जैव चिकित्सा अपशिष्ट पदार्थों के निपटान के लिए कार्यशाल संपन्न

छत्तीसगढ़ पर्यावरण एवं संरक्षण मंडल के नियमों का किया जाए पालन

रायपुर, जैव चिकित्सा अपशिष्ट पदार्थों के निपटान के लिए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ पर्यावरण एवं संरक्षण मंडल के नियमों का पालन करने को कहा है। इसी कड़ी में सरगुजा संभाग के कमिश्नर की अध्यक्षता में जैव चिकित्सा अपशिष्ट नियम 2016 में किए गए उपबंधो के अनुपालन के लिए अम्बिकापुर कार्यालय में एक दिवसीय बैठक सह कार्यशाला संपन्न हुई। संभाग के कमिश्नर श्री लकड़ा ने कहा कि उपरोक्त नियमों के तहत सूखे एवं गीले जैव अपशिष्टों, प्लास्टिक एवं कांच के अपशिष्टों के निपटान की उचित व्यवस्था की जाए।
     
कार्यशाला में चिकित्सा संस्थानों में उत्पन्न दूषित जल के उपचार की उपयुक्त विधि, उपचारित दूषित जल की गुणवत्ता के मानक पर विस्तृत चर्चा की गई। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल के अधिकारी ने जैव चिकित्सा अपशिष्ट नियम 2016 के परिपालन में की जाने वाली कार्यवाहियों के संबंध में प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रस्तुतीकरण दिया।
     
कार्यशाला में बताया गया कि विभिन्न चिकित्सा संस्थानों से निकलने वाले जैव चिकित्सा अपशिष्टों के निपटान के लिए पृथक्करण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। जब तक पृथक्करण प्राथमिक स्तर से ठीक से नहीं होगा तब तक निपटान की कार्यवाही पूरी तरह से नहीं हो पाएगी। सूखा एवं गीला अपशिष्ट पदार्थों के निपटान के लिए ट्रिटमेण्ट प्लांट स्थापित करना होगा। जिससे जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन को प्रभावी बनाया जा सके। वर्तमान में जैव चिकित्सा अपशिष्टों को 4 वर्गाें में विभाजित किया गया है। बताया गया कि संबंधित संस्थानों को प्राधिकारी की मंजूरी के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समिति को प्रारूप-2 में आवेदन करना होगा। कार्यशाला में लघु नर्सिंग होम के प्रतिनिधियों तथा अन्य चिकित्सा संस्थानों के प्रतिनिधियों का शंका समाधान भी किया गया।
 
कार्यशाला में संबंधित जिलों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, उपायुक्त, सीजीएमएससी तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल रायपुर के वरिष्ठ अधिकारियों सहित संभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा इण्डियन मेडिकल एसोशियन के सदस्य उपस्थित थे।

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