनके साथ लंबे विचार विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसमें सशस्त्र और सिविल दोनों पक्ष शामिल हैं, 1993 और 2003 में हुए बोडो समझौते से इस समस्या का पूरा समाधान नहीं निकल पाया था।

 



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